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हाईपावर कमेटी लेगी रैपिड रेल डिपो की जमीन पर फैसला
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रैपिड रेल का प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : AMAR UJALA
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सबहेड- एनसीआरटीसी ने मधुबन बापूधाम योजना में जीडीए से मांगी है 30 हेक्टेयर जमीन, डिपो की जमीन के मद्देनजर अगले माह हो सकती है हाई पावर कमेटी की बैठक - जीडीए का जमीन देने से साफ इंकार, मधुबन बापूधाम में एक साथ नहीं है 30 हेक्टेयर जमीन - जीडीए शासन और मंडलायुक्त के सामने रख चुका है अपना पक्ष प्रद्युम्न उपाध्याय गाजियाबाद। दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ तक प्रस्तावित रैपिड रेल कॉरिडोर के डिपो के लिए जमीन का मामला अब शासन के पाले में पहुंच गया है। दुहाई में किसानों से बात न बनती देख एनसीआरटीसी ने मधुबन बापूधाम में 30 हेक्टेयर जमीन की मांग की है। एनसीआरटीसी की रैपिड डिपो के लिए जमीन पर फैसला अब शासन की हाई पावर कमेटी लेगी। तकनीकी कारणों का हवाला देकर जीडीए के इंकार के बाद अब एनसीआरटीसी की निगाहें शासन की ओर लगी हुई है। जीडीए ने रैपिड डिपो के लिए जमीन और एक स्टेशन के लिए मधुबन-बापूधाम योजना में एक साथ 30 हेक्टेयर जमीन न होने का हवाला देकर जमीन देने से इनकार कर दिया था। जीडीए की ओर से अपना पक्ष शासन के साथ मंडलायुक्त के सामने भी रखा गया। लेकिन किसानों से बात बनती न देख एनसीआरटीसी अभी भी मधुबन बापूधाम योजना में ही डिपो के लिए जमीन की आस लगाए हुए हैं। एनसीआरटीसी ने जमीन के बाबत अपना पक्ष भी शासन में रखा है। ऐसे में अब मामला हाई पावर कमेटी के पास चला गया है। रैपिड डिपो के लिए जमीन मिलने में होने वाली देरी के चलते अब शासन की हाई पावर कमेटी जल्द निर्णय ले सकती है। बता दें कि बीते फरवरी माह में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में जीडीए अधिकारियों ने साफ किया था, एनसीआरटीसी की मांग के अनुसार मधुबन बापूधाम योजना में दिल्ली मेरठ हाईवे से सटी 30 एकड़ जमीन एक साथ उनके पास नहीं है। इसके अलावा योजना में अस्पताल, स्कूल, पेट्रोल पंप, सीएनजी पंपिंग स्टेशन और अन्य यूटिलिटी के लिए योजना में जमीन निर्धारित है। वहीं, 22 हेक्टेयर जमीन किसानों को मुआवजे के साथ उन्हें भूखंड देने के लिए रखी गई है। जीडीए की ओर से सीएटीपी ने शासन में पक्ष रखा। ------------------------ एनसीआरटीसी की किसानों से नहीं बन पा रही बात रैपिड रेल कॉरिडोर का एनसीआरटीसी ने दुहाई में डिपो प्रस्तावित किया था। जुलाई 2019 में ही दुहाई में रैपिड रेल के डिपो के लिए तीन गांवों की 67.0523 हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की गई थी।इसमें भिक्कनपुर गांव में 37.87 हेक्टेयर, बसंतपुर सैंथली गांव में 25.50 हेक्टेयर और दुहाई में 3.6725 हेक्टेयर जमीन की अधिसूचना हुई थी। डिपो के लिए जमीन के बाबत एनसीआरटीसी की किसानों से कई दौर की वार्ता हो चुकी है। एनसीआरटीसी को किसानों से सीधे जमीन खरीदनी है, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। किसानों का कहना था कि खेती ही उनकी आय का मुख्य स्त्रोत है। रैपिड रेल डिपो के लिए कृषि भूमि देने पर वह बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने मांग रखी थी कि उनके परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी भी दी जाए। इस पर एनसीआरटीसी तैयार नहीं है। --------------------- मार्च 2023 तक शुरू होना है पहला प्राथमिकता वाला सेक्शन एनसीआरटीसी को रैपिड रेल कॉरिडोर में 17 किमी लंबे साहिबाबाद से दुहाई स्टेशन तक का सेक्शन मार्च 2023 तक शुरू करना है। लेकिन डिपो की जमीन संबंधी मामला फंसा हुआ है। मार्च 2023 को पहला सेक्शन शुरू करने के लिए एनसीआरटीसी को एक साल पहले मार्च 2022 तक रेलवे का सेफ्टी ट्रायल रन के लिए आवेदन करना होगा। ऐसे में जमीन नहीं मिलने और निर्माण संबंधी देरी होने से एनसीआरटीसी की परेशानी बढ़ सकती है। -------------------- कोट्स..... 1. रैपिड रेल के डिपो के लिए मधुबन बापूधाम योजना में जमीन के बाबत प्रयास जारी हैं। शासन की हाई पावर कमेटी जल्द जमीन के बारे में निर्णय लेगी। डिपो के लिए जल्द जमीन मिलने की पूरी संभावना है। ------- 2. मधुबन बापूधाम योजना में जीडीए के पास डिपो के लिए एक साथ 30 हेक्टेयर जमीन नहीं है। लखनऊ और मंडलायुक्त के साथ हुई बैठक में प्राधिकरण के पक्ष के बारे में अवगत कराया जा चुका है। - आशीष शिवपुरी, सीएटीपी, जीडीए --------------
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