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संकट: 24 फीसदी कम हुई बारिश, नहीं हो पा रही धान की रोपाई
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संकट: 24 फीसदी कम हुई बारिश, नहीं हो पा रही धान की रोपाई
हापुड़। बारिश कम होने की वजह से जिले में किसानों का संकट बढ़ रहा है। फसलें सूखने के कगार पर हैं। डीजल के दाम बढ़ने से सिंचाई महंगी हो गई है। लागत बढ़ती जा रही है। बीते वर्ष एक जनवरी से 18 जुलाई के बीच 475 मिलीमीटर बारिश हुई थी जबकि इस साल का आंकड़ा सिर्फ 360 मिलीमीटर है।
जिले में 87 हजार हेक्टेयर में खेती होती है। मानसून लेट होने की वजह से किसानों ने धान की रोपाई भी रोक दी है।ऐसे में धान का रकबा और पैदावार दोनों ही घटने के आसार बन गए हैं। यहां पैदा होने वाला बासमती चावल देश भर में जाता है। किसान हर साल करीब 25 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई करते हैं। जुलाई महीने में धान की रोपाई होती है। लेकिन इस बार जुलाई महीना ही सूखा निकल रहा है। रजवाहे सूखे हैं और बिजली धोखा दे रही है। ऐसे सिंचाई के लिए जेनरेटर और ट्रैक्टर लगाने पड़ रहे हैं।
जिले में धान का रकबा:
वर्ष रकबा हेक्टेयर में उत्पादन क्विंटल में
2018 23000 9.20
2019 24000 र 9.72
2020 25000 10
2021 12000 ----
जुलाई में बारिश की स्थिति
वर्ष बारिश मिलीमीटर में
2020 210.50
2019 270.40
2018 240.52
2021 60
तीन वर्षों में जुलाई तक बारिश की स्थिति
वर्ष बारिश मिलीमीटर में
2021 360 (18 जुलाई तक)
2020 475
2019 510
2018 480
जिले में फसलों की स्थिति-
फसल रकबा (हेक्टेयर में)
गन्ना 42000
सब्जी 5000
बागवानी 20000
जिले में सिंचाई के साधन:
राजकीय नलकूपों की संख्या--130
निजी नलकूपों की संख्या----5500
डीजल संचित पंप सेट-----12 हजार
नहर की लंबाई---------340 किलोमीटर
पैदावार घटने का खतरा
बिजली आपूर्ति कम है, बारिश हो नहीं रही। डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। सूखे का खतरा सता रहा है। सिंचाई न होने से पैदावार घटने का खतरा है। धान की रोपाई भी प्रभावित हो गई है।--जतिन चौधरी, किसान, रसूलपुर।
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धान की रोपाई का संकट
धान की खेती के लिए पानी की जरूरत बारिश से ही पूरी हो सकती है। वैकल्पिक तरीकों से की गई सिंचाई से अच्छा फसल उत्पादन नहीं होता। रोपाई प्रभावित हो रही है। फसलों की लागत भी बढ़ती जा रही है।
--सियानंद त्यागी, किसान, श्यामनगर।
धान की जगह करें दालों की खेती
धान की रोपाई अब लेट हो रही है। जिन किसानों के पास पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है, वह अन्य फसलों को उगाएं, ताकि उन्हें इनसे लाभ हो सके। हरी खाद बुवाई से दहलन की फसल में लाभ मिलेगा। किसान चाहे तो तिलहन की बुवाई भी कर सकते हैं।-डॉ हंसराज, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।
सूखे के हालात नहीं
जिले में फिलहाल सूखे जैसी स्थिति नहीं है, फिर भी सिंचाई की समस्या से निपटने के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। समस्त विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं।--अनुज सिंह, डीएम।
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हापुड़। बारिश कम होने की वजह से जिले में किसानों का संकट बढ़ रहा है। फसलें सूखने के कगार पर हैं। डीजल के दाम बढ़ने से सिंचाई महंगी हो गई है। लागत बढ़ती जा रही है। बीते वर्ष एक जनवरी से 18 जुलाई के बीच 475 मिलीमीटर बारिश हुई थी जबकि इस साल का आंकड़ा सिर्फ 360 मिलीमीटर है।
जिले में 87 हजार हेक्टेयर में खेती होती है। मानसून लेट होने की वजह से किसानों ने धान की रोपाई भी रोक दी है।ऐसे में धान का रकबा और पैदावार दोनों ही घटने के आसार बन गए हैं। यहां पैदा होने वाला बासमती चावल देश भर में जाता है। किसान हर साल करीब 25 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई करते हैं। जुलाई महीने में धान की रोपाई होती है। लेकिन इस बार जुलाई महीना ही सूखा निकल रहा है। रजवाहे सूखे हैं और बिजली धोखा दे रही है। ऐसे सिंचाई के लिए जेनरेटर और ट्रैक्टर लगाने पड़ रहे हैं।
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जिले में धान का रकबा:
वर्ष रकबा हेक्टेयर में उत्पादन क्विंटल में
2018 23000 9.20
2019 24000 र 9.72
2020 25000 10
2021 12000 ----
जुलाई में बारिश की स्थिति
वर्ष बारिश मिलीमीटर में
2020 210.50
2019 270.40
2018 240.52
2021 60
तीन वर्षों में जुलाई तक बारिश की स्थिति
वर्ष बारिश मिलीमीटर में
2021 360 (18 जुलाई तक)
2020 475
2019 510
2018 480
जिले में फसलों की स्थिति-
फसल रकबा (हेक्टेयर में)
गन्ना 42000
सब्जी 5000
बागवानी 20000
जिले में सिंचाई के साधन:
राजकीय नलकूपों की संख्या--130
निजी नलकूपों की संख्या----5500
डीजल संचित पंप सेट-----12 हजार
नहर की लंबाई---------340 किलोमीटर
पैदावार घटने का खतरा
बिजली आपूर्ति कम है, बारिश हो नहीं रही। डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। सूखे का खतरा सता रहा है। सिंचाई न होने से पैदावार घटने का खतरा है। धान की रोपाई भी प्रभावित हो गई है।--जतिन चौधरी, किसान, रसूलपुर।
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धान की रोपाई का संकट
धान की खेती के लिए पानी की जरूरत बारिश से ही पूरी हो सकती है। वैकल्पिक तरीकों से की गई सिंचाई से अच्छा फसल उत्पादन नहीं होता। रोपाई प्रभावित हो रही है। फसलों की लागत भी बढ़ती जा रही है।
--सियानंद त्यागी, किसान, श्यामनगर।
धान की जगह करें दालों की खेती
धान की रोपाई अब लेट हो रही है। जिन किसानों के पास पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है, वह अन्य फसलों को उगाएं, ताकि उन्हें इनसे लाभ हो सके। हरी खाद बुवाई से दहलन की फसल में लाभ मिलेगा। किसान चाहे तो तिलहन की बुवाई भी कर सकते हैं।-डॉ हंसराज, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।
सूखे के हालात नहीं
जिले में फिलहाल सूखे जैसी स्थिति नहीं है, फिर भी सिंचाई की समस्या से निपटने के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। समस्त विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं।--अनुज सिंह, डीएम।