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झील-तालाबों पर कब्जे के लिए अफसर भी जिम्मेदार

Thu, 01 Jun 2017 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो गाजियाबाद Updated Thu, 01 Jun 2017 11:07 PM IST
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Officer responsible for occupying lake ponds
सूखा पड़ा तालाब - फोटो : अमर उजाला

 एनजीटी की फटकार के बाद नगर निगम और प्रशासनिक अफसर दौड़ भले लगा रहे हों लेकिन तालाबों और अर्थला झील पर कब्जे के लिए वह खुद भी जिम्मेदार हैं। 2005 से 2012 के बीच यहां सबसे ज्यादा कब्जे हुए। बालाजी विहार के नाम से भूमाफियाओं ने यहां पूरी कालोनी बसा दी और अफसर सोते रहे।

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न जीडीए ने अवैध निर्माण रुकवाया और न ही नगर निगम को सरकारी जमीन की याद आई। अब मकानों का ध्वस्तीकरण हुआ तो खामियाजा आम लोग भुगतेंगे।अर्थला झील पर अवैध कब्जों को लेकर पूर्व में हाईकोर्ट ने भी निर्माण हटाने के आदेश दिए थे।
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वर्ष 2013 में हाईकोर्ट ने 2008 से 2012 के बीच नगर निगम, जीडीए और पुलिस के उन संबंधित अफसरों के नाम भी मांगे थे, जिनकी जिम्मेदारी अवैध निर्माण रुकवाने की थी।
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अफसरों के नाम तय करने के लिए नगर निगम ने पीडब्ल्यूडी समेत कई विभागों के इंजीनियरों की टीम को बालाजी विहार भेजकर झील की जमीन पर बने मकानों की आयु का पता लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की थी। बावजूद इसके निगम अधिकारियों ने झील की जमीन को खाली नहीं कराया।

2013 के बाद भी अर्थला झील की जमीन पर अवैध निर्माण हुए हैं। ऐसे में सिर्फ झील की जमीन पर मकान बनाने वाले ही नहीं सरकारी विभागों के अफसर भी उतने ही दोषी हैं। बता दें कि 2008 से 2012 तक शहर में नगरायुक्त के पद पर अजय शंकर पांडेय, बसंत लाल और जितेंद्र सिंह की तैनाती रही थी।

तालाबों पर खड़ी कर दीं सरकारी इमारतें
सिर्फ भूमाफियाओं ने ही नहीं सरकारी विभागों ने भी तालाबों की जमीन कब्जाई है। आवास विकास परिषद ने प्रहलाद गढ़ी के तालाबों के सात खसरा नंबरों पर वसुंधरा कालोनी बसा दी। कड़कड़ मॉडल, झंडापुर और महाराजपुर में यूपीएसआईडीसी ने तालाबों की जमीन का पुनर्ग्रहण कर लिया। इनमें अधिकांश पर रास्ता व आबादी है।

रजापुर, मकनपुर और सिहानी के तालाबों के सात खसरा नंबरों पर जीडीए ने कालोनियां बसा दीं। वर्तमान में यहां इमारतें खड़ी हैं। नगर निगम ने सद्दीक नगर में तालाब की जमीन पर गोदाम बना दिया है। कई खसरा नंबरों पर जल निगम की पानी की टंकी बनी हुई हैं। नगर निगम सीमा क्षेत्र में कुल 134 तालाबों पर कब्जा हुआ है।

इनमें से सिर्फ 40 तालाब ऐसे हैं जिन पर पक्के निर्माण नहीं हुए हैं, लेकिन मिट्टी का भराव कर पाट दिए गए हैं।

सरकारी विभाग बदले में देंगे जमीन
जीडीए, आवास विकास परिषद, यूपीएसआईडीसी और सीपीडब्ल्यूडी समेत ऐसे सरकारी विभाग जो तालाबों की जमीन पर इमारतें बना चुके हैं अब दूसरे स्थानों पर तालाब खुदवाएंगे। नगर निगम ने इन विभागों को जमीनों का रिकार्ड भेज दिया है। उनके प्रोजेक्ट में आए तालाबों की जमीनों का क्षेत्रफल बता दिया गया है।


मंडलायुक्त के निर्देश पर अब यह विभाग जल्द ही जमीन उपलब्ध कराएंगे। तालाबों का सर्वे करा लिया गया है। सबसे पहले ऐसे तालाबों को खाली कराया जा रहा है जिन पर पक्के निर्माण नहीं हैं, सिर्फ मिट्टी का भराव किया गया है। इसके बाद पक्के निर्माण वाले तालाबों को खाली कराया जाएगा।

अर्थला झील पर कब्जा करने वालों को नोटिस जारी कर निर्माण हटाने के लिए मोहलत दी गई है। - चंद्रप्रकाश सिंह, नगरायुक्त

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