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Ghaziabad News: पीएम आवासीय योजना के तहत नहीं बनाए एक भी फलैट, रद्द होगा लाइसेंस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2024 05:24 AM IST
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Not a single flat is built under PM Housing Scheme, license will be canceled
गाजियाबाद। प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत गरीबों के लिए आवास नहीं बनाने पर ग्लोबल सिग्नेचर बिल्डर का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। शासन ने जीडीए से लाइसेंस रद करने के लिए संस्तुति पत्र मांगा है। शुक्रवार को लखनऊ में प्रदेश के सभी प्राधिकरणों में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
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आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव नितिन रमेश गोकर्ण की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री आवासीय योजना की प्रगति समेत कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। जीडीए वीसी अतुल वत्स ने बताया कि जिले में 3400 से अधिक गरीबों के आवास लगभग बनकर तैयार हैं। आवासों में बिजली और पेयजल की उपलब्धता के लिए जलनिगम और ऊर्जा निगम से लगातार पत्र व्यवहार किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि प्रभावी पैरवी कर व्यवस्था समय से सुनिश्चित कराई जाए। गाजियाबाद से जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह ने सभी योजनाओं का पीपीटी के माध्यम से प्रजेंटेशन किया। उन्होंने बताया कि ग्लोबल सिग्नेचर के बिल्डर ने 400 से अधिक पीएम आवासीय योजना के तहत आवास बनाने का लाइसेंस लिया था लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं कर पाया है। एसीएस ने कहा कि रिपोर्ट भेजिए, लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। जीडीए वीसी ने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत नए गाजियाबाद को विकसित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। अगले हफ्ते प्रस्ताव को शासन में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।
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ओबीपास जाएगा उपयोग आएगा
समीक्षा बैठक में प्राधिकरणों में मौजूदा समय में चल रहे ओबीपास सॉफ्टवेयर की जगह अब यूपीवाईओजी यानि उपयोग सॉफ्टवेयर पर काम करने का निर्णय लिया गया। जीडीए सचिव ने बताया कि यह साॅफ्टवेयर आधुनिक तकनीक पर डेवलप किया गया है। अगले तीन महीने में नए सॉफ्टवेयर पर काम शुरू हो जाएगा।
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क्या आएगा बदलाव
जीडीए सचिव ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर ओपन सोर्स पर आधारित है। इसमें लेटेस्ट सभी माड्यूल होंगे। इससे जीडीए अधिकारियों के साथ ही आमजनता को काफी राहत होगी। एनओसी के लिए किसी को प्राधिकरण का चक्कर नहीं लगाना होगा। मास्टर प्लान आने के बाद कोई भी जमीन का मालिक जैसे ही गाटा संख्या को अपलोड करेगा तो चंद सेकंड में जमीन के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। यह सॉफ्टवेयर मास्टर प्लान से सीधे लैंडयूज उठा लेगा और विकासकर्ता को पूरी जानकारी सिस्टम पर मिल जाएगी। नक्शे का भुगतान करने के लिए पेमेंट गेटवे की सुविधा इसमें की गई है। नक्शे की फाइल किसी भी फार्मेट में होगी उसे यह सॉफ्टवेयर रीड कर लेगा। नक्शे में जो भी अपलोड किया गया है उसके मानक को स्वत: चेक कर पूरी रिपोर्ट मिल जाएगी।
मौजूदा समय में विकासकर्ता को लैंडयूज का पता लगाने के लिए प्राधिकरण के चक्कर लगाने होते हैं। अप्लीकेशन देने के बाद सर्वे के बाद ही जानकारी मिल पाती है। खास बात यह है कि इस सॉफ्टवेयर के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।

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2001 के बाद के शासनादेशों के संग्रह का किया गया विमोचन
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने 2001 से अभी तक जितने शासनादेश जारी किए गए हैं, उनका संग्रह कर एक पुस्तक का विमोचन समीक्षा बैठक में किया गया। इस मौके पर एसीएस आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव नितिन रमेश गोकर्ण, सचिव बलवीर सिंह, जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह और अन्य जिलों के प्राधिकरणों के सचिव व वीसी मौजूद रहे।
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