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Ghaziabad News: एनसीआर में प्रदूषण रोकने की सख्ती, लेकिन पीयूसीसी जांच व्यवस्था राम भरोसे
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गाजियाबाद। प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए ग्रेप-1 लागू कर दिया गया है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसके तहत निगमों और परिवहन विभाग को प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, यह पाबंदियां ऐसे समय में लागू हुई हैं जब प्रदूषण जांच की अनिवार्यता और उसकी व्यवस्था को लेकर पहले से ही भारी गहमागहमी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
पंप स्वामियों का विरोध और हाईकोर्ट से राहत
पेट्रोल पंप स्वामियों ने पीयूसीसी की वैधता की जांच के लिए परिसर में एएनपीआर कैमरे लगाने से साफ इनकार कर दिया है। इस मामले में पंप स्वामियों का पक्ष सही मानते हुए फिलहाल हाईकोर्ट ने भी उन्हें बड़ी राहत देते हुए इस आदेश पर रोक लगा दी है।
दूसरी ओर, आपूर्ति विभाग की ओर से पेट्रोल पंप कर्मचारियों के लिए एक विशेष एप डाउनलोड कराया गया था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते वह एप अभी तक पूरी तरह से सुचारू रूप से काम नहीं कर सका है।
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संबंधित विभागों की तैयारी अधूरी
अधिकारियों और आयोग के निर्देशों के तहत यह नियम 1 अक्तूबर को लागू किया गया था कि पेट्रोल पंपों पर वाहनों में डीजल, पेट्रोल और सीएनजी तभी भरी जाएगी जब वाहन के पास वैध पीयूसीसी होगी। यदि प्रमाण पत्र वैध नहीं है, तो ईंधन की आपूर्ति नहीं की जाएगी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस कड़े नियम के बीच आने वाले दिनों में पीयूसीसी की जमीनी स्तर पर जांच के लिए क्या पुख्ता व्यवस्था रहेगी, इसका कोई स्पष्ट खाका या कार्ययोजना अभी तक आपूर्ति और परिवहन विभाग की ओर से तैयार नहीं की गई है।
कोट-
जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी का कहना है कि इस संबंध में अभी तक उन्हें विभाग की ओर से कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। जैसे ही उच्च स्तर से अग्रिम निर्देश मिलेंगे, नियमों के तहत आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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पंप स्वामियों का विरोध और हाईकोर्ट से राहत
पेट्रोल पंप स्वामियों ने पीयूसीसी की वैधता की जांच के लिए परिसर में एएनपीआर कैमरे लगाने से साफ इनकार कर दिया है। इस मामले में पंप स्वामियों का पक्ष सही मानते हुए फिलहाल हाईकोर्ट ने भी उन्हें बड़ी राहत देते हुए इस आदेश पर रोक लगा दी है।
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दूसरी ओर, आपूर्ति विभाग की ओर से पेट्रोल पंप कर्मचारियों के लिए एक विशेष एप डाउनलोड कराया गया था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते वह एप अभी तक पूरी तरह से सुचारू रूप से काम नहीं कर सका है।
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संबंधित विभागों की तैयारी अधूरी
अधिकारियों और आयोग के निर्देशों के तहत यह नियम 1 अक्तूबर को लागू किया गया था कि पेट्रोल पंपों पर वाहनों में डीजल, पेट्रोल और सीएनजी तभी भरी जाएगी जब वाहन के पास वैध पीयूसीसी होगी। यदि प्रमाण पत्र वैध नहीं है, तो ईंधन की आपूर्ति नहीं की जाएगी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस कड़े नियम के बीच आने वाले दिनों में पीयूसीसी की जमीनी स्तर पर जांच के लिए क्या पुख्ता व्यवस्था रहेगी, इसका कोई स्पष्ट खाका या कार्ययोजना अभी तक आपूर्ति और परिवहन विभाग की ओर से तैयार नहीं की गई है।
कोट-
जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी का कहना है कि इस संबंध में अभी तक उन्हें विभाग की ओर से कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। जैसे ही उच्च स्तर से अग्रिम निर्देश मिलेंगे, नियमों के तहत आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।