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Dhaulana Factory Blast : धौलाना में तीन माह से चल रही थी अवैध पटाखा फैक्टरी, पुलिस एक बार झांकने तक नहीं आई
Sun, 05 Jun 2022 05:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़/धौलाना
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़/धौलाना
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 05 Jun 2022 05:04 AM IST
सार
जाहिर तौर पर इसका जवाब पुलिस-प्रशासन के अफसरों की लापरवाही लग रही है। पुलिस चौकी से महज 250 मीटर की दूरी पर यह फैक्टरी चल रही थी, लेकिन पुलिसवाले एक बार भी यहां झांकने तक नहीं आए।
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धौलाना की अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धौलाना में अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके के बाद लोगों की जुबां पर एक ही सवाल था, 12 मौतों का जिम्मेदार कौन है? जाहिर तौर पर इसका जवाब पुलिस-प्रशासन के अफसरों की लापरवाही लग रही है।
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पुलिस चौकी से महज 250 मीटर की दूरी पर यह फैक्टरी चल रही थी, लेकिन पुलिसवाले एक बार भी यहां झांकने तक नहीं आए। दिल्ली के मुंडका में हुए अग्निकांड के बाद अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी कि हर फैक्टरी में आग बुझाने के इंतजाम होना सुनिश्चित कराएं, लेकिन यहां कोई आया ही नहीं। यहां बारूद आता रहा और पटाखे बनते रहे। सवाल यह भी है कि खुफिया विभाग को क्यों इसकी जानकारी नहीं मिल पाई।
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पांच सौ वर्ग मीटर की फैक्टरी परिसर में टिन शेड के नीचे अवैध रूप से पटाखे बनाने का काम पिछले तीन महीने से चल रहा था। यहां बड़े स्तर पर खिलौना बंदूक में काम आने वाली स्काई शॉट बनाने का काम हो रहा था। आग से बचाव के लिए यहां न तो आधुनिक उपकरण थे और न ही किसी प्रकार के संसाधन मौजूद थे। पड़ोस में काम करने वाले फैक्टरी संचालकों ने बताया कि फैक्टरी में करीब तीन साल पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने का काम होता था। मेरठ निवासी दिलशाद खान की रूही इंडस्ट्रीज के नाम से फर्म है और इसी नाम से रजिस्टर्ड है। लेकिन पिछले काफी समय से काम बंद था और करीब तीन माह पहले ही इस फैक्टरी को हापुड़ निवासी वसीम को किराये पर दिया गया था।
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फैक्टरी में एक हॉल और छोटे कमरे के अलावा पूरे परिसर में बड़े टिन शेड के नीचे काम चल रहा था। फैक्टरी के पीछे की तरफ ट्रांसफार्मर भी लगा है। इसके बावजूद पास में ही पटाखे बनाए जा रहे थे। आईजी प्रवीन कुमार ने बताया कि हर बिंदू पर जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
धमाके से हवा में उछलकर फैक्टरी के बाहर गिरे शव
धौलाना के यूपीएसआईडीसी स्थित पटाखा फैक्टरी में धमाके का मंजर रुह कंपाने वाला था। बारूद में लगी आग के धमाके की आवाज पांच किलोमीटर तक गूंजी, कामगारों के शव उड़कर फैक्टरी परिसर से बाहर जाकर गिरे। शेड में लगी टीनें 50 फिट ऊपर उछल कर 200 मीटर दूर जाकर गिरीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरूआत की आग इतनी प्रचंड थी कि एक मिनट तक कुछ दिखना भी बंद हो गया। शनिवार सुबह फैक्टरी में काम करने वाले कामगार काम कर रहे थे। उन्हें नहीं पता था कि उनके साथ इतनी बड़ी अनहोनी होने जा रही है।
टैंक में कामगार बारूद का मसाला तैयार कर रहे थे, अचानक बारूद ने आग पकड़ ली। कामगारों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पलक झपकते ही टैंक आग का गोला बनकर फट गया। आग का गोला अपने साथ फैक्टरी के टीन शेड को गरीब 50 फिट ऊपर तक उड़ा ले गया। बारूद बनाने का काम कर रहे कामगारों के शव भी इस धमाके के साथ उड़कर फैक्टरी के बाहर जाकर गिरे। धमाके की आवाज छह किलोमीटर दूर तक स्थित देहरा, चौना, नंगला, हसनपुर, पिपलेड़ा, खिचरा गांव में भी सुनी गई। पटाखा फैक्टरी से सटी अन्य फैक्टरियों में भी भारी नुकसान हुआ।
फैक्टरी मालिक और संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
सीओ डॉ. तेजवीर सिंह ने बताया कि इस मामले में फैक्टरी के मालिक मूल रूप से मेरठ व अब दिल्ली में रह रहे दिलशाद खान और संचालक वसीम निवासी मोहल्ला कानून गोयान के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। घटना में वसीम झुलस गया बताया गया है, जबकि दिलशाद खान फिलहाल फरार है। एडिशनल कमिश्नर आलोक कुमार सिंह ने बताया कि गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ के अधिकारियों की टीम को जांच के लिए गठित किया जा रहा है।
मौके पर मिला उपस्थिति रजिस्टर
टीम को मौके से उपस्थिति रजिस्टर मिला है। जिसमें रात्रि की शिफ्ट में काम करने वालों के नाम अंकित थे और दो जून तक की इसमें एंट्री पाई गई। करीब 23 लोगों के इस रजिस्टर में हस्ताक्षर मौजूद थे। इसे पुलिस ने कब्जे में ले लिया है।
मलबे में दबे शव खोजने के लिए खोदाई
धौलाना की पटाखा फैक्टरी में धमाके के बाद कई शव मलबे में भी दब गए। जिन्हें खोजने के लिए पुलिस कर्मियों ने खोदाई करायी। मलबे से दो शव बरामद किए गए।
कपड़ों में आग से घिरे कर्मचारी चीखते हुए भागे
बारूद में धमाके के बाद अधिकांश कर्मचारी झुलस गए, कपड़ों में आग से घिरे सात से दस कर्मचारी बाहर की और मदद की गुहार लगाते दौड़े। इनमें दो बाहर आते ही अचेत हो गए, जबकि बाकी रोते बिलखते रहे।
चाय वाला सुनील बना फरिश्ता
फैक्टरी के पास ही गढ़ निवासी सुनील चाय बनाने का काम करता है। शनिवार को जब यह हादसा हुआ तो वह मौके पर पहुंच गया। आग से झुलसते कर्मचारियों को उसने अपनी जान हथेली पर रख बचाया। घायलों को ऑटो आदि से उसने अस्पताल तक पहुंचवाया। ईदवा प्रधान, साबिर मलिक, शहजाद चौधरी, हसीन ने भी मदद की।