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हिंडन पर कब्जे, नाले हैं जाम, ज्यादा बारिश ला सकती है ‘बाढ़’
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 31 Jul 2016 12:24 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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मूसलाधार बारिश से गुड़गांव में जलभराव और जाम के जो हालात बने, वैसे ही हालात गाजियाबाद में भी बन सकते हैं। तेजी से बढ़ रही आबादी वाले इस क्षेत्र में प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर नदी और तालाबों का तो दम घोंटा ही जा रहा है, नालों की सफाई में भी लापरवाही बरती गई है।
ऐसे में ज्यादा पानी बरसा तो गाजियाबाद में भी बाढ़ जैसे हालात होंगे। डूब क्षेत्र में बनाए गए मकानों और हाउसिंग प्रोजेक्ट को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है। दरअसल, बारिश का पानी नालों के जरिए नदी और तालाबों तक पहुंचता है।
गाजियाबाद में विकास के नाम पर तालाबों का 138 तालाबों का अस्तित्व खत्म कर दिया गया है। हिंडन नदी के डूब क्षेत्र को भी सिकोड़कर उसमें पक्का निर्माण कर दिया गया है। बार-बार बंधे बनाकर डूब क्षेत्र को अब महज 40-50 मीटर के दायरे में समेट दिया गया था।
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जबकि पर्यावरणविदों की मानें तो कभी हिंडन नदी गाजियाबाद के पटेल नगर और जस्सीपुरा तक बहा करती थी। 1978 में आई बाढ़ के दौरान पुराने बस अड्डे तक हिंडन नदी का पानी पहुंच गया था। अब भूमाफियाओं ने प्लाटिंग के लिए हिंडन नदी का ‘गला घोंट‘ दिया है।
दूसरी ओर, गाजियाबाद के नालों की सफाई में भी इस बार महज खानापूर्ति हुई है। नालों पर हुए पक्के अतिक्रमण को हटवाने की बजाय नगर निगम ने खानापूर्ति कर नालों की सफाई करने का दावा किया है। निगम के इस दावे की पोल हर बार हल्की बारिश में ही खुल जाती है।
शहर के दो बड़े क्षेत्रों को जोड़ने वाला गोशाला अंडरपास हल्की सी बारिश में ही पानी से लबालब हो जाता है। इसकी वजह से शहर दो हिस्सों में बंट जाता है। ऐसे में मूसलाधार बारिश हुई तो गाजियाबाद में भी गुड़गांव जैसे हालात बन जाएंगे।
चिंतित हैं पर्यावरणविद्
हिंडन जल बिरादरी के संयोजक विक्रांत शर्मा का कहना है कि हिंडन नदी की चौड़ाई गाजियाबाद से पीछे अभी भी काफी है। इस बार बीते कई वर्षों से बेहतर बारिश हो रही है। ऐसे में 1978 की बाढ़ जैसी स्थिति बनी गाजियाबाद में भीषण तबाही हो सकती है।
नदी बेहद संकरी हो जाने से पानी आसानी से नहीं निकल पाएगा और बंधे तोड़कर कालोनियों में घुस सकता है। यमुना में जलस्तर बढ़ जाने से मोमनाथनपुर से हिंडन में पानी बैक मारने लगता है।
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ऐसे में ज्यादा पानी बरसा तो गाजियाबाद में भी बाढ़ जैसे हालात होंगे। डूब क्षेत्र में बनाए गए मकानों और हाउसिंग प्रोजेक्ट को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है। दरअसल, बारिश का पानी नालों के जरिए नदी और तालाबों तक पहुंचता है।
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गाजियाबाद में विकास के नाम पर तालाबों का 138 तालाबों का अस्तित्व खत्म कर दिया गया है। हिंडन नदी के डूब क्षेत्र को भी सिकोड़कर उसमें पक्का निर्माण कर दिया गया है। बार-बार बंधे बनाकर डूब क्षेत्र को अब महज 40-50 मीटर के दायरे में समेट दिया गया था।
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जबकि पर्यावरणविदों की मानें तो कभी हिंडन नदी गाजियाबाद के पटेल नगर और जस्सीपुरा तक बहा करती थी। 1978 में आई बाढ़ के दौरान पुराने बस अड्डे तक हिंडन नदी का पानी पहुंच गया था। अब भूमाफियाओं ने प्लाटिंग के लिए हिंडन नदी का ‘गला घोंट‘ दिया है।
दूसरी ओर, गाजियाबाद के नालों की सफाई में भी इस बार महज खानापूर्ति हुई है। नालों पर हुए पक्के अतिक्रमण को हटवाने की बजाय नगर निगम ने खानापूर्ति कर नालों की सफाई करने का दावा किया है। निगम के इस दावे की पोल हर बार हल्की बारिश में ही खुल जाती है।
शहर के दो बड़े क्षेत्रों को जोड़ने वाला गोशाला अंडरपास हल्की सी बारिश में ही पानी से लबालब हो जाता है। इसकी वजह से शहर दो हिस्सों में बंट जाता है। ऐसे में मूसलाधार बारिश हुई तो गाजियाबाद में भी गुड़गांव जैसे हालात बन जाएंगे।
चिंतित हैं पर्यावरणविद्
हिंडन जल बिरादरी के संयोजक विक्रांत शर्मा का कहना है कि हिंडन नदी की चौड़ाई गाजियाबाद से पीछे अभी भी काफी है। इस बार बीते कई वर्षों से बेहतर बारिश हो रही है। ऐसे में 1978 की बाढ़ जैसी स्थिति बनी गाजियाबाद में भीषण तबाही हो सकती है।
नदी बेहद संकरी हो जाने से पानी आसानी से नहीं निकल पाएगा और बंधे तोड़कर कालोनियों में घुस सकता है। यमुना में जलस्तर बढ़ जाने से मोमनाथनपुर से हिंडन में पानी बैक मारने लगता है।