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Ghaziabad News: स्टेंट डालने के बाद मरीज की मौत, मणिपाल अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश
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गाजियाबाद। दिल में स्टेंट डालने के बाद मरीज की मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऐश्वर्य प्रताप सिंह के न्यायालय ने मणिपाल अस्पताल पर परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। इलाज में लापरवाही के आरोप पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने अपनी जांच में अस्पताल को क्लीन चिट दे दी थी। पुलिस ने भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। इस पर पीड़ित पत्नी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने बयान के लिए 12 दिसंबर की तारीख तय की है।
प्रताप विहार सेक्टर-12 निवासी आरती रावल ने न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। इसमें बताया कि उनके पति अजीत रावल को छह नवंबर 2023 को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई। उन्हें आस्था अस्पताल ले जाया गया, जहां से मणिपाल अस्पताल रेफर कर दिया गया।
मणिपाल अस्पताल में छह से 10 नवंबर तक डॉ. अभिषेक सिंह व डाॅ. मिलिंद आनंद राव ने मरीज का इलाज किया। तबीयत में कुछ सुधार होने पर उनको घर भेज दिया गया, लेकिन 17 नवंबर को हालत फिर बिगड़ गई। उन्हें दोबारा मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। वहां डाॅक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह देते हुए 27 नवंबर की तारीख निर्धारित की। 26 नवंबर को भर्ती करते समय अस्पताल ने दो लाख रुपये जमा कराए, जबकि मरीज के पास हेल्थ पॉलिसी मौजूद थी।
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आरती के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान मरीज के दिल में स्टील का स्टेंट डाला गया। डॉक्टरों ने दावा किया कि वह जल्द ठीक हो जाएंगे, लेकिन 28 नवंबर की रात मरीज की हालत बिगड़ गई। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद नहीं था। जूनियर स्टाफ ने मरीज को दर्दनिवारक दवा दी। इस बीच परिजन लगातार अनुरोध करते रहे, लेकिन वरिष्ठ डॉक्टर 10 से 12 घंटे बाद पहुंचे। तब तक मरीज की हालत नाजुक हो चुकी थी। 29 नवंबर की सुबह मरीज की मौत हो गई।
याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि मुख्य चिकित्साधिकारी की जांच रिपोर्ट और पीड़िता के आरोपों में कई विरोधाभास हैं। यह भी जानना आवश्यक है कि गंभीर स्थिति में डाॅक्टर समय पर मौजूद क्यों नहीं थे। मरीज को वेंटिलेटर पर ले जाने और हटाने की जानकारी परिवार को दी गई थी या नहीं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
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ऑपरेशन प्रक्रिया की सीडी न देने का आरोप
आरती ने अस्पताल प्रशासन पर ऑपरेशन प्रक्रिया की सीडी न देने और जानकारी छिपाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि छह फरवरी 2024 को थाना कविनगर और पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी। इस बीच मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय ने प्रारंभिक जांच आख्या दाखिल की, जिसमें अस्पताल प्रबंधन को दोषमुक्त माना गया।
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प्रताप विहार सेक्टर-12 निवासी आरती रावल ने न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। इसमें बताया कि उनके पति अजीत रावल को छह नवंबर 2023 को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई। उन्हें आस्था अस्पताल ले जाया गया, जहां से मणिपाल अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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मणिपाल अस्पताल में छह से 10 नवंबर तक डॉ. अभिषेक सिंह व डाॅ. मिलिंद आनंद राव ने मरीज का इलाज किया। तबीयत में कुछ सुधार होने पर उनको घर भेज दिया गया, लेकिन 17 नवंबर को हालत फिर बिगड़ गई। उन्हें दोबारा मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। वहां डाॅक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह देते हुए 27 नवंबर की तारीख निर्धारित की। 26 नवंबर को भर्ती करते समय अस्पताल ने दो लाख रुपये जमा कराए, जबकि मरीज के पास हेल्थ पॉलिसी मौजूद थी।
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आरती के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान मरीज के दिल में स्टील का स्टेंट डाला गया। डॉक्टरों ने दावा किया कि वह जल्द ठीक हो जाएंगे, लेकिन 28 नवंबर की रात मरीज की हालत बिगड़ गई। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद नहीं था। जूनियर स्टाफ ने मरीज को दर्दनिवारक दवा दी। इस बीच परिजन लगातार अनुरोध करते रहे, लेकिन वरिष्ठ डॉक्टर 10 से 12 घंटे बाद पहुंचे। तब तक मरीज की हालत नाजुक हो चुकी थी। 29 नवंबर की सुबह मरीज की मौत हो गई।
याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि मुख्य चिकित्साधिकारी की जांच रिपोर्ट और पीड़िता के आरोपों में कई विरोधाभास हैं। यह भी जानना आवश्यक है कि गंभीर स्थिति में डाॅक्टर समय पर मौजूद क्यों नहीं थे। मरीज को वेंटिलेटर पर ले जाने और हटाने की जानकारी परिवार को दी गई थी या नहीं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
ऑपरेशन प्रक्रिया की सीडी न देने का आरोप
आरती ने अस्पताल प्रशासन पर ऑपरेशन प्रक्रिया की सीडी न देने और जानकारी छिपाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि छह फरवरी 2024 को थाना कविनगर और पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी। इस बीच मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय ने प्रारंभिक जांच आख्या दाखिल की, जिसमें अस्पताल प्रबंधन को दोषमुक्त माना गया।