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वादपत्र पढ़कर क्रूरता के आरोपों की सत्यता का परीक्षण नहीं : हाईकोर्ट
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के मुकदमे में सीपीसी के आदेश सात नियम 11 की अर्जी (वाद खारिज करने की अर्जी) खारिज होने के खिलाफ प्रथम अपील पोषणीय नहीं है। क्रूरता और परित्याग के आरोप सही हैं या नहीं इसका फैसला साक्ष्यों के आधार पर होगा केवल वादपत्र पढ़कर नहीं।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने वृंदा अग्रवाल की प्रथम अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
मामले में पति ने आठ अक्तूबर 2021 को क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की थी। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर मुकदमा गाजियाबाद से हापुड़ स्थानांतरित कर दिया गया।
पत्नी ने अर्जी देकर कहा कि वादपत्र में तलाक का कोई ठोस आधार नहीं है और मुकदमा परेशान करने के लिए दाखिल किया गया है। इस कारण तलाक के वाद को खारिज किया जाना चाहिए। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट हापुड़ ने 14 जुलाई 2026 को अर्जी खारिज कर मुकदमे को साक्ष्य के लिए तय कर दिया था।
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न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने वृंदा अग्रवाल की प्रथम अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
मामले में पति ने आठ अक्तूबर 2021 को क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की थी। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर मुकदमा गाजियाबाद से हापुड़ स्थानांतरित कर दिया गया।
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पत्नी ने अर्जी देकर कहा कि वादपत्र में तलाक का कोई ठोस आधार नहीं है और मुकदमा परेशान करने के लिए दाखिल किया गया है। इस कारण तलाक के वाद को खारिज किया जाना चाहिए। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट हापुड़ ने 14 जुलाई 2026 को अर्जी खारिज कर मुकदमे को साक्ष्य के लिए तय कर दिया था।
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