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हर दसवें युवक में मिला हेपेटाइटिस बी और सी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 11:27 PM IST
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hapur news
हर दसवें युवक में मिला हेपेटाइटिस बी और सी
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हापुड़। जिले में हर दसवें युवा में हेपेटाइटिस बी और सी मिल रहा है। इस साल जिले में 600 युवाओं ने रक्तदान किया। इस रक्त की जांच में पता चला कि इनमें से दस लोगों को लिवर की गंभीर बीमारी हेपेटाइटिस बी और सी है। इनका रिकार्ड निकाला गया तो पता चला की सभी की आयु 35 वर्ष से कम है।
सीएमओ डॉक्टर रेखा शर्मा का कहना है कि खानपान और दिनचर्या अनियमित होने की वजह से लिवर संबंधी बीमारियां शुरू हो जाती हैं। हालांकि हेपेटाइटिस बी और सी संक्रामक बीमारी नहीं है। यह बीमारी रक्त चढ़ाने से अंग प्रत्यारोपण से, एक ही सिरिंज से कई मरीजों को इंजेक्शन लगाने से, दूसरे का शेविंग रेजर प्रयोग से, टूथब्रश शेयर करने से यौन संबंधों से या फिर गर्भावस्था के दौरान ही हो जाती है। बीमारी होने के बाद काफी समय तक संबंधित व्यक्ति को बीमारी का एहसास नहीं होता, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति खराब होती चली जाती है। रक्तदान के बाद डॉक्टर लैब में एचआईवी और हेपेटाइटिस बी और सी की जांच अनिवार्य तौर पर करते हैं। इसी जांच में युवाओं में गंभीर बीमारी का पता चला। हालांकि रक्तदान के पहले की गई इनकी प्रारंभिक जांच में इनका हीमोग्लोबिन और वजन ठीक था। बाद में रक्त के सैंपल से हेपेटाइटसिस बी और सी की भी जांच की गई तो इनकी पुष्टि हो गई। डॉक्टरों ने फोन करके संबंधित युवाओं को इसकी जानकारी भी दे दी है। (संवाद)
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हेपेटाइटिस-सी के लक्षण:
थकान, मतली या भूख न लगना।
पेट दर्द, गहरे रंग का मूत्र आना।
त्वचा और आंखों में पीलापन।
बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
शरीर नीला पड़ना, त्वचा में खुजली होना, पेट में द्रव का संचय, पैरों में सूजन।
इलाज के लिए जाना पड़ता है मेरठ
जिले के सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस-सी और बी का उपचार नहीं हैं। इनका उपचार महंगा है। यहां के मरीजों को मेरठ मेडिकल कॉलेज में जाना पड़ता है।
परेशान न हों, उपचार संभव
हेपेटाइटिस बी और सी रोग का इलाज संभव है। जांच में इन रोगों की पुष्टि होने पर तुरंत ही मरीज उपचार शुरू करा देें। कुछ महीने की दवाओं से ही यह रोग ठीक हो जाते हैं। इसमें लापरवाही कतई न बरतें।--डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
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