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UP: 77 साल... 17 चुनाव और सिर्फ एक महिला सांसद; इस सीट पर भाजपा ने एक बार भी नहीं दिया महिला को टिकट
Fri, 08 Mar 2024 02:01 PM IST
शाहरुख खान
रश्मि ओझा, अमर उजाला, गाजियाबाद
रश्मि ओझा, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 08 Mar 2024 02:01 PM IST
सार
Ghaziabad Lok Sabha Election 2024: गाजियाबाद लोकसभा सीट पर 17 लोकसभा चुनाव हुए। इसमें एक ही महिला सांसद चुनी गई। गाजियाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा ने एक बार भी महिला को टिकट नहीं दिया।
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Lok Sabha Election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश की आजादी के बाद हुए 17 लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद से सिर्फ एक महिला सांसद चुनी गई है। वह भी आज से 62 साल पहले 1962 में। इसके बाद 14 चुनाव और हो चुके हैं। इनमें प्रमुख दलों ने महिला उम्मीदवार भी बहुत कम उतारी हैं। यह हाल तब है जबकि पिछले कई चुनाव में हर बार महिला आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठता है।
सिर्फ लोकसभा चुनाव ही नहीं, विधान सभा चुनाव में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। गाजियाबाद में मतदाताओं की संख्या 29,38,845 है। इनमें 16,22,869 पुरुष और 13,15,782 महिला मतदाता हैं। पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या थोड़ी सी ही कम है लेकिन टिकट देने के मामले में यह अंतर बहुत बड़ा है।
इस सीट पर पहले कांग्रेस और फिर भाजपा का दबदबा रहा है। भाजपा से कभी कोई महिला उम्मीदवार नहीं उतारी गई। कांग्रेस से मौके मिले, लेकिन जीत सिर्फ एक को ही मिली। यह चुनाव 1962 का था। तब गाजियाबाद सीट हापुड़-गाजियाबाद नाम से थी।
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कांग्रेस की कमला चौधरी ने निर्दलीय नसीम मौहम्मद को हराया था। कमला चौधरी को 81,999 वोट मिले थे जबकि नसीम को 53,366। अगले चुनाव में कमला चौधरी को हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके बाद 1971 में किसी भी दल ने महिला उम्मीदवार नहीं उतारी।
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सिर्फ लोकसभा चुनाव ही नहीं, विधान सभा चुनाव में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। गाजियाबाद में मतदाताओं की संख्या 29,38,845 है। इनमें 16,22,869 पुरुष और 13,15,782 महिला मतदाता हैं। पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या थोड़ी सी ही कम है लेकिन टिकट देने के मामले में यह अंतर बहुत बड़ा है।
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इस सीट पर पहले कांग्रेस और फिर भाजपा का दबदबा रहा है। भाजपा से कभी कोई महिला उम्मीदवार नहीं उतारी गई। कांग्रेस से मौके मिले, लेकिन जीत सिर्फ एक को ही मिली। यह चुनाव 1962 का था। तब गाजियाबाद सीट हापुड़-गाजियाबाद नाम से थी।
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कांग्रेस की कमला चौधरी ने निर्दलीय नसीम मौहम्मद को हराया था। कमला चौधरी को 81,999 वोट मिले थे जबकि नसीम को 53,366। अगले चुनाव में कमला चौधरी को हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके बाद 1971 में किसी भी दल ने महिला उम्मीदवार नहीं उतारी।
1977 में भी चुनाव मैदान में कोई महिला उम्मीदवार नहीं थी। 1980 के चुनाव में 31 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन उनमें महिला एक भी नहीं थी। इसके बाद भी लगभग ऐसी ही स्थिति रही। आधे से ज्यादा चुनाव में प्रमुख दलों ने महिला को टिकट नहीं दिया।
रीता चौधरी को टिकट मिला पर जीत नहीं
1996 में कांग्रेस से रीता चौधरी चुनाव मैदान में उतरीं। उन्होंने बहुत जोर-शोर से चुनाव प्रचार किया लेकिन जीत नसीब नहीं हुई। उस चुनाव में भाजपा के डाॅ. रमेश चंद तोमर जीते। रीता चौधरी 1,24,948 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहीं। कुल उम्मीदवारों की संख्या 41 थी, जिनमें से महिलाओं की संख्या तीन थी। 1998, 1999 और 2004 में प्रमुख दलों से कोई महिला उम्मीदवार नहीं रही।
1996 में कांग्रेस से रीता चौधरी चुनाव मैदान में उतरीं। उन्होंने बहुत जोर-शोर से चुनाव प्रचार किया लेकिन जीत नसीब नहीं हुई। उस चुनाव में भाजपा के डाॅ. रमेश चंद तोमर जीते। रीता चौधरी 1,24,948 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहीं। कुल उम्मीदवारों की संख्या 41 थी, जिनमें से महिलाओं की संख्या तीन थी। 1998, 1999 और 2004 में प्रमुख दलों से कोई महिला उम्मीदवार नहीं रही।
शाजिया और डॉली को भी मिली हार
2009 में गाजियाबाद नाम से ही सीट बन गई। इन तीन चुनाव में भी महिलाओं की स्थिति नहीं बदली। इन तीन चुनाव में शाजिया इल्मी और डाॅली शर्मा जोर शोर से चुनाव लड़ीं लेकिन जीत की मंजिल तक नहीं पहुंच सकीं।
2009 में गाजियाबाद नाम से ही सीट बन गई। इन तीन चुनाव में भी महिलाओं की स्थिति नहीं बदली। इन तीन चुनाव में शाजिया इल्मी और डाॅली शर्मा जोर शोर से चुनाव लड़ीं लेकिन जीत की मंजिल तक नहीं पहुंच सकीं।
2019 के चुनाव में डाॅली शर्मा 1,11,948 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहीं। 2014 में आम आदमी पार्टी से शाजिया इल्मी 89,147 वोट लेकर छठे स्थान पर रहीं। 2009 में 16 उम्मीदवार थे लेकिन उनमें महिला एक भी नहीं थी।