म्यांमार से लौटे बंधकों की आपबीती: सोशल मीडिया विज्ञापनों से फंसे... दिखाए गए हसीन सपने; ऐसे मिलता था लक्ष्य
अधिकांश आईटी पेशेवर को बताया कि कंप्यूटर और मोबाइल सॉफ्टवेयर और एप बनाने की नई कंपनी है। इसमें तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता है।
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म्यांमार में बंधक बनाकर रखे गए 530 भारतीय आईटी इंजीनियरों में से अधिकांश ऐसे हैं जो निजी कंपनियों में नौकरी करते थे। साइबर अपराधियों ने इन्हें कॉल कर विदेश में नौकरी करने की एवज में मोटे वेतन का ऑफर देकर अपने जाल में फंसाया। आईटी पेशेवर के साथ-साथ कुछ ऐसे भी बंधनमुक्त हुए हैं जो सोशल मीडिया पर भेजे गए विज्ञापनों के जरिए साइबर अपराधियों के झांसे में आ गए। हिंडन एयरपोर्ट और सीबीआई एकेडमी में बंधनमुक्त हुए भारतीयों ने आपबीती सुनाई।
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बंधनमुक्त हुए आईटी पेशेवर युवाओं ने बताया कि उन्हें कॉल कर विदेश में नौकरी देने का झांसा दिया गया। विदेशी मुद्रा के अनुसार भारतीय करेंसी के डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति माह भुगतान करने की बात कही गई। साथ ही आवास और अन्य देयों का भी प्रलोभन दिया गया। साइबर अपराधियों ने काम पसंद न आने पर उनके खर्च पर भारत लौट जाने का भी आश्वासन दिया।
अधिकांश आईटी पेशेवर को बताया कि कंप्यूटर और मोबाइल सॉफ्टवेयर और एप बनाने की नई कंपनी है। इसमें तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता है। विदेश में आईटी पेशेवर काफी महंगे होते हैं और भारतीयों को एक से डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह और अन्य देयों का भी भुगतान किया जाएगा। ऐसे प्रलोभन में फंसे आईटी पेशेवर युवाओं ने विदेश जाने का पासपोर्ट बनवाया और उनके बताए स्थान पर पहुंच गए, जहां उन्हें बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। साथ ही साइबर ठगी का लक्ष्य दिया गया।
भाषा ज्ञान से मिलता था लक्ष्य
पूछताछ में युवाओं ने बताया कि उत्तर प्रदेश, असम, तमिलनाडू, कन्नड़, हरियाणा, पंजाब और मुम्बई सहित 18 राज्यों के आईटी पेशेवर म्यांमार में बंधक थे। साइबर अपराधी आईटी पेशेवर के पासपोर्ट और शैक्षिक प्रमाण पत्रों से उनकी क्षेत्रीय भाषा और कानून व्यवस्था का आंकलन करते थे। जिसके बाद जो जिस राज्य का आईटी पेशेवर होता उन्हें उसी के क्षेत्र में साइबर ठगी करने का दबाव बनाया जाता था। क्षेत्र के लोगों के नाम और मोबाइल नंबर सहित एक सूची सौंपी जाती थी। दिन में तीन कॉल सफल करने का लक्ष्य दिया जाता था। असफल होने पर उन्हें यातनाएं दी जाती थी।
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