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UP: पिता और भाई को फावड़े से काट डाला, अब आजीवन सलाखों के पीछे गुजराने पड़ेंगे, भाभी की गवाही रही अहम

Thu, 09 Jul 2026 11:07 PM IST
Akash Dubey माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद Published by: Akash Dubey Updated Thu, 09 Jul 2026 11:07 PM IST
सार

 सत्र न्यायालय ने 2018 के दोहरे हत्याकांड में सुमित उर्फ बबलू को दोषी ठहराया। उसे पिता और भाई की फावड़े से हत्या के लिए आजीवन कारावास और एक लाख रुपये का अर्थदंड मिला।

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Life imprisonment for man convicted of murdering father and brother with a shovel
सात साल बाद भाई-पिता के हत्यारे को मिली सजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजियाबाद के निवाड़ी थाना क्षेत्र के पैंगा गांव में वर्ष 2018 में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में गाजियाबाद के सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। सत्र एवं जिला न्यायाधीश विनोद सिंह रावत की अदालत ने आरोपी सुमित उर्फ बबलू को अपने पिता और भाई की फावड़े से काटकर हत्या के मामले में दोषी करार दिया है। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

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जिला अभियोजन अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि 23 दिसंबर 2018 को दोपहर करीब दो बजे पीतम सिंह और उनका बेटा सुभाष गेहूं की बुवाई के लिए खेत पर गए थे। इसी दौरान सुभाष की पत्नी सुधा अपने भाई मिंटू के साथ खेत पहुंची, जहां उसने अपने देवर सुमित उर्फ बबलू को दोनों पर फावड़े से हमला करते हुए देखा। शोर मचाने पर सुमित फावड़ा लेकर गन्ने के खेत की ओर भाग गया। दोनों के गले और शरीर पर गंभीर चोटें थीं और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई थी। घटना से सदमे में आई सुधा बेहोश हो गई और होश में आने के बाद उसी रात थाना निवाड़ी में तहरीर देकर देवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

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इस मामले में पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल से रक्तरंजित और साधारण मिट्टी कब्जे में ली, पंचनामा भरकर शवों का पोस्टमार्टम कराया और बाद में आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त फावड़ा बरामद किया। जांच पूरी होने पर आरोपी के विरुद्ध धारा 302 आईपीसी में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।

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12 गवाहों में सुधा की गवाही रही अहम
अदालत में विचारण के दौरान अभियोजन ने 12 गवाह पेश किए। मृतक सुभाष की पत्नी सुधा को मुख्य प्रत्यक्षदर्शी के रूप में अदालत में पेश किया गया। अदालत ने माना कि लंबी जिरह के बावजूद उसके बयान में घटना के मूल तथ्यों को लेकर कोई ऐसा विरोधाभास नहीं मिला, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर संदेह किया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य और फावड़े की बरामदगी ने भी उसके बयान की पुष्टि की। अदालत ने यह भी माना कि एफआईआर दर्ज होने में लगभग दस घंटे का विलंब परिस्थितियों के अनुरूप स्वाभाविक था, क्योंकि प्रत्यक्षदर्शी महिला ने अपने पति और ससुर की हत्या अपनी आंखों के सामने देखी थी और सदमे से बेहोश हो गई थी।

पिता ने आरोपी के खिलाफ दायर किया था दीवानी वाद
फैसले में अदालत ने यह भी माना कि आरोपी और उसके पिता के बीच लंबे समय से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। पिता पीतम सिंह ने आरोपी के खिलाफ पहले से दीवानी वाद दायर किए थे और वसीयत में संपत्ति आरोपी को न देकर अपने दूसरे बेटे सुभाष के बच्चों के नाम कर दी थी। न्यायालय ने इन दस्तावेजों को हत्या के पीछे स्पष्ट और मजबूत मकसद माना।

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