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जीपीएस से ट्रैक की जाएगी स्वास्थ्यकर्मी की लोकेशन

Fri, 12 May 2017 12:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजियाबाद Updated Fri, 12 May 2017 12:39 AM IST
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GPS will be tracked by the physician's location
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स्वास्थ्य कर्मचारी मरीजों के घर जा रहे हैं या नहीं, मरीजों का समय पर चेकअप हो रहा है या नहीं, इसकी ट्रैकिंग अब ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम से की जाएगी। क्षय रोग विभाग गाजियाबाद में ट्रीटमेंट सुपरवाइजर्स की निगरानी के लिए उनके वाहनों में जीपीएस लगाया गया है।

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रिवाइज्ड टीबी कंट्रोल प्रोग्राम के तहत ट्रीटमेंट सुपरवाइजर्स और हेल्थ विजिटर्स को मरीजों के घर-घर जाकर उनका फॉलोअप करना होता है। इसके लिए सभी फील्ड वर्कर्स को विभाग की तरफ से वाहन दिए गए हैं। मरीजों के घर न जाना और वाहनों के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद क्षय रोग विभाग ने सभी के वाहनों में जीपीएस लगवा दिए हैं।
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एमएमजी स्थित क्षय रोग विभाग में इसका कंट्रोल रूम बनाया गया है और वहीं से सभी वर्कर की मॉनीटरिंग की जा रही है। ट्रीटमेंट सुपरवाइजर्स का काम होता है कि वह मरीजों के घर-घर जाकर समय पर दवा लेने, दवा का रिमांडर देना और उनको साफ-सफाई आदि के बारे में जागरूक करें।
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इसके अलावा मरीज के घर पर अन्य किसी को यह बीमारी तो नहीं है, इसकी भी जांच की जाती है, लेकिन अधिकतर सुपरवाइजर्स और हेल्थ विजिटर्स मरीजों के घर न जाकर वाहनों को अपने निजी काम में इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा वाहनों को घर भी ले जाते थे। इसको रोकने के लिए यह व्यवस्था की गई है।

क्षय रोग विभाग में काम करने वाले 18 ट्रीटमेंट सुपरवाइजर्स की वाइक और स्कूटी में जीपीएस लगाया गया है। अब सभी वाहनों को ड्यूटी ऑवर में इस्तेमाल करने के बाद मुख्यालय या अपने निर्धारित क्षेत्र के पास ही रखा जा रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. डीएम सक्सेना ने बताया कि कुछ शिकायतों के बाद यह व्यवस्था की गई है। इससे काफी सुधार देखने को मिल रहा है।

अन्य विभागों में भी जीपीएस लगाने की तैयारी  
अन्य विभागों में भी इस ट्रैकिंग सिस्टम को लागू करने की योजना बनाई जा रही है। अब बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना सहित अन्य टीकाकरण अभियानों में लगने वाले वाहनों में भी जीपीएस लगाने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही वाहन चालक को गंतव्य पर पहुंचते ही व्हॉट्सएप ग्रुप पर फोटो भी पोस्ट करनी होगी।


वर्ष 2015-16 में इसी अभियान की आड़ में वाहन घोटाले को अंजाम दिया गया। कई जिलों में एक ही नंबर की गाड़ियां इस्तेमाल की गई थीं और कई जगह कार की जगह स्कूटर के नंबर भी लगा दिए गए थे।

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