गाजियाबाद में भाजपा ने चला वैश्य कार्ड: जनरल वीके सिंह ने छोड़ा चुनाव मैदान, विधायक अतुल गर्ग को मिला टिकट
संघ परिवार की पसंद कहे जाने वाले अतुल गर्ग के नाम की घोषणा रविवार को देर शाम की गई। इससे पहले शाम को दो बार के सांसद जनरल रिटायर्ड वीके सिंह ने 2024 का चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर दिया।
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विस्तार
गाजियाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा ने इस बार वैश्य कार्ड चलते हुए विधायक अतुल गर्ग को उम्मीदवार बनाया है। यह पहला मौका है जब भाजपा ने वैश्य समाज से इस सीट पर प्रत्याशी बनाया है। इससे पहले पार्टी ने आठ बार चुनाव लड़ा है। सात बार जीत मिली है। सातों बार क्षत्रिय सांसद बने। इसलिए, इस सीट को क्षत्रियों का गढ़ माना जाता है। हालांकि, वैश्य समाज के उम्मीदवार भी जीत चुके हैं। भाजपा के चार बार के सांसद रमेश चंद तोमर को 2004 के चुनाव में कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल ने हराया था।
भाजपा ने पहली बार चुनाव 1980 में लड़ा था और अनुसूचित जाति के संघप्रिय गौतम को उम्मीदवार बनाया था। उनकी जमानत जब्त हो गई थी। इसके बाद हर बार क्षत्रिय समाज के उम्मीदवार आए और जीते। इस बार भी माना जा रहा था कि अगर वीके सिंह का पत्ता साफ हुआ तो क्षत्रिय समाज का ही कोई नेता आएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
संघ परिवार की पसंद कहे जाने वाले अतुल गर्ग के नाम की घोषणा रविवार को देर शाम की गई। इससे पहले शाम को दो बार के सांसद जनरल रिटायर्ड वीके सिंह ने 2024 का चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर दिया। खास बात यह रही कि टिकट के दावेदारों में अतुल गर्ग का नाम नहीं बताया जा रहा था। वह 2017 और 2022 में गाजियाबाद सीट से विधान सभा चुनाव जीत चुके हैं। 2017 में उन्हें स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाया गया था। 2022 में उनकी जीत पहली से बड़ी थी लेकिन मंत्री नहीं बनाया गया। कविनगर निवासी 62 वर्षीय अतुल गर्ग के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं।
भाजपा में गाजियाबाद सीट से इस बार सबसे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का नाम चला। उनका नाम मुंबई से घोषित हो चुका है।
दूसरा नाम राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह का तेजी से चला। उन्हें गाजियाबाद के विधायकों की पसंद बताया गया।
अरुण सिंह को भाजपा ने आंध्र प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया तो गाजियाबाद से टिकट दावेदारों से उनका नाम हट गया।
अरुण सिंह के हट जाने से वीके सिंह का टिकट फाइनल माना जा रहा था लेकिन होली पर कहानी बदल गई।
दोपहर को वीके सिंह चुनाव मैदान से हटे और देर शाम अतुल गर्ग के नाम की घोषणा कर दी गई। उनका नाम दावेदारों में नहीं बताया जा रहा था, लेकिन सूची में आ गया।
कांग्रेस और बसपा ने भी नहीं खोले पत्ते
गाजियाबाद सीट पर अभी तक कांग्रेस और बसपा ने भी पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस में कई दावेदारों के नाम चल रहे हैं। एक-दो कई दिन से सक्रिय भी हैं। ये पहले चुनाव लड़ चुके हैं। देखना यह है कि पार्टी किसी पुराने चावल पर भरोसा करती है या फिर नया चेहरा उतारती है। बसपा यहां मुस्लिम और ब्राह्मण प्रत्याशी उतारती रही है। माना जा रहा है कि उम्मीदवार का एलान होली के बाद होगा।
रिकॉर्ड वोटों से जीते थे जनरल
गाजियाबाद लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर 2014 और 2019 में पांच लाख से ज्यादा वोटों से जीते जनरल (रिटायर्ड ) वीके सिंह ने इस बार चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर दिया है। हरियाणा के भिवानी जिले के बपोरा गांव निवासी 72 वर्षीय वीके सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च के महीने में भाजपा में शामिल हुए थे। तब 21 मार्च को आई पहली सूची में उनका नाम गाजियाबाद से घोषित किया गया था। उनसे पहले 2009 में यहां से सांसद भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह थे। राजनाथ के लखनऊ चले जाने पर वीके सिंह को चुनाव मैदान में उतारा गया था। उन्होंने पांच लाख 67 हजार मतों से जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में यह देश की दूसरी सबसे बड़ी जीत थी। उन्हें विदेश राज्यमंत्री बनाया गया। अगले चुनाव 2019 में भी उनका नाम पहली सूची में आया। इस बार भी उनकी जीत पांच लाख से ज्यादा वोटों से रही। उन्हें फिर से केंद्र में मंत्री बनाया गया था। इस बार वीके सिंह के टिकट पर संकट मंडरा रहा था। भाजपा उम्मीदवारों की चार सूची जारी कर चुकी है लेकिन उनके नाम की घोषणा नहीं की गई। हालांकि, शहर के कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता बनी रही। इसलिए माना जा रहा था कि देर से ही सही उन्हें टिकट मिल ही जाएगा लेकिन उम्मीदवार पर फैसला होने से पहले ही उन्होंने चुनाव मैदान छोड़ दिया।
नए रूप में आऊंगा नजर
(एक्स पर लिखा)
मैंने सैनिक के रूप में इस राष्ट्र की सेवा में अपना सारा जीवन समर्पित किया है। पिछले 10 वर्षों से मैंने गाजियाबाद को एक विश्व स्तरीय शहर बनाने के सपने को पूरा करने के लिए अथक परिश्रम किया है। इस यात्रा में देश और गाजियाबाद के नागरिकों के साथ-साथ भाजपा के सदस्यों का जो विश्वास और प्रेम मुझे प्राप्त हुआ है, उसके लिए मैं आभारी हूं। यह भावनात्मक बंधन मेरे लिए अमूल्य है।
इन भावनाओं के साथ, मैंने एक कठिन, परंतु विचारपूर्ण निर्णय लिया है। मैं 2024 के चुनावों में नहीं लड़ूंगा। यह निर्णय मेरे लिए आसान नहीं था, परंतु मैंने इसे अपने दिल की गहराइयों से लिया है। मैं अपनी ऊर्जा और समय को नई दिशाओं में ले जाना चाहता हूं, जहां अपने देश की सेवा अलग तरीके से कर सकूं।
इस यात्रा में आपके साथी रहने के लिए मैं आप सब को दिल से धन्यावाद देता हूं। आपके प्यार, समर्थन और विश्वास ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। आगे भी, मैं देश और सब नागरिकों के प्रति अपनी सेवा जारी रखूंगा, बस एक नए रूप में।
वीके सिंह (भाजपा) 7,58,482
राज बब्बर (कांग्रेस) 1,91,188
मुकुल उपाध्याय (बसपा) 1,73,042
सुधन कुमार (सपा) 1,06,956
शाजिया इल्मी (आप) 89, 125
नतीजा 5,67,294 वोटों से जीते वीके सिंह
वीके सिंह (भाजपा) 9,44,503
सुरेश बंसल (सपा) 4, 43,003
डॉली शर्मा (कांग्रेस) 1,11,944
नतीजा 5,01,500 वोटों से जीते वीके सिंह
1984 संघ प्रिय गौतम (हारे)
1989 कोई प्रत्याशी नहीं
1991 रमेश चंद तोमर (जीते)
1996 रमेश चंद तोमर (जीते)
1998 रमेश चंद तोमर (जीते)
1999 रमेश चंद तोमर (जीते)
2004 रमेश तोमर तोमर (हारे)
2009 राजनाथ सिंह (जीते)
2014 वीके सिंह (जीते)
2019 वीके सिंह (जीते)
2004 में वैश्य समाज से कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल बने थे सांसद