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चोरी का पानी पी रहे 15 लाख से ज्यादा गाजियाबादी
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 28 Apr 2016 11:41 PM IST
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पानी की बर्बादी
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जनपद के 15 लाख से ज्यादा लोगों को चोरी का पेयजल सप्लाई किया जा रहा है। डार्क जोन में शामिल गाजियाबाद में 400 से ज्यादा वाटर पैकिंग यूनिट्स हैं। नियमानुसार यहां एक भी पैकिंग-सप्लाई यूनिट नहीं लगाई जा सकती है।
किसी स्थिति में पानी की बिक्री नहीं की जा सकती है। पानी बिक्री करने वाली सभी स्थानीय यूनिट इसकी चोरी करा रही हैं। मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में उठाया गया है। 10 मई को इस मामले में सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के मानकों को ताक पर रखकर जनपद में बड़े स्तर पर पानी की चोरी की जा रही है। एनसीआर के ज्यादातर जनपद डार्क जोन में शामिल हैं। गाजियाबाद के चारों ब्लॉक क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल कैटेगिरी में हैं।
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ऐसे क्षेत्रों में ग्राउंड वाटर को परिवार अपने इस्तेमाल के लिए ही निकाल सकते हैं। इसकी बिक्री, कारोबार-व्यापार नहीं किया जा सकता है। पानी की बिक्री या कामर्शियल प्रयोग सीजीडब्ल्यूए (केंद्रीय ग्राउंड वाटर अथॉरिटी) से लाइसेंस लेने के बाद ही किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल एरिया में सीजीडब्ल्यूए की एनओसी नहीं मिल सकती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 400 में से एक भी यूनिट के पास एनओसी नहीं है। ऐसे में इनका पानी सप्लाई करना चोरी की श्रेणी में आता है।
बोर्ड के अनुसार वाटर यूनिट्स ने प्रदूषण न करने की एनओसी ली है। ग्राउंड वाटर निकालने की परमिशन नहीं ली गई है। इन यूनिट से करीब 15 लाख लोगों के पीने लायक पानी की आपूर्ति रोजाना की जाती है।
सामाजिक संगठन पर्यावरण सुरक्षा समिति के डायरेक्टर शैलेश चौहान ने बताया कि इस मामले को एनजीटी में उठाया गया है। इसकी सुनवाई 10 मई को होगी।
जलदोहन वाली यूनिट के पास सीजीडब्ल्यूए की एनओसी होनी चाहिए। अभी तक बिना एनओसी वाली यूनिट के खिलाफ कार्रवाई का कोई आदेश नहीं आया है। एनजीटी का जो आदेश आएगा, उसका पालन कराया जाएगा। - रोहित सचान, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
गाजियाबाद में पीने के पानी की भारी किल्लत है। सरकार को एनओसी जारी करानी चाहिए। यदि यूनिट्स को बंद कराने का प्रयास हुआ तो पीने के पानी को लेकर आफत आ जाएगी। - राजेंद्र कुमार, सचिव वाटर सप्लाई एसोसिएशन।
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किसी स्थिति में पानी की बिक्री नहीं की जा सकती है। पानी बिक्री करने वाली सभी स्थानीय यूनिट इसकी चोरी करा रही हैं। मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में उठाया गया है। 10 मई को इस मामले में सुनवाई होगी।
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सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के मानकों को ताक पर रखकर जनपद में बड़े स्तर पर पानी की चोरी की जा रही है। एनसीआर के ज्यादातर जनपद डार्क जोन में शामिल हैं। गाजियाबाद के चारों ब्लॉक क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल कैटेगिरी में हैं।
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ऐसे क्षेत्रों में ग्राउंड वाटर को परिवार अपने इस्तेमाल के लिए ही निकाल सकते हैं। इसकी बिक्री, कारोबार-व्यापार नहीं किया जा सकता है। पानी की बिक्री या कामर्शियल प्रयोग सीजीडब्ल्यूए (केंद्रीय ग्राउंड वाटर अथॉरिटी) से लाइसेंस लेने के बाद ही किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल एरिया में सीजीडब्ल्यूए की एनओसी नहीं मिल सकती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 400 में से एक भी यूनिट के पास एनओसी नहीं है। ऐसे में इनका पानी सप्लाई करना चोरी की श्रेणी में आता है।
बोर्ड के अनुसार वाटर यूनिट्स ने प्रदूषण न करने की एनओसी ली है। ग्राउंड वाटर निकालने की परमिशन नहीं ली गई है। इन यूनिट से करीब 15 लाख लोगों के पीने लायक पानी की आपूर्ति रोजाना की जाती है।
सामाजिक संगठन पर्यावरण सुरक्षा समिति के डायरेक्टर शैलेश चौहान ने बताया कि इस मामले को एनजीटी में उठाया गया है। इसकी सुनवाई 10 मई को होगी।
जलदोहन वाली यूनिट के पास सीजीडब्ल्यूए की एनओसी होनी चाहिए। अभी तक बिना एनओसी वाली यूनिट के खिलाफ कार्रवाई का कोई आदेश नहीं आया है। एनजीटी का जो आदेश आएगा, उसका पालन कराया जाएगा। - रोहित सचान, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
गाजियाबाद में पीने के पानी की भारी किल्लत है। सरकार को एनओसी जारी करानी चाहिए। यदि यूनिट्स को बंद कराने का प्रयास हुआ तो पीने के पानी को लेकर आफत आ जाएगी। - राजेंद्र कुमार, सचिव वाटर सप्लाई एसोसिएशन।