मुरादनगर में परशुराम जन्मोत्सव: महायज्ञ और सम्मान समारोह, जरूरतमंद महिलाओं को दी गईं सिलाई मशीनें
मुरादनगर के पंडित मदनमोहन मालवीय पब्लिक स्कूल में भगवान परशुराम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। महायज्ञ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेधावी छात्रों का सम्मान हुआ। जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें दी गईं, वहीं अवकाश न घोषित होने पर नाराजगी भी जताई गई।
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गाजियाबाद जिले के मुरादनगर पाइपलाइन मार्ग सरना स्थित पंडित मदनमोहन मालवीय पब्लिक स्कूल में भगवान परशुराम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर जरूरत मंद महिलाओं को सिलाई मशीन दी गई।
मुख्य अतिथि अखिल भारतीय परशुराम सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित विनोद मिश्रा द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं एवं उनके जीवन के बारे में बताया।बताया कि भगवान विष्णु के सभी दस अवतारों में से भगवान परशुराम छठे अवतार के रूप में जाने जाते हैं। सभी को उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करने की अपील की। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परशुराम जन्मोत्सव पर सार्वजनिक अवकाश न किए जाने पर ब्राह्मणों ने नाराजगी व्यक्त की।
इस अवसर पर महायज्ञ में 3100 आहुतियां देकर प्राणिमात्र के कल्याण, राष्ट्र की उन्नति एवं विश्वशांति की कामना की। छात्राओं द्वारा सास्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए एवम् मेधावी छात्र छात्राओं को पुरुस्कृत किया गया। पंडित विनोद मिश्रा, जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा , प्रेमचंद शास्त्री, एडवोकेट विजय गौड़, लोकेश वत्स आदि द्वारा कुछ जरुरत मंद महिलाओं क़ो अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए सिलाई मशीन दीं गई। अध्यक्षता विद्यासागर शर्मा व संचालन सोमदत्त शर्मा ने किया। एडवोकेट विजय गौड़, लोकेश वत्स, आयुष त्यागी काकडा, यश शर्मा, संजय शर्मा, वरुण शर्मा, संजय शर्मा, सतीश शर्मा, नरेंद्र शर्मा, बॉबी पंडित, गुलशन राजपूत, शिवा शर्मा आदि मौजूद रहे।
सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का संदेश
गाजियाबाद में भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर रविवार को प्रताप विहार सेक्टर-12 स्थित भाऊराव देवरस कॉलोनी (बीएच ब्लॉक) में कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक एकता और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का संदेश दिया गया। कॉलोनीवासियों के आपसी सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में हवन-पूजन से लेकर भंडारे का आयोजन किया गया।
आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने कहा कि जिस प्रकार भगवान परशुराम ने अपने शक्ति बल से आततायियों का नाश किया और सुशासन की व्यवस्था स्थापित की, इसी प्रकार हमें भी अपने-अपने स्तर से समाज को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। भगवान परशुराम किसी समाज विशेष के खिलाफ नहीं थे, बल्कि जिन्होंने राष्ट्र और समाज विरुद्ध काम किया, उन्होंने उसका संहार किया।