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गाजियाबाद: गुलमोहर ग्रीन्स में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, दो टावर जमींदोज करने के आदेश; अब जीडीए पर नजर
Thu, 29 Oct 2026 07:36 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Thu, 29 Oct 2026 07:36 PM IST
सार
गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में अवैध निर्माण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने टावर 27 और 28 को गिराने तथा चार अन्य टावरों की नौवीं और दसवीं मंजिल ढहाने के आदेश दिए हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
गाजियाबाद के साहिबाबाद में मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में बिल्डर द्वारा तीसरी बार कंपाउंडिंग कराने के बाद बनाए गए दो टावर, हाईकोर्ट के फैसले के बाद गिराए जाएंगे। स्थानीय निवासी पिछले 11 वर्षों से कोर्ट में इसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। अब फैसला आने के बाद सोसायटी के लोगों की निगाहें अब कोर्ट फैसले के बाद जीडीए की कार्रवाई पर अटकी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स आवासीय सोसायटी में अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाते हुए टावर नंबर 27 और 28 को पूरी तरह जमींदोज करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही टावर संख्या 16, 17, 18 और 19 की 9वीं और 10वीं मंजिल को भी ढहाने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2015 में एओए अध्यक्ष रहे निश्चल त्यागी ने पहली बार बिल्डर के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
निश्चल त्यागी का कहना है कि कोर्ट में मामला होने के बावजूद बिल्डर जीडीए से कंपाउंडिंग कराता रहा और यहां अलग-अलग निर्माण करता रहा। सोसायटी के लोगों ने न्यायालय के आदेश के प्रति अपना सम्मान और विश्वास जताया है। लोगों ने कहा कि यह फैसला बिल्डर के साथ ही शासन-प्रशासन के लिए नजीर साबित होगा और दूसरी सोसायटियों में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ सुनवाई आसान हो सकेगी।
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साल 2005 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट आज तक भी अधूरा
अपने 95 पन्नों के विस्तृत आदेश में कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट वर्ष 2005 में शुरू हुआ था। 20 साल बीत जाने के बाद भी यह पूरा नहीं हुआ। यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 के तहत कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल करने की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रमोटर की थी, जिसका उसने पालन नहीं किया। कोर्ट ने अपने आदेश में इस पूरे मामले में जीडीए और पुलिस प्रशासन जिनके समक्ष सोसायटी की शिकायतें अनसुनी कर दी गई, निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स आवासीय सोसायटी में अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाते हुए टावर नंबर 27 और 28 को पूरी तरह जमींदोज करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही टावर संख्या 16, 17, 18 और 19 की 9वीं और 10वीं मंजिल को भी ढहाने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2015 में एओए अध्यक्ष रहे निश्चल त्यागी ने पहली बार बिल्डर के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
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निश्चल त्यागी का कहना है कि कोर्ट में मामला होने के बावजूद बिल्डर जीडीए से कंपाउंडिंग कराता रहा और यहां अलग-अलग निर्माण करता रहा। सोसायटी के लोगों ने न्यायालय के आदेश के प्रति अपना सम्मान और विश्वास जताया है। लोगों ने कहा कि यह फैसला बिल्डर के साथ ही शासन-प्रशासन के लिए नजीर साबित होगा और दूसरी सोसायटियों में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ सुनवाई आसान हो सकेगी।
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साल 2005 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट आज तक भी अधूरा
अपने 95 पन्नों के विस्तृत आदेश में कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट वर्ष 2005 में शुरू हुआ था। 20 साल बीत जाने के बाद भी यह पूरा नहीं हुआ। यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 के तहत कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल करने की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रमोटर की थी, जिसका उसने पालन नहीं किया। कोर्ट ने अपने आदेश में इस पूरे मामले में जीडीए और पुलिस प्रशासन जिनके समक्ष सोसायटी की शिकायतें अनसुनी कर दी गई, निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।