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जापानी इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए टीकाकरण की मांग
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जापानी इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए टीकाकरण की मांग
हापुड़। हापुड़ में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की रोकथाम के लिए टीकाकरण की मांग की गई है। जिले में जेई के तीन केस सामने आने के बाद सीएमओ ने इस संबंध में शासन को चिट्ठी लिखी है।
बच्चों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए जन्म से 16 वर्ष की आयु तक टीके लगाए जाते हैं। पहली बार धौलाना के गांव फगौता गांव में तीन बच्चों में जेई की पुष्टि हुई है। बच्चे को जेई से बचाने के लिए दो साल की उम्र तक दो बार टीका लगाना जरूरी है। पहला टीका 9 से 12 माह की उम्र तक लगता है। जबकि दूसरा टीका 16 से 24 माह की आयु में लगाया जाता है। लेकिन हापुड़ जेई के टीकाकरण में शामिल नहीं है। बच्चे के टीकाकरण का जो कार्ड जारी किया जाता है उसमें जेई के आगे क्रॉस का निशान लगा दिया जाता है।
बच्चों के लिए जरूरी हैं टीके:
बीसीजी: जन्म के समय या एक वर्ष की आयु तक।
हेपेटाइटिस बी: जन्म के बाद 24 घंटे के अंदर।
पोलियो वैक्सीन: जन्म के 15 दिन में।
रोटावायरस, पेंटावेलेेंट: 10 और 14 सप्ताह में।
पीसीवी: 6 और 14 सप्ताह पर।
खसरा, रूबेला, जे.ई: 9 माह से 12 माह की आयु में।
डीपीटी, ओपीवी बूस्टर, खसरा, खसरा रूबेला, जेई: 16 से 24 माह की आयु में।
डीपीटी दूसरा बूस्टर: 5 से 6 वर्ष की आयु में।
टीडी: 10 से 16 वर्ष की आयु में।
शासन को भेज दी हे रिपोर्ट
जिले में पहली बार जेई के केस सामने आए हैं।, इनकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जल्द ही नियमित टीकाकरण में जेई का टीका भी शामिल होने की उम्मीद है। -डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
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हापुड़। हापुड़ में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की रोकथाम के लिए टीकाकरण की मांग की गई है। जिले में जेई के तीन केस सामने आने के बाद सीएमओ ने इस संबंध में शासन को चिट्ठी लिखी है।
बच्चों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए जन्म से 16 वर्ष की आयु तक टीके लगाए जाते हैं। पहली बार धौलाना के गांव फगौता गांव में तीन बच्चों में जेई की पुष्टि हुई है। बच्चे को जेई से बचाने के लिए दो साल की उम्र तक दो बार टीका लगाना जरूरी है। पहला टीका 9 से 12 माह की उम्र तक लगता है। जबकि दूसरा टीका 16 से 24 माह की आयु में लगाया जाता है। लेकिन हापुड़ जेई के टीकाकरण में शामिल नहीं है। बच्चे के टीकाकरण का जो कार्ड जारी किया जाता है उसमें जेई के आगे क्रॉस का निशान लगा दिया जाता है।
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बच्चों के लिए जरूरी हैं टीके:
बीसीजी: जन्म के समय या एक वर्ष की आयु तक।
हेपेटाइटिस बी: जन्म के बाद 24 घंटे के अंदर।
पोलियो वैक्सीन: जन्म के 15 दिन में।
रोटावायरस, पेंटावेलेेंट: 10 और 14 सप्ताह में।
पीसीवी: 6 और 14 सप्ताह पर।
खसरा, रूबेला, जे.ई: 9 माह से 12 माह की आयु में।
डीपीटी, ओपीवी बूस्टर, खसरा, खसरा रूबेला, जेई: 16 से 24 माह की आयु में।
डीपीटी दूसरा बूस्टर: 5 से 6 वर्ष की आयु में।
टीडी: 10 से 16 वर्ष की आयु में।
शासन को भेज दी हे रिपोर्ट
जिले में पहली बार जेई के केस सामने आए हैं।, इनकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जल्द ही नियमित टीकाकरण में जेई का टीका भी शामिल होने की उम्मीद है। -डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
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