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Ghaziabad News: एफआईआर के बाद भी नहीं बदले हालात, पानी काे तरस रहे लोग
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गाजियाबाद। विजयनगर के पांच वार्डों में पानी मुहैया कराने में नाकाम रही मैसर्स ओपी गुप्ता कंस्ट्रक्शन कंपनी और जेवी मैसर्स आरके इंजीनियर के खिलाफ 12 अक्तूबर को रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं। लोगों को दिन में आधा घंटा भी पानी नहीं मिल पा रहा है। पुलिस को आरोपियों को पकड़कर पंप का सामान बरामद कराना था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
47 करोड़ की लागत से विजयनगर के डूंडाहेड़ा, शांतिनगर समेत पांच वार्डों में 2017 में पानी की लाइन डालने का काम शुरू हुआ था, जो 2020 में पूरा होना था। इसके बाद योजना नगर निगम को हैंडओवर होनी थी, लेकिन लाइन डालने में भारी अनियमितता बरती गई। निगम की तकनीकी टीम ने खामियों की रिपोर्ट तैयार कर हैंडओवर से इन्कार कर दिया। तब से कार्यदायी संस्था ही देखरेख का दावा कर रही है और अब इसी हालत में निगम को हैंडओवर करने का प्रयास हो रहा है।
छह घंटे पानी देने का था अनुबंध
डूंडाहेड़ा पार्षद नरेश जाटव ने बताया कि संस्था को सुबह तीन घंटे और शाम तीन घंटे यानी कुल छह घंटे पानी देना था, लेकिन पांच मिनट भी नहीं मिल पा रहा है। पांच ट्यूबवेलों पर लगे कर्मचारी वेतन न मिलने से ड्यूटी छोड़कर चले जाते हैं। हाल ही में पंप का सामान संस्था के लोग उठा ले गए। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी मालिकों से पूछताछ और सामान की बरामदगी नहीं हुई। जल निगम ने रिपोर्ट दर्ज कराने में ही छह साल लगा दिए, जबकि काम की गुणवत्ता तभी खराब मिली थी। एसीपी उपासना पांडेय ने बताया कि विवेचक से प्रगति पूछी जाएगी और लापरवाही पर कार्रवाई होगी।
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सरकारी नलों के सहारे जिंदगी
स्थानीय निवासी योगेश कुमार ने बताया कि लंबे इंतजार के बाद भी जनता पानी से वंचित है। लोग सरकारी नलों के सहारे हैं, हर किसी के पास ढाई लाख खर्च कर निजी सबमर्सिबल लगवाने की क्षमता नहीं है। सरकारी नलों पर सुबह-शाम लंबी लाइन लगती है।
47 करोड़ की लागत से विजयनगर के डूंडाहेड़ा, शांतिनगर समेत पांच वार्डों में 2017 में पानी की लाइन डालने का काम शुरू हुआ था, जो 2020 में पूरा होना था। इसके बाद योजना नगर निगम को हैंडओवर होनी थी, लेकिन लाइन डालने में भारी अनियमितता बरती गई। निगम की तकनीकी टीम ने खामियों की रिपोर्ट तैयार कर हैंडओवर से इन्कार कर दिया। तब से कार्यदायी संस्था ही देखरेख का दावा कर रही है और अब इसी हालत में निगम को हैंडओवर करने का प्रयास हो रहा है।
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छह घंटे पानी देने का था अनुबंध
डूंडाहेड़ा पार्षद नरेश जाटव ने बताया कि संस्था को सुबह तीन घंटे और शाम तीन घंटे यानी कुल छह घंटे पानी देना था, लेकिन पांच मिनट भी नहीं मिल पा रहा है। पांच ट्यूबवेलों पर लगे कर्मचारी वेतन न मिलने से ड्यूटी छोड़कर चले जाते हैं। हाल ही में पंप का सामान संस्था के लोग उठा ले गए। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी मालिकों से पूछताछ और सामान की बरामदगी नहीं हुई। जल निगम ने रिपोर्ट दर्ज कराने में ही छह साल लगा दिए, जबकि काम की गुणवत्ता तभी खराब मिली थी। एसीपी उपासना पांडेय ने बताया कि विवेचक से प्रगति पूछी जाएगी और लापरवाही पर कार्रवाई होगी।
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सरकारी नलों के सहारे जिंदगी
स्थानीय निवासी योगेश कुमार ने बताया कि लंबे इंतजार के बाद भी जनता पानी से वंचित है। लोग सरकारी नलों के सहारे हैं, हर किसी के पास ढाई लाख खर्च कर निजी सबमर्सिबल लगवाने की क्षमता नहीं है। सरकारी नलों पर सुबह-शाम लंबी लाइन लगती है।