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गुरुग्राम की घटना के बाद डरे हुए हैं टीएचए के लोग
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गुरुग्राम की घटना के बाद डरे हुए हैं टीएचए के लोग
साहिबाबाद। गुरुग्राम में फ्लैट की छत गिरने की घटना के बाद से वैशाली अलकनंदा टावर और तुलसी निकेतन के लोग दहशत में आ गए हैं। जीडीए और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से गुरुग्राम जैसी घटना टीएचए में भी हो सकती है। एक ओर जहां जर्जर इमारतों में रहने वाले लोग दहशत में हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों को इसकी कोई फिक्र नहीं है।
वैशाली की अलकनंदा और साहिबाबाद की तुलसी निकेतन की बिल्डिंग कभी भी हादसा का शिकार बन सकती हैं। इन इमारतों को कई एजेंसियां पहले ही जर्जर घोषित कर चुकी हैं। फ्लैटों में रह रहे लोग एवं विभागीय अधिकारी के बीच चल रहे वाद विवाद के बीच जीडीए अधिकारी यहां बने फ्लैटों को न तो खाली करा पा रहे हैं और न ही यहां की इमारतों का मेंटेनेंस हो रहा है।
अलकनंदा सोसायटी वर्ष 1998 में में बसाया गया था और 90 वर्ष के लिए सुरक्षित बताया गया लेकिन बीस वर्ष से ही कम समय में इमारत जर्जर हो चुकी है। टावर में 70 परिवार रह रहे हैं। वहीं तुलसी निकेतन 1991 की योजना है। यहां कुल 2223 फ्लैट हैं, इनमें से करीब 500 फ्लैट ऐसे हैं जो बेहद दयनीय स्थिति में हैं। अनय फ्लैट भी बदहाल स्थिति में हैं।
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इनसेट
2019 में ही जर्जर घोषित हो चुका है अलकनंदा
वैशाली स्थित अलकनंदा टावर को नगर निगम की टीम ने निरीक्षण के बाद वर्ष 2019 में ही जर्जर घोषित कर दिया गया था। अपर नगर आयुक्त की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि इस भवन में रहने वाले लोग एवं आसपास के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। वहीं जामिया मिल्लिया के सिविल डिपार्टमेंट की टीम ने भी इसका निरीक्षण किया था, जिसके बाद रिपोर्ट में इमारत को कमजोर बताया गया और कभी भी ढहने की बात कही गई थी।
इनसेट
तुलसी निकेतन के लोगों को जीडीए दो बार दे चुका है नोटिस
फ्लैटों के जर्जर होने की वजह से वर्ष 2018 से अब तक दो बार तुलसी निकेतन के निवासियों को मकान खाली करने का नोटिस जारी किया जा चुका है। लोगों ने फ्लैट के जीडीए से मकान निर्माण कर दोबारा देने की मांग की थी, जिस पर जीडीए अधिकारी राजी नहीं हुए। जीडीए की टीम खाली कराने पहुंची भी तो स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया और लंबा प्रदर्शन किया। उसके बाद से जीडीए अधिकारी भी चुप्पी लगाए हुए हैं।
इनसेट
क्या बोले लोग
जीडीए की ओर से बिल्डिंग का फर्जी हस्तांतरण किया गया था। इमारत यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 के तहत हस्तांतरण के उपरांत मरम्मत की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए की होती है, लेकिन हस्तांतरण के दौरान एक्ट का ध्यान नहीं रखा गया। पहले फर्जी निस्तारण दिखा दिया गया जो कि दिल्ली के एक एनजीओ की है। जीडीए की ओर से बिल्डिंग में फायर फाइटिंग सिस्टम भी नहीं लगाए गए हैं। वहीं अब जीडीए को जब मरम्मत की बात कहो तो वह साढ़े तीन करोड़ रुपये यहां के लोगों से मांगते हैं या फिर किसी बिल्डर को तलाशने की बात कर रहे हैं। अमित, अलकनंदा
हम लोग लगातार जीडीए से शिकयत कर रहे हैं अधिकारी यहां की समस्या का समाधान निकालने की बजाय हमें बिल्डर खोजने की सलाह देते हैं। यहां अभी भी कई फ्लैट हैं जो नहीं बिके हैं, गलत हस्तांतरण किया गया, जिसका खुलासा आरटीआई में हुआ है। लाग इतने महंगे फ्लैट लेकर यहां रह रहे हैं, इतना पैसा नहीं कि दूसरी जगह जाएं ऐसे में कोई कैसे खाली कर सकता है। अधिकारी शायद किसी हादसे के इंतजार में हैं। विनय श्रीवास्तव, अलकनंदा
तुलसी निकेतन को कई वर्ष पूर्व जीडीए नगर निगम को हस्तांतरित कर रहा था लेकिन जर्जर हो रहे फ्लैटों को नगर निगम ने टेक ओवर करने से मना कर दिया। हम लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि जीडीए हमें यहां दोबारा फ्लैट निर्मित कर दे लेकिन इस बात पर रजामंदी नहीं हो रही। जिन लोगों ने अपने जीवन भर की कमाई से फ्लैट लिए अब उनके पास इतना नहीं कि वह दूसरी जगह जाएं। कुलदीप कसाना, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, तुलसी निकेतन
जीडीए अधिकारियों के साथ हम लोगों की कई बार बैठक हो चुकी है लेकिन हमारी मांगों पर अधिकारी सहमति नहीं जता रहे। दिल्ली के करीब इस जगह को जीडीए लेना तो चाहती है लेकिन इसके बदले वह हमें मकान बनाकर नहीं देना चाह रही, ऐसे में कोई भी अपना घर खाली नहीं करेगा। यहां सड़क से लेकर सीवर तक की समस्या बनी हुई है लेकिन कोई अधिकारी संज्ञान नहीं ले रहे। बलवंत रावत, तुलसी निकेतन
इनसेट
क्या बोले अधिकारी
जीडीए के अधिशासी अभियंता मानवेंद्र सिंह का कहना है कि अलकनंदा और तुलसी निकेतन की बिल्डिंग को जर्जर घोषित किया जा चुका है। जीडीए ने इसका निदान ढूंढने के लिए बिल्डिंग के पुनर्निर्माण व मरम्मत की योजना बनाई है। इस योजना पर काम चल रहा है। निवासियों को कहा गया है कि वह अपना फ्लैट कुछ समय के लिए खाली कर दें ताकि योजना पर काम हो सके।
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साहिबाबाद। गुरुग्राम में फ्लैट की छत गिरने की घटना के बाद से वैशाली अलकनंदा टावर और तुलसी निकेतन के लोग दहशत में आ गए हैं। जीडीए और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से गुरुग्राम जैसी घटना टीएचए में भी हो सकती है। एक ओर जहां जर्जर इमारतों में रहने वाले लोग दहशत में हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों को इसकी कोई फिक्र नहीं है।
वैशाली की अलकनंदा और साहिबाबाद की तुलसी निकेतन की बिल्डिंग कभी भी हादसा का शिकार बन सकती हैं। इन इमारतों को कई एजेंसियां पहले ही जर्जर घोषित कर चुकी हैं। फ्लैटों में रह रहे लोग एवं विभागीय अधिकारी के बीच चल रहे वाद विवाद के बीच जीडीए अधिकारी यहां बने फ्लैटों को न तो खाली करा पा रहे हैं और न ही यहां की इमारतों का मेंटेनेंस हो रहा है।
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अलकनंदा सोसायटी वर्ष 1998 में में बसाया गया था और 90 वर्ष के लिए सुरक्षित बताया गया लेकिन बीस वर्ष से ही कम समय में इमारत जर्जर हो चुकी है। टावर में 70 परिवार रह रहे हैं। वहीं तुलसी निकेतन 1991 की योजना है। यहां कुल 2223 फ्लैट हैं, इनमें से करीब 500 फ्लैट ऐसे हैं जो बेहद दयनीय स्थिति में हैं। अनय फ्लैट भी बदहाल स्थिति में हैं।
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2019 में ही जर्जर घोषित हो चुका है अलकनंदा
वैशाली स्थित अलकनंदा टावर को नगर निगम की टीम ने निरीक्षण के बाद वर्ष 2019 में ही जर्जर घोषित कर दिया गया था। अपर नगर आयुक्त की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि इस भवन में रहने वाले लोग एवं आसपास के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। वहीं जामिया मिल्लिया के सिविल डिपार्टमेंट की टीम ने भी इसका निरीक्षण किया था, जिसके बाद रिपोर्ट में इमारत को कमजोर बताया गया और कभी भी ढहने की बात कही गई थी।
इनसेट
तुलसी निकेतन के लोगों को जीडीए दो बार दे चुका है नोटिस
फ्लैटों के जर्जर होने की वजह से वर्ष 2018 से अब तक दो बार तुलसी निकेतन के निवासियों को मकान खाली करने का नोटिस जारी किया जा चुका है। लोगों ने फ्लैट के जीडीए से मकान निर्माण कर दोबारा देने की मांग की थी, जिस पर जीडीए अधिकारी राजी नहीं हुए। जीडीए की टीम खाली कराने पहुंची भी तो स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया और लंबा प्रदर्शन किया। उसके बाद से जीडीए अधिकारी भी चुप्पी लगाए हुए हैं।
इनसेट
क्या बोले लोग
जीडीए की ओर से बिल्डिंग का फर्जी हस्तांतरण किया गया था। इमारत यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 के तहत हस्तांतरण के उपरांत मरम्मत की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए की होती है, लेकिन हस्तांतरण के दौरान एक्ट का ध्यान नहीं रखा गया। पहले फर्जी निस्तारण दिखा दिया गया जो कि दिल्ली के एक एनजीओ की है। जीडीए की ओर से बिल्डिंग में फायर फाइटिंग सिस्टम भी नहीं लगाए गए हैं। वहीं अब जीडीए को जब मरम्मत की बात कहो तो वह साढ़े तीन करोड़ रुपये यहां के लोगों से मांगते हैं या फिर किसी बिल्डर को तलाशने की बात कर रहे हैं। अमित, अलकनंदा
हम लोग लगातार जीडीए से शिकयत कर रहे हैं अधिकारी यहां की समस्या का समाधान निकालने की बजाय हमें बिल्डर खोजने की सलाह देते हैं। यहां अभी भी कई फ्लैट हैं जो नहीं बिके हैं, गलत हस्तांतरण किया गया, जिसका खुलासा आरटीआई में हुआ है। लाग इतने महंगे फ्लैट लेकर यहां रह रहे हैं, इतना पैसा नहीं कि दूसरी जगह जाएं ऐसे में कोई कैसे खाली कर सकता है। अधिकारी शायद किसी हादसे के इंतजार में हैं। विनय श्रीवास्तव, अलकनंदा
तुलसी निकेतन को कई वर्ष पूर्व जीडीए नगर निगम को हस्तांतरित कर रहा था लेकिन जर्जर हो रहे फ्लैटों को नगर निगम ने टेक ओवर करने से मना कर दिया। हम लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि जीडीए हमें यहां दोबारा फ्लैट निर्मित कर दे लेकिन इस बात पर रजामंदी नहीं हो रही। जिन लोगों ने अपने जीवन भर की कमाई से फ्लैट लिए अब उनके पास इतना नहीं कि वह दूसरी जगह जाएं। कुलदीप कसाना, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, तुलसी निकेतन
जीडीए अधिकारियों के साथ हम लोगों की कई बार बैठक हो चुकी है लेकिन हमारी मांगों पर अधिकारी सहमति नहीं जता रहे। दिल्ली के करीब इस जगह को जीडीए लेना तो चाहती है लेकिन इसके बदले वह हमें मकान बनाकर नहीं देना चाह रही, ऐसे में कोई भी अपना घर खाली नहीं करेगा। यहां सड़क से लेकर सीवर तक की समस्या बनी हुई है लेकिन कोई अधिकारी संज्ञान नहीं ले रहे। बलवंत रावत, तुलसी निकेतन
इनसेट
क्या बोले अधिकारी
जीडीए के अधिशासी अभियंता मानवेंद्र सिंह का कहना है कि अलकनंदा और तुलसी निकेतन की बिल्डिंग को जर्जर घोषित किया जा चुका है। जीडीए ने इसका निदान ढूंढने के लिए बिल्डिंग के पुनर्निर्माण व मरम्मत की योजना बनाई है। इस योजना पर काम चल रहा है। निवासियों को कहा गया है कि वह अपना फ्लैट कुछ समय के लिए खाली कर दें ताकि योजना पर काम हो सके।