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शेरशाह सूरी ने बनवाई थी शाही जामा मस्जिद
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Fri, 17 Jun 2016 01:15 AM IST
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मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद की ऐतिहासिक मस्जिदों में आज आपको रूबरू कराया जा रहा है मुरादनगर मेन बाजार सराय स्थित शाही जामा मस्जिद के इतिहास से, जिसे बादशाह शेरशाह सूरी ने करीब पौने पांच सौ साल पहले सराय गेट के साथ बनवाया था।
इस वक्त करीब चार सौ वर्ग गज में बनी इस शाही जामा मस्जिद में करीब 250-300 लोग एक साथ नमाज पढ़ सकते हैं। जुमे की नमाज में नमाजियों की तादाद 800 के करीब पहुंच जाती है और ईद की नमाज के दौरान हजारों लोग नमाज अदा करते हैं।
मस्जिद भर जाने पर लोग मस्जिद के बाहर तक नमाज पढ़ने के लिए सफे बना लेते हैं। मस्जिद में दूर दराज से भी लोग नमाज पढ़ने आते हैं। इतिहासकार बताते हैं कि करीब पौने पांच सौ साल पहले बादशाह शेरशाह सूरी ने सेना के साथ यहां पड़ाव डाला था, तभी उन्होंने यहां के मशहूर सराय गेट के साथ इस मस्जिद का निर्माण कराया था।
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मस्जिद में आज भी पुराना कुआं है, जिससे उस वक्त पानी निकालकर वुजू की जाती थी। हालांकि यह कुआं अब सालों से बंद है। मस्जिद के मुतवल्ली हाजी मोहम्मद अलीम गाजी ने बताया कि पहले यह मस्जिद इतनी बड़ी नहीं थी।
अपने निर्माण के समय मस्जिद 50-55 वर्ग गज में ही रही होगी। तब दूर-दूर तक घर भी नहीं थे। मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद इकबाल का कहना है कि तामीर होने से अब तक मस्जिद में काफी निर्माण और सौंदर्यीकरण कराया गया है, जिससे इसका नक्शा काफी बदल गया है।
कौन थे शेरशाह सूरी
शेरशाह सूरी (1472-22 मई 1545) का जन्म सासाराम शहर में हुआ था, जो अब बिहार के रोहतास जिले में है। उनका असली नाम फरीद खां था, पर वह शेरशाह के रूप में जाने जाते थे। शेरशाह सूरी ने पहले बाबर के लिए एक सैनिक के रूप में काम किया था। बाबर ने उन्हें सेनापति बनाया और फिर बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया। 1537 में उन्होंने बंगाल पर कब्जा कर सूरी वंश स्थापित किया था। शेरशाह सूरी ने 1540 में हुमायूं को हराकर भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और शेर खान की उपाधि लेकर संपूर्ण उत्तर भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित कर दिया।
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इस वक्त करीब चार सौ वर्ग गज में बनी इस शाही जामा मस्जिद में करीब 250-300 लोग एक साथ नमाज पढ़ सकते हैं। जुमे की नमाज में नमाजियों की तादाद 800 के करीब पहुंच जाती है और ईद की नमाज के दौरान हजारों लोग नमाज अदा करते हैं।
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मस्जिद भर जाने पर लोग मस्जिद के बाहर तक नमाज पढ़ने के लिए सफे बना लेते हैं। मस्जिद में दूर दराज से भी लोग नमाज पढ़ने आते हैं। इतिहासकार बताते हैं कि करीब पौने पांच सौ साल पहले बादशाह शेरशाह सूरी ने सेना के साथ यहां पड़ाव डाला था, तभी उन्होंने यहां के मशहूर सराय गेट के साथ इस मस्जिद का निर्माण कराया था।
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मस्जिद में आज भी पुराना कुआं है, जिससे उस वक्त पानी निकालकर वुजू की जाती थी। हालांकि यह कुआं अब सालों से बंद है। मस्जिद के मुतवल्ली हाजी मोहम्मद अलीम गाजी ने बताया कि पहले यह मस्जिद इतनी बड़ी नहीं थी।
अपने निर्माण के समय मस्जिद 50-55 वर्ग गज में ही रही होगी। तब दूर-दूर तक घर भी नहीं थे। मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद इकबाल का कहना है कि तामीर होने से अब तक मस्जिद में काफी निर्माण और सौंदर्यीकरण कराया गया है, जिससे इसका नक्शा काफी बदल गया है।
कौन थे शेरशाह सूरी
शेरशाह सूरी (1472-22 मई 1545) का जन्म सासाराम शहर में हुआ था, जो अब बिहार के रोहतास जिले में है। उनका असली नाम फरीद खां था, पर वह शेरशाह के रूप में जाने जाते थे। शेरशाह सूरी ने पहले बाबर के लिए एक सैनिक के रूप में काम किया था। बाबर ने उन्हें सेनापति बनाया और फिर बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया। 1537 में उन्होंने बंगाल पर कब्जा कर सूरी वंश स्थापित किया था। शेरशाह सूरी ने 1540 में हुमायूं को हराकर भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और शेर खान की उपाधि लेकर संपूर्ण उत्तर भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित कर दिया।