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भुगतान के चार साल बाद भी नहीं लगा फायर फाइटिंग सिस्टम
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48 लाख रुपये धुआं हुए, चार साल में नहीं लगे आग बुझाने के उपकरण
गाजियाबाद। जिले की चार सीएचसी मोदीनगर, मुरादनगर, रजापुर और लोनी पर चार साल से फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है। 48 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। फिर भी आग बुझाने के उपकरण अभी नहीं लगे हैं। काम 40 फीसदी ही हुआ है। फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए 2018 में 96 लाख रुपये मंजूर किए गए थे।
फायर विभाग ने सीएमओ को जून 2021 में एक रिपोर्ट भेजी थी। उसमें कहा था कि 14 सरकारी अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम अपग्रेड नहीं है। आगजनी होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। संयुक्त अस्पताल प्रबंधन ने अपर निदेशक विद्युत को मई और जून 2021 में पत्र लिखकर फायर फाइटिंग सिस्टम को अपग्रेड कराने की मांग की थी, इसके साथ ही शासन को पत्र लिखा था। अभी तक उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एनआरएचएम प्रभारी डॉ. विश्राम सिंह का कहना है कि सीएचसी पर चार साल पहले फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए शासन स्तर से 48 लाख रुपये जारी हुए थे, लेकिन सिर्फ 40 फीसदी ही काम हो पाया। इसके बारे में कई बार शासन को अवगत कराया जा चुका है।
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एमएमजी अस्पताल में दिया आग बुझाने का प्रशिक्षण
एमएमजी अस्पताल में अग्नि शमन अधिकारी कमलेश मिश्रा ने विभाग की टीम के साथ अस्पताल में स्टाफ को आग लगने पर काबू पाने और झुलसे लोगों को बचाने की जानकारी और प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि विद्युत उपकरणों में आग लगने पर बुझाने से पहले पावर कट करना चाहिए। स्टाफ को फायर एक्सटिंग्युशर चलाने का प्रशिक्षण भी दिया गया। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि अस्पताल के सभी वार्ड और ओपीडी में फायर एक्सटिंग्युशर लगे हुए हैं। जगह-जगह फायर सेंसर भी लगवाए गए हैं। अगर कभी किसी तरह से आग लगने की घटना होती है तो अस्पताल में अलार्म बजने लगेगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल की इमारत काफी पुरानी है और इसे तोड़कर दोबारा से मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाई जानी है, इसलिए यहां पर सेंट्रलाइज्ड फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं लगाया जा सकता। विद्युत सुरक्षा के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
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गाजियाबाद। जिले की चार सीएचसी मोदीनगर, मुरादनगर, रजापुर और लोनी पर चार साल से फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है। 48 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। फिर भी आग बुझाने के उपकरण अभी नहीं लगे हैं। काम 40 फीसदी ही हुआ है। फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए 2018 में 96 लाख रुपये मंजूर किए गए थे।
फायर विभाग ने सीएमओ को जून 2021 में एक रिपोर्ट भेजी थी। उसमें कहा था कि 14 सरकारी अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम अपग्रेड नहीं है। आगजनी होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। संयुक्त अस्पताल प्रबंधन ने अपर निदेशक विद्युत को मई और जून 2021 में पत्र लिखकर फायर फाइटिंग सिस्टम को अपग्रेड कराने की मांग की थी, इसके साथ ही शासन को पत्र लिखा था। अभी तक उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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एनआरएचएम प्रभारी डॉ. विश्राम सिंह का कहना है कि सीएचसी पर चार साल पहले फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए शासन स्तर से 48 लाख रुपये जारी हुए थे, लेकिन सिर्फ 40 फीसदी ही काम हो पाया। इसके बारे में कई बार शासन को अवगत कराया जा चुका है।
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एमएमजी अस्पताल में दिया आग बुझाने का प्रशिक्षण
एमएमजी अस्पताल में अग्नि शमन अधिकारी कमलेश मिश्रा ने विभाग की टीम के साथ अस्पताल में स्टाफ को आग लगने पर काबू पाने और झुलसे लोगों को बचाने की जानकारी और प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि विद्युत उपकरणों में आग लगने पर बुझाने से पहले पावर कट करना चाहिए। स्टाफ को फायर एक्सटिंग्युशर चलाने का प्रशिक्षण भी दिया गया। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि अस्पताल के सभी वार्ड और ओपीडी में फायर एक्सटिंग्युशर लगे हुए हैं। जगह-जगह फायर सेंसर भी लगवाए गए हैं। अगर कभी किसी तरह से आग लगने की घटना होती है तो अस्पताल में अलार्म बजने लगेगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल की इमारत काफी पुरानी है और इसे तोड़कर दोबारा से मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाई जानी है, इसलिए यहां पर सेंट्रलाइज्ड फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं लगाया जा सकता। विद्युत सुरक्षा के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है।