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नोटबंदी से लोहा कारोबार में मंदी
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sat, 03 Dec 2016 10:32 PM IST
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आयरन बाजार
- फोटो : अमर उजाला
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लोहा मंडी इस वक्त कारोबार के लिहाज से सबसे बुरे वक्त से गुजर रही है। नोट बंदी के बाद से लोहे का थोक कारोबार 70 से 80 प्रतिशत तक गिर गया है जबकि रिटेल कारोबार लगभग खत्म सा हो गया है। लोहा व्यापारी खाली बैठे हैं। नए ऑर्डर मिल नहीं रहे और पुराने ऑर्डर कैंसल हो रहे हैं। नोट बंदी का असर प्रदेश सरकार के राजस्व पर भी पड़ा है।
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वाणिज्य कर विभाग को करीब 40 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हुई है। कारोबार कब तक संभलेगा, इसका अनुमान भी किसी व्यापारी को नहीं है।गाजियाबाद में वर्ष 1968 से लोहे का कारोबार शुरू हुआ, तब यहां तीन दुकानें थीं।
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वर्ष 1974 में सेल का यार्ड बनने के बाद से दुकानें खुलने का सिलसिला तेज हो गया। वर्ष 2004 में लोहा मंडी को नवयुग मार्केट से शिफ्ट करके बुलंदशहर औद्योगिक क्षेत्र लाया गया। लोहा कारोबारियों की मानें वर्तमान में यहां पर 500 दुकानें हैं। कुछ व्यापारी ऐसे हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 1000 से 2000 हजार करोड़ रुपये तक है।
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क्या कहते हैं व्यापारी
- लोहा विक्रेता मंडल के चेयरमैन सुभाष गुप्ता ने बताया कि लोहे का रिटेल का कारोबार लगभग खत्म हो गया है, क्योंकि रिटेल कारोबारी कैश पर ही काम करते हैं। वैसे भी लोहा व्यवसाय क्रेडिट पर नहीं चलता है। नोट बंदी के बाद से दुश्वारियों का दौर शुरू हो गया है। करीब 70 से 80 प्रतिशत कारोबार गिर गया है।
- विक्रेता मंडल के महामंत्री मधुकर सिंघल ने बताया कि बैंकों के पास कैश है नहीं। एक तरफ सरकार भरपूर कैश देने की बात कह रही है, लेकिन वास्तविकता विपरीत है। करंट एकाउंट से भी रुपये नहीं दिए जा रहे हैं।
- मंडल के वरिष्ठ सदस्य प्रमोद गुप्ता ने बताया कि लोहे का कारोबार बड़े नोटों पर चलता है। अचानक से लिए गए फैसले से कारोबार गिरा है। ऑर्डर कैंसल हुए हैं। मजदूर खाली बैठे हैं। उन्हें तनख्वाह देने के लिए भी कैश नहीं है। बैंक में लाइन लगाने पर भी महज पांच से 10 हजार रुपये मिलते हैं।