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गुहार लगाता रहा पिता, बेटी ने तोड़ा दम

Wed, 21 Sep 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Wed, 21 Sep 2016 01:03 AM IST
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Mahahdtal: Emergency Gate, off-handedly broke suffer the woman
बेटी के शव को गोद में लिए बिलखता पिता। - फोटो : अमर उजाला

बेमियादी महाहड़ताल के बीच मंगलवार को दुखद खबर जिला एमएमजी अस्पताल से आई। बुखार में तड़पती बेटी को लिए पिता एक घंटे अस्पताल में दौड़ता रहा, मगर इलाज नहीं मिल सका। हड़ताल के चलते इमरजेंसी का गेट भी बंद था। लाचार पिता गुहार लगाता रहा लेकिन कोई नहीं पसीजा। इसके बाद पहुंचे डॉक्टर ने युवती को मृत घोषित कर दिया।

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इससे गुस्साए लोगों ने अस्पताल के गेट पर शव रखकर जीटी रोड जाम कर दी। हंगामा शांत करने पहुंचे पुलिस अफसरों से भी लोगों की तीखी नोकझोंक हुई। बाद में पिता रिक्शा में ही बेटी के शव को लेकर चला गया तो लोगों ने जाम खोल दिया। सुदामापुरी निवासी विरेंद्र अपनी 20 वर्षीया बेटी पिंकी को लेकर सुबह 10 बजे ही अस्पताल पहुंच गए थे।
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पिता ने बताया कि बेटी को कई दिन से तेज बुखार था। मंगलवार को तबीयत ज्यादा बिगड़ गई तो वह उसे रिक्शे में ही एमएमजी ले आए। मगर हड़ताल के चलते यहां इमरजेंसी का गेट बंद था। बेटी के इलाज की आस में यहां वहां दौड़ता रहा। करीब एक घंटे बाद पहुंचे डॉक्टर ने बेटी को चेकअप के बाद मृत घोषित कर दिया।
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इससे वहां मौजूद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने शव रखकर जीटी रोड पर जाम लगा दिया।

सीएमएस की सुनिए
सीएमएस जेके त्यागी का कहना था कि युवती अस्पताल में आने से पहले ही दम तोड़ चुकी थी। हमने यहां चेकअप कराया तो उसे मृत पाया।

10 से फार्मासिस्ट, 12 से संविदा कर्मी, 16 से पैथोलॉजिस्ट थे हड़ताल पर
असल में 12 सितंबर से अपनी मांगों को लेकर संविदा कर्मी हड़ताल पर थे। जबकि 10 सितंबर से फार्मासिस्ट और 16 से पैथोलॉजिस्ट भी सांकेतिक हड़ताल कर रहे थे। मंगलवार को सभी ने पूरी तरह से काम ठप कर दिया। इसी के साथ सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था भी धड़ाम हो गई। चारों ओर अव्यवस्था फैल गई।

मरीजों को न तो  दवाएं मिलीं और न ही पैथोलॉजी टेस्ट हो सके। एमएमजी, संयुक्त जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत सीएचसी-पीचएसी पर भी मरीज परेशान रहे। एमएमजी अस्पताल में तो दवाएं न मिलने पर मरीजों ने सीएमएस कार्यालय पर हंगामा करते हुए कुर्सी-टेबल तक इधर-उधर फेंक दीं।

मरीजों का कहना था कि हड़ताल का पहले से ही पता था तो क्यों नहीं वैकल्पिक इंतजाम किए गए। डॉक्टर पर्ची पर दवा लिख तो रहे हैं लेकिन लें कहां से। इस हंगामे के बाद 11 बजे से मरीजों की पर्ची काटनी भी बंद कर दी गई और डॉक्टर भी केबिन से उठ गए।

सीएमएस ने कहा कि फार्मासिस्टों ने दवा केंद्रों पर ताला जड़ दिया था। हमने पुलिस अफसरों के साथ बैठक में निर्णय लिया था कि दवा वितरण केंद्र का ताला तोड़कर इंटर्नशिप वालों से दवाएं बंटवाई जाएं, मगर तकनीकी कारणों से बाद में इसको स्थगित कर दिया गया। असली समस्या इसी कारण हुई।


पोस्टमार्टम, इमरजेंसी में हुई दिक्कत
फार्मासिस्ट की हड़ताल के चलते पोस्टमार्टम करने में भी चिकित्सकों को दिक्कतें हुईं। पोस्टमार्टम के दौरान फार्मासिस्ट का काम डॉक्टरों को खुद करना पड़ा । इसके अलावा औषधि भंडारण कक्ष पर ताला लगा होने के कारण इमरजेंसी सेवा भी प्रभावित हुई। इमरजेंसी में दवाओं का टोटा हो गया।

संविदाकर्मियों की भी हड़ताल जारी
संविदाकर्मियों की हड़ताल संयुक्त जिला
अस्पताल में मंगलवार को भी जारी रही। इससे सभी काम प्रभावित हुए। जिलाध्यक्ष पूजा गर्ग ने बताया कि मांगें न माने जाने तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। धरने में निधि गौतम, रामेंद्र सिंह सपना शर्मा, प्रेमलता सिंह आदि मुख्य रूप से मौजूद रहीं।

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का धरना जारी
अनिश्चितकालीन धरना दे रहीं आंगनबाड़ियों पर जिला प्रशासन की चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ। मंगलवार को भी किसी कार्यकत्री ने बीएलओ और पोलियो ड्यूटी नहीं उठाई। ब्लॉकवार परियोजना कार्यालयों पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां मंगलवार को भी एकजुट हुईं और शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

आंगनबाड़ी कार्यकत्री संघ की जिलाध्यक्ष गीता रॉय ने कहा कि प्रशासन उन्हें सेवा समाप्ति के नाम पर डराना चाहता है। जब तक उनकी मांगें नहीं मांग ली जातीं, तब तक वे इसी तरह धरना देंगी और कोई भी सरकारी कार्य नहीं करेंगी।

कूड़ा वाहनों के चक्के जाम, नहीं उठा कूड़ा
नगर निगम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण मंगलवार को शहर में कूड़ा नहीं उठा। कर्मचारी वेतन विसंगतियों को दूर करने के साथ सातवें वेतनमान को लागू करने समेत 18 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। इस हड़ताल में नगर निगम समेत 28 सरकारी विभाग के कर्मचारी शामिल हैं।

नगर निगम वाहन चालक संघ के महामंत्री सलीम अब्बासी ने बताया कि मंगलवार सुबह से कूड़ा उठाने वाले 200 वाहनों का चक्का जाम कर दिया गया। इसके अलावा नगर आयुक्त, समेत सभी निगम अधिकारियों की गाड़ियां भी नहीं चलाई जाएंगी। ड्राइवर हड़ताल पर रहेंगे।

उनकी हड़ताल में जलकल विभाग, पथ प्रकाश विभाग, टैक्स विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं। निगम कर्मचारियों के प्रदर्शन के कारण मंगलवार को कोई भी अधिकारी निगम मुख्यालय नहीं पहुंचा। कर्मचारी मुख्यालय के एंट्री गेट पर ही बैठकर नारेबाजी कर रहे थे।

कर्मचारियों का आरोप है कि प्रदेश सरकार के पास 18 मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सरकार उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम इंप्लाइज यूनियन ने भी हड़ताल की। यूनियन के वरिष्ठ सदस्य धीरेंद्र सिंह व एके माथुर ने बताया कि हड़ताल अनिश्चितकालीन है। इसलिए जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे।

कर लें इंतजाम, आज नहीं मिलेंगी रोडवेज बसें
बुधवार को रोडवेज बसों का चक्का जाम रहेगा। इसके चलते यात्रियों को मेरठ, सहारनपुर, बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ आदि मार्गों पर मुसाफिरों को परेशानी झेलनी होगी। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद की क्षेत्रीय प्रबंध समिति बैठक अमृतनगर कार्यशाला में हुई।

कार्यशाला में सभापति सतेंद्र कुमार ने बताया कि 20 सितंबर की आधी रात से रोडवेज बसों के चक्का जाम हो गया। रोडवेज कर्मी 910 परिचालकों के पदों पर संविदा परिचालकों की नियुक्ति व कार्यशाला के कर्मचारियों को वर्दी दिए जाने, एक जनवरी 2006 से छठे वेतनमान का लाभ दिए जाने समेत कई मांगों को पूरा किए जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बैठक में जयपाल सिंह, किशनपाल सिंह, जगदीश, नरेंद्र त्यागी, यशवीर आदि उपस्थित थे।

अपनी निजी गाड़ियों से पहुंचे अधिकारी
राजकीय वाहन चालक संघ कलक्ट्रेट की हड़ताल सोमवार से ही शुरू हो गई थी। सीडीओ समेत कई अधिकारियों के चालकों ने उनके वाहन ही नहीं चलाए। ऐसे में अधिकारियों को या तो खुद ही या फिर निजी वाहनों से आफिस पहुंचना पड़ा। एसडीएम गुंजा सिंह अपनी निजी गाड़ी से कलक्ट्रेट पहुंची।


चालक संघ के पदाधिकारी सुरेंद्र ने बताया कि सिर्फ डीएम और एडीएम के ही वाहन चले। जबकि सीडीओ, वन विभाग, वाणिज्यकर और हेल्थ डिपार्टमेंट से संबंधित अधिकारियों के वाहनों पर तैनात चालक पूरी तरह से हड़ताल पर रहे।

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