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जाम के लिए ‘बदनाम’ मोदीनगर

Sun, 05 Feb 2017 12:38 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /मोदीनगर
ब्यूरो, अमर उजाला /मोदीनगर Updated Sun, 05 Feb 2017 12:38 AM IST
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Modinagar 'infamous' Jam the
जाम - फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा मोदीनगर क्षेत्र कभी शुगर मिल के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन अब जाम के लिए ‘बदनाम’ हो गया है। देश की राजधानी दिल्ली से उत्तराखंड को जोड़ने वाले एनएच-58 के बाकी क्षेत्र में भले ही वाहन फर्राटा भरते हैं, लेकिन मोदीनगर में आकर वाहनों के चक्के थम जाते हैं।
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जाम में फंसने के कारण कई बार मरीज एंबुलेंस में ही दम तोड़ चुके हैं। 2014 में मोदीनगर निवासी दीपक कुमार की जाम में एंबुलेंस फंसने के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद भी कई मौतें हुई। मगर जनप्रतिनिधियों के कानों पर जूं भी नहीं रेंगी।
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जिले के चार अन्य विधानसभा क्षेत्र में लोगों के लिए भले ही जाम बड़ा मुद्दा न हो, लेकिन मोदीनगर में पब्लिक को इस बार ऐसे विधायक की दरकार है जो जाम से निजात दिला सके।
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वर्षों पहले जीडीए ने मोदीनगर को जाम मुक्त कराने के लिए फ्लाई ओवर बनाने की योजना बनाई थी। प्रस्ताव पर सहमति की मुहर भी लगी, फिजिबिलिटी कम होने की वजह से स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया और योजना फाइलों में बंद हो गई। 

सीएम का वादा भी न हुआ पूरा 
2012 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश यादव भी मोदीनगर को जाम मुक्त कराने का वादा करके गए थे। सैकड़ों बार समस्या विधानसभा में गूंजी, मगर हालात नहीं बदले। एक बार फिर चुनावी ‘दंगल’ शुरू हुआ तो प्रत्याशी और राजनीतिक दलों के नेता मोदीनगर को जाम मुक्त कराने का दावा कर रहे है।

हालांकि मोदीनगर का इतिहास रहा है कि यहां विकास के लिए नहीं बल्कि भावनाओं और राजनीति पार्टी की लहर के आधार पर वोटिंग होती है। यही वजह है कि यहां जाम का झाम खत्म न हुआ। 

बंद कारखाने भी न हुए शुरू, रोजगार भी गया 
कानपुर के बाद औद्योगिक क्षेत्र में अपना प्रमुख स्थान रखने वाला मोदीनगर बदहाली पर आंसू बहा रहा हैै। करीब छह लाख आबादी वाले मोदीनगर विधानसभा में 3.30 लाख वोटर है। इस शहर में बिहार, उत्तराखंड, पंजाब समेत कई राज्यों के लोग रोजी-रोटी की तलाश में आए थे।

उन्हें रोजगार के साथ कपड़ा और मकान भी मिलें, लेकिन फैक्ट्री बंद होने के साथ उनसे तीनों चीजें छिन गई। फिलहाल बड़ी संख्या में मजदूर मोदीनगर छोड़कर चले गए है। जो है वह बदहाली का जीवन जी रहे है। चुनाव के दौरान मजदूरों को कारखाने शुरू कराने का आश्वासन मिल रहा है।    

प्रत्याशियों ने फिर दिया भरोसा  

रालोद प्रत्याशी एवं विधायक सुदेश शर्मा का कहना है कि उन्होंने बंद कारखानों और जाम का मुद्दा विधानसभा में कई बार उठाया। इसके चलते मजदूरों को उनका हक मिला।

करीब-करीब सभी मजदूरों को भुगतान मिल चुका है। मोदी मिल के श्रमिक आवासों पर जल्द ही मजदूरों को मालिकाना हक मिल जाएगा। जनता का प्यार मिला तो मोदीनगर में बाईपास के लिए भी वह ताकत लगा देंगे। 
   
कांग्रेस-सपा गठबंधन प्रत्याशी रामआसरे शर्मा ने कहा कि मोदीनगर को जाम मुक्त करने के मकसद भूख हड़ताल पर बैठकर मोदीनगर      
हाईवे का चौड़ीकरण कराया गया। बाईपास की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किया गया है। विधायक बना तो सबसे पहले बाईपास का मुद्दा होगा।    .
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भाजपा प्रत्याशी डा. मंजू सिवाच ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण मोदीनगर बदहाली पर रो रहा है। वक्त बदल रहा है। उनकी जीत से मोदीनगर को जाम मुक्त शहर होगा और कारखाने फिर से शुरू होंगे। चिकित्सा, शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ करने का मन है।     
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बसपा प्रत्याशी वहाब चौधरी कहते है कि मोदीनगर में मोदी परिवार का राज चलता है। जनप्रतिनिधि मोदियों के इशारे पर काम करते है। इसीलिए मजदूरों का आज तक भला नहीं हो सका है। मोदीनगर के किसान-मजदूर को उनका हक दिलाने के लिए ही चुनाव दंगल में हूं।     

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विधानसभा में मतदाता 
महिला                     150833
पुरुष                         179810
अन्य                                 25    
कुल                         330668
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