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नेताजी एजुकेशन सिस्टम को सुधारो

Tue, 31 Jan 2017 12:29 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Tue, 31 Jan 2017 12:29 AM IST
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Netaji education system reform
अमर उजाला संवाद - फोटो : अमर उजाला
पूरे प्रदेश में हमको एजुकेशन हब की तो पहचान मिल गई, लेकिन एक अदद सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज को हम आज भी तरस रहे हैं। मशरूम की तरह जगह-जगह खुले प्राइवेट इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट शिक्षा की गुणवत्ता और मानक की जगह लैपटॉप और डिग्री बांटने का ठिकाना बन गए हैं।
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माननीय भी सड़क, नाली और खड़ंजे बनवाने को ही विकास समझते हैं। शिक्षा से नेताओं का सरोकार न के बराबर रह गया है। चुनाव में नेता रोजगार के अवसर बढ़ाने की बजाय बेरोजगारी भत्ता देने पर ज्यादा फोकस करते हैं। यह देश का दुर्भाग्य ही है।
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अमर उजाला ने सोमवार को जब शहर के शिक्षकों से संवाद किया तो शिक्षा की दुर्दशा पर उनका दर्द छलक पड़ा। शिक्षकों ने पूरी बेबाकी से अपनी बात रखी और माननीयों को आइना दिखाया। अमर उजाला कार्यालय में पहुंचे इन शिक्षकों ने कहा कि गाजियाबाद की यह हालत तब है, जब लोकसभा गाजियाबाद से एक प्रोफेसर डा. रमेश चंद्र तोमर चार बार सांसद रहे।
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उन्होंने कभी भी शिक्षा को लेकर काई सार्थक पहल तक नहीं की। शिक्षकों ने कहा कि आज भी गाजियाबाद में पर्याप्त संख्या में इंटर और डिग्री कालेज नहीं हैं। कोई टेक्निकल यूनिवर्सिटी नहीं है। प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक समन्वय स्थापित कराने की दिशा में जब तक काम नहीं किया जाएगा देश में स्किल इंडिया का प्रभाव जमीन पर नहीं दिखेगा।

शिक्षकों के मुताबिक एक ओर जहां जापान में 60 फीसदी और कोरिया में 95 फीसदी युवा स्किल्ड हैं, वहीं अपने देश में इनकी संख्या महज दो फीसदी है। यह हमारे माननीयों और सरकारों के कारण ही है।

शिक्षकों ने कहा कि हमें सोच समझकर वोट करना होगा। ऐसे प्रत्याशी को चुनना होगा जो बेहतर शैक्षिक योग्यता रखता हो। जो शिक्षा की गुणवत्ता और उसके विकास के साथ रोजगार के नए अवसर बनाने को लेकर काम करे।

शिक्षकों ने लचर पुलिसिंग, जाम, अवैध पार्किंग, खराब ड्रेनेज सिस्टम और भ्रष्टाचार को शहर के विकास में बाधक बताया। कहा कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय की जाए और उनसे लिखित में चुनावी एजेंडा लिया जाए।
 


शिक्षा से जुड़ी प्रमुख समस्याएं

- मोरल एजुकेशन के साथ प्रोजेक्ट-प्रैक्टिकल ओरिएंटेड सिस्टम की कमी
- सरकारी स्कूल, डिग्री कॉलेज, इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों की कमी
- स्कूल-कॉलेजों की फीस निर्धारण के लिए कोई गाइडलाइन व सिस्टम नहीं 
- शैक्षिक सुधार के लिए क्वालिटी चेक सिस्टम व सुविधाओं का अभाव
- शिक्षा के लिए सरकारी फंडिंग की भारी कमी
- स्किल व प्रोडक्टिविटी बढ़ाने पर नहीं दिया जा रहा ध्यान  
- योग्य शिक्षकों को उनकी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल रहा

बेहतर एजुकेशन सिस्टम के लिए शिक्षकों के सुझाव
- प्राइमरी, सेकेंडरी और हायर तीनों एजुकेशन सिस्टम पर करें फोकस
 - जनप्रतिनिधि सिर्फ चीफ गेस्ट न बनें, पब्लिक  के लिए काम भी करें
- सरकार किसी की भी हो, शिक्षा के लिए बजट में बढ़ोतरी हो
- स्कूलों, उच्च शिक्षण संस्थानों का फीस स्ट्रक्चर हो तय, गुणवत्ता की हो मॉनीटरिंग
- प्राइवेट की जगह सरकारी स्कूल, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज खोले जाएं
- छठवीं क्लास तक कोई भी पब्लिक स्कूल नहीं होना चाहिए
- अपनी जिम्मेदारी को ड्यूटी समझें विधायक, वादों पर करें अमल

शहर की समस्याओं पर सुझाव
 - पार्किंग का सिस्टम बनने से मिलेगी जाम से निजात
- सफाई के साथ जलभराव रोकने को सीवर समस्या का हो स्थायी समाधान
- प्राइवेट की जगह सरकारी लोकल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था हो बहाल
 - शादी-समारोह छोड़ लोगों के बीच जाएं जनप्रतिनिधि
- कानून व्यवस्था में सुधार को लिए जाएं कड़े फैसले
- ऑटो पर हो कंट्रोल, पार्किंग की जगह हो निर्धारित
- शिक्षित, काबिल और खुद को साबित करने वाले प्रत्याशी को दें वोट



शिक्षकों के कोट्स:
सरकारी इंटर कॉलेजों व डिग्री कॉलेजों में अर्से से नियुक्तियां नहीं हुई हैं। इसका सीधा असर शैक्षिक प्रणाली पर पड़ रहा है। शहर की ट्रैफिक और कानून व्यवस्था पर भी जनप्रतिनिधियों को ध्यान देने की जरूरत है। 
- डा. एनके गर्ग, एसडी डिग्री कॉलेज

2. प्रत्याशियों को वोट देने से पहले उनकी शैक्षिक योग्यता, काबिलियत और पिछला रिकॉर्ड देखा जाना चाहिए। वहीं शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए मॉनीटरिंग सिस्टम बनाया जाना चाहिए। 
- डा. नीलम सिंह, वीएमएलजी डिग्री कॉलेज

3. अगर हम वोट नहीं करेंगे तो हमारा नेता हमें रोज मुर्गा बनाएगा, इसलिए पढ़े-लिखे व योग्य प्रत्याशी को वोट दें। शहर की सफाई और यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास किए जाने की जरूरत है। 
- डा. निधि अग्रवाल, इंमेंटेक इंस्टीट्यूट

4. शिक्षा क्षेत्र के लिए दिया जाने वाला बजट बढ़ना चाहिए। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाकर ही सुधार किया जा सकता है। वहीं शहर के ड्रेेनेज सिस्टम व सफाई सिस्टम में सुधार के साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 
- डा. संजय मिश्रा, एमएमएच डिग्री कॉलेज

5. हमारे प्राइमरी, सेकेंडरी व हायर एजुकेशन सिस्टम में कोई जुड़ाव नहीं है। शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने को इस ओर ध्यान देने व मॉनीटरिंग सिस्टम बनाने की जरूरी है। लचर पुलिसिंग, जाम और जलभराव शहर की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। 
- डा. विशाल श्रीवास्तव, आरकेजीआईटी

6. स्कूलों में फीस वृद्धि के लिए प्रदेश में कोई गाइडलाइन नहीं है। सुधार के लिए प्राइमरी से लेकर हायर एजुकेशन तक क्वालिटी चेक व ऑडिट होना चाहिए। पार्किंग सिस्टम नहीं होने के चलते शहरवासियों को रोजाना जाम का झाम झेलना पड़ता है। 
- कौशल किशोर, एबीईएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी

7. मजबूत फाउंडेशन देने और शिक्षा की क्वालिटी बढ़ाने के लिए प्राइमरी एजुकेशन पर ध्यान देने की जरूरत है।   जनप्रतिनिधियों को प्रशासन की सहभागिता से कड़े कदम उठाने चाहिए। 
- सारथी गौड़ा, एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज

8. वर्तमान में मोरल एजुकेशन के साथ हमारे एजुकेशन सिस्टम में प्रोजेक्ट व प्रैक्टिकल ओरिएंटेड शिक्षा की कमी है। नए सरकारी स्कूल, डिग्री, इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज के जरिए भी एजुकेशन सिस्टम में सुधार लाया जा सकता है। 
- मुन्ना मिश्रा, संस्कार एजुकेशनल ग्रुप

9. वर्तमान जरूरतों के हिसाब से एजुकेशन सिस्टम में बदलाव की आवश्यकता है। एक काबिल और शिक्षित जनप्रतिनिधि ही समस्या को समझने के साथ निदान के प्रयास कर सकता है। कानून व्यवस्था में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत है। - डा. सचिन त्यागी, हाईटेक इंस्टीट्यूट

10. शिक्षकों को उनकी काबिलियत के हिसाब से सुविधाएं और वेतन मिलना चाहिए। दूसरा जनप्रतिनिधि का शिक्षित होन काफी जरूरी है। तभी वह सरकार में रहते या बाहर पुरजोर तरीके से रख सकेगा। शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए। 

- संदीप पराशर, कैमकुस लॉ कॉलेज

11. विधानसभा मे भ्रष्ट, बाहुबली नहीं, बल्कि शिक्षित व योग्य व्यक्ति को चुनकर भेजें। तभी सिस्टम में बदलाव लाया जा सकता है। सिहानी क्षेत्र में खराब ड्रेनेज सिस्टम के कारा पूरे साल जलभराव की समस्या रहती है। सड़के खोदने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। 
- शालिनी त्यागी, कैमकुस लॉ कॉलेज 
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