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जेल गए तो सांसद को ‘महसूस’ हुआ बंदियों का दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:46 AM IST
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narendra
- फोटो : अमर उजाला
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अपनी पुत्रवधू की दहेज हत्या के मामले में डासना जेल में बंद बसपा सांसद नरेंद्र कश्यप को अब बंदियों का दर्द ‘महसूस’ होने लगा। जेल से छूटने पर वह ‘पैरवी’ नाम की संस्था बनाएंगे। यह संस्था ऐसे बंदियों की मदद करेगी, जो जमानती न मिल पाने के कारण मामूली धाराओं में भी लंबे समय से जेल में रहने को मजबूर हैं।
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डासना जेल में करीब 200 बंदी मामूली अपराधों में बंद हैं। मसलन- शांतिभंग, तमंचा और चाकू के साथ पकड़े जाने पर वह कई-कई साल से जेल में बंद हैं। दरअसल उनकी जमानत लेने या केस की पैरवी करने वाला कोई नहीं है।
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इसी के चलते वह जेल से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे बंदियों को अगर जमानती और केस की पैरवी करने वाले मिल जाएं तो वह नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू कर सकते हैं।
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जेल सूत्रों की मानें तो सांसद नरेंद्र कश्यप इन दिनों जेल में ऐसे ही बंदियों की लिस्ट बना रहे हैं। जेल से बाहर आने पर वह संस्था बनाकर इनकी पैरवी करेंगे। संस्था का नाम भी ‘पैरवी’ ही रखा जाएगा।
बता दें कि बसपा सांसद बैरक नंबर 23बी में हैं। 6 अप्रैल को उनकी पुत्रवधू हिमांशी की गोली लगने से मौत हो गई थी। सात अप्रैल को पुलिस ने उन्हें, उनकी पत्नी देवेंद्री और बेटे सागर को दहेज हत्या के केस में गिरफ्तार कर डासना जेल भेज दिया था।