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अंग्रेजों के जमाने के बाजार में टॉयलेट एक भी नहीं
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Fri, 29 Apr 2016 12:35 AM IST
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toilet
- फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री का ‘स्वच्छ भारत मिशन’ भी गाजियाबाद की हालत सुधार नहीं पाया। अंग्रेजों के जमाने का सिहानी गेट बाजार नगर निगम की उपेक्षा झेल रहा है। शहर के सबसे पुराने इस बाजार में एक भी पब्लिक टॉयलेट नहीं है।
10 साल पहले सिहानी गेट व्यापार मंडल के सदस्यों ने चंदा कर एक यूरिनल बनवाया। नगर निगम इसकी सफाई तक नहीं कराता। सफाई और मेंटेनेंस भी व्यापारी खुद ही करते हैं। शहर के बीच बसे इस बाजार में रोजाना हजारों ग्राहक आते हैं, इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है।
दुकानों में काम करने वाली सेल्स गर्ल्स और महिला व्यापारियों के लिए भी शौचालय की सुविधा नहीं है। ‘अमर उजाला’ की टीम स्वच्छता की मुहिम का जायजा लेने जब सिहानी गेट बाजार के व्यापारियों से बात करने पहुंची तो निगम के अभियान की हकीकत सामने आईं।
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काफी पुराना है यह बाजार
सिंहानी गेट बाजार काफी पुराना बाजार है। अंग्रेजों के जमाने से पहले गाजियाबाद शहर इन चार गेटों के इर्दगिर्द ही बसता था। उस समय राजनगर, कविनगर आदि क्षेत्रों का विकास भी नहीं हुआ था। थोक और खुदरा से लेकर जरूरत की हर चीज यहां मिलती है जिसकी खरीदारी करने के लिए मोदीनगर, मुरादनगर, हापुड़ सहित दूर-दूर से लोग आते थे।
व्यापारियों की व्यथा
इतने पुराने बाजार में एक शौचालय नहीं है जिसकी सख्त जरूरत है। नगर-निगम से और पार्षद से इसकी गुहार कई बार लगाई गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बाजार में सिर्फ यूरिनल है। शौचालय न होने से महिलाओं को ही नहीं पुरुषों को भी काफी परेशानी होती है।
- अनुराग गर्ग, अध्यक्ष, सिहानी गेट व्यापार मंडल
इस यूरिनल में पानी की भी व्यवस्था नहीं है। दुकानों से बाल्टी के जरिए वहां पानी पहुंचाया जाता है। निगम से मदद नहीं मिल रही। - संजय अग्रवाल , कोषाध्यक्ष व्यापार मंडल
आसपास के जितने भी बाजार हैं उनके बीच में यही एक यूरिनल है। अग्रसेन बाजार समेत आसपास के सभी बाजारों के भी व्यापारी यहीं आते हैं। - अनिल कुमार गर्ग, व्यापारी
महिलाएं बोलीं
सुबह 10 बजे से रात आठ बजे तक शॉप पर काम करते हैं। दिन भर में अगर कभी टॉयलेट जाना पड़े तो दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आसपास किसी के घर जाना पड़ता है। - शगुन, सेल्स गर्ल, मालीवाड़ा निवासी
दिन भर टॉयलेट कम जाना पड़े इसके लिए कम से कम पानी पीते हैं। शहर में टॉयलेट की कमी पर न तो निगम अधिकारियों का ध्यान है, न ही सरकार का। - काजल सेल्स गर्ल, सेवा नगर निवासी
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10 साल पहले सिहानी गेट व्यापार मंडल के सदस्यों ने चंदा कर एक यूरिनल बनवाया। नगर निगम इसकी सफाई तक नहीं कराता। सफाई और मेंटेनेंस भी व्यापारी खुद ही करते हैं। शहर के बीच बसे इस बाजार में रोजाना हजारों ग्राहक आते हैं, इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है।
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दुकानों में काम करने वाली सेल्स गर्ल्स और महिला व्यापारियों के लिए भी शौचालय की सुविधा नहीं है। ‘अमर उजाला’ की टीम स्वच्छता की मुहिम का जायजा लेने जब सिहानी गेट बाजार के व्यापारियों से बात करने पहुंची तो निगम के अभियान की हकीकत सामने आईं।
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काफी पुराना है यह बाजार
सिंहानी गेट बाजार काफी पुराना बाजार है। अंग्रेजों के जमाने से पहले गाजियाबाद शहर इन चार गेटों के इर्दगिर्द ही बसता था। उस समय राजनगर, कविनगर आदि क्षेत्रों का विकास भी नहीं हुआ था। थोक और खुदरा से लेकर जरूरत की हर चीज यहां मिलती है जिसकी खरीदारी करने के लिए मोदीनगर, मुरादनगर, हापुड़ सहित दूर-दूर से लोग आते थे।
व्यापारियों की व्यथा
इतने पुराने बाजार में एक शौचालय नहीं है जिसकी सख्त जरूरत है। नगर-निगम से और पार्षद से इसकी गुहार कई बार लगाई गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बाजार में सिर्फ यूरिनल है। शौचालय न होने से महिलाओं को ही नहीं पुरुषों को भी काफी परेशानी होती है।
- अनुराग गर्ग, अध्यक्ष, सिहानी गेट व्यापार मंडल
इस यूरिनल में पानी की भी व्यवस्था नहीं है। दुकानों से बाल्टी के जरिए वहां पानी पहुंचाया जाता है। निगम से मदद नहीं मिल रही। - संजय अग्रवाल , कोषाध्यक्ष व्यापार मंडल
आसपास के जितने भी बाजार हैं उनके बीच में यही एक यूरिनल है। अग्रसेन बाजार समेत आसपास के सभी बाजारों के भी व्यापारी यहीं आते हैं। - अनिल कुमार गर्ग, व्यापारी
महिलाएं बोलीं
सुबह 10 बजे से रात आठ बजे तक शॉप पर काम करते हैं। दिन भर में अगर कभी टॉयलेट जाना पड़े तो दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आसपास किसी के घर जाना पड़ता है। - शगुन, सेल्स गर्ल, मालीवाड़ा निवासी
दिन भर टॉयलेट कम जाना पड़े इसके लिए कम से कम पानी पीते हैं। शहर में टॉयलेट की कमी पर न तो निगम अधिकारियों का ध्यान है, न ही सरकार का। - काजल सेल्स गर्ल, सेवा नगर निवासी