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ऐसे तो दिसंबर में नहीं दौड़ पाएगी नया बस अड्डा मेट्रो

Sun, 30 Apr 2017 11:06 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Sun, 30 Apr 2017 11:06 PM IST
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New bus station Metro will not be able to run in December
DELHI METRO - फोटो : अमर उजाला

गाजियाबाद। दिलशाद गार्डन टू नया बस अड्डा मेट्रो अब तय समय दिसंबर 2017 तक नहीं दौड़ पाएगी। 2201 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में जीडीए ने तो अपनी हिस्सेदारी दे दी, लेकिन नगर निगम से अभी तक एक धेला नहीं मिला।

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आवास विकास परिषद और यूपीएसआईडीसी ने भी एक-एक किस्त देकर पल्ला झाड़ लिया है। ऐसे में अब जीडीए के सामने नगर निगम समेत तीन विभागों से मेट्रो के लिए पैसा लेना बड़ी चुनौती होगी। यह मामला शनिवार को मेरठ में मंडलायुक्त की मीटिंग में भी उठा।
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दिलशाद गार्डन टू नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर 2210 करोड़ रुपये हो गई है। इस प्रोजेक्ट में 695.40 करोड़ रुपये जीडीए को देना है। जीडीए इसमें से 640 करोड़ रुपया दे चुका है।
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इस प्रोजेक्ट में 246 करोड़ रुपये नगर निगम को, 440.20 करोड़ रुपये आवास विकास परिषद को, 98 करोड़ रुपये यूपीएसआईडीसी को, 402.40 करोड़ केंद्र सरकार को और 328 करोड़ रुपये डीएमआरसी को देना है।

जीडीए और डीएमआरसी अपनी हिस्सेदारी लगातार दे रहे हैं। आवास विकास परिषद भी 50 करोड़ रुपये और यूपीएसआईडीसी 3.30 करोड़ रुपये जीडीए को दे चुका है। अब नगर निगम से पैसा लेना बड़ी चुनौती होगी।

नगर निगम अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि जीडीए उनकी पुनर्ग्रहीत की गई जमीनों का पैसा देगा तो वह मेट्रो को फंड दे देंगे। इसके बिना मेट्रो को फंड देने के लिए उसके पास पैसा नहीं है।

बीते शनिवार को मंडलायुक्त ने जीडीए अफसरों की बैठक बुलाई तो इसमें भी मेट्रो की फंडिंग पर मंथन हुआ। मेरठ मंडलायुक्त ही अब जीडीए के चेयरमैन बन गए हैं। ऐसे में जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने उनके समक्ष भी यह मसला उठाया।

माना जा रहा है कि  जल्द ही फंडिंग को लेकर फंसे इस पेंच का हल निकल सकता है, बावजूद इसके निर्माण धीमा होने की वजह से इस प्रोजेक्ट का देरी से पूरा होना तय हो गया है। अब मार्च 2018 से पहले यह पूरा होना मुश्किल है।

केंद्र सरकार भी नहीं दे रही फंड
मेट्रो के इस प्रोजेक्ट की रिवाइज्ड डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) यूपी सरकार की कैबिनेट से पास नहीं हो सकी है। हालांकि डीएमआरसी ने सपा सरकार के शासनकाल में ही रिवाइज्ड डीपीआर लखनऊ भेज दी थी।

इस डीपीआर के कैबिनेट में पास न होने की वजह से केंद्र सरकार ने अपनी 402.40 करोड़ की हिस्सेदारी देने से इंकार कर दिया था। ऐसे में अब केंद्र सरकार से पैसा लेने के लिए भी जीडीए को रिवाइज्ड डीपीआर अब प्रदेश की नई सरकार की कैबिनेट से पास होने का इंतजार करना होगा।

मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर शासन स्तर पर भी समीक्षा की गई है। अब मंडलायुक्त की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया। फंडिंग में हिस्सेदार अन्य विभागों से पैसा दिलाने की मांग रखी गई है। उम्मीद है जल्द ही समस्या का हल हो जाएगा। प्रयास रहेगा कि मेट्रो ही नहीं जीडीए के सभी प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो जाए। - कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए

मंडलायुक्त ने इनकम बढ़ाने के दिए निर्देश
शनिवार को जीडीए के चेयरमैन व मेरठ मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने बैठक में प्राधिकरण अफसरों को इनकम बढ़ाने और अवैध निर्माण पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस बैठक में जीडीए वीसी कंचन वर्मा, सचिव रवींद्र गोडबोले, चीफ इंजीनियर एससी द्विवेदी, सीएटीपी इश्त्यिाक अहमद, वित्त नियंत्रक टीआर यादव समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। जीडीए सचिव के मुताबिक मंडलायुक्त ने इनकम बढ़ाने के लिए बकाया वसूली पर खास फोकस के निर्देश दिए हैं।


उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा उन्होंने मेट्रो व एलिवेटेड रोड समेत जीडीए के तमाम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की समीक्षा की और उन्हें समय से पूरा करने के निर्देश दिए।
 

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