{"_id":"621533e7dbd3dc3ca626f2f3","slug":"ghaziyabad-ghaziabad-news-gbd234456325","type":"story","status":"publish","title_hn":"कड़नाथ मुर्गियों के अंडे पालन करेंगी महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कड़नाथ मुर्गियों के अंडे पालन करेंगी महिलाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कड़कनाथ मुर्गी पाल कर कड़की दूर करेंगी महिलाएं
गाजियाबाद। पशुपालन विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के समन्वय से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अब कड़कनाथ मुर्गियों का पालन कर अंडे बेचने का काम शुरू कर दिया है। सबसे पहले डासना के उजाला समूह की राजकुमारी और एक कृष्णा समूह की विमल पान ने 100 मुर्गियों का पालन से काम शुरू किया है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एनआरएलएम (नेशनल रूरल लाइवलिहुड मिशन) की तरफ से कई प्रयास किए जा रहे हैं। मशरूम की खेती, सिलाई, सैनिटरी पैड मेकिंग, डिटर्जेंट बनाना, मास्क, सैनजाइटजर, कपड़े जैसे उत्पाद तैयार करने से लेकर विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। अभी एक समूह से शुरूआत हुई है। अन्य समूहों की महिलाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा। इसके तहत जो महिलाएं मुर्गी पालना चाहती हैं, वह मुर्गी पालेंगी या फिर जो पशुपालक कड़कनाथ मुर्गे-मुर्गियां पालते हैं, उनसे अंडे लिए जाएंगे और इन अंडों को बेचने की जो इच्छुक हैं, उनको दिया जाएगा। राजकुमारी और विमल पान ने बताया कि इससे पहले आर्गेनिक राखियां बनाने का कार्य किया था जो सफल रहा था। बीच-बीच में अन्य और कार्य भी किए हैं। हमारे पास जमीन थी और मुर्गी पालन का अनुभव भी था इसलिए इसको शुरु किया है।
बाजार में 30-50 रुपये में बिकता है अंडा
विशेषज्ञों का कहना है कि एक कड़कनाथ मुर्गी वर्ष में लगभग 120 अंडे देती हैं। इसके अंडे हल्के पीले रंग के होते हैं। यह बाजार में 30 रुपये से 50 रुपये तक बिकता है। परियोजना अधिकारी पीएन दीक्षित ने बताया कि मुर्गीपालकों से यह अंडे वाजिब दामों में महिलाओं को दिया जाएगा, जिसको बेचकर महिलाएं उसका लाभ रखेंगी। इसके लिए चारो ब्लॉक से आवेदन मांगे गए थे, जिसमें से एक समूह ने शुरूआत की है।
विज्ञापन
मध्यप्रदेश की इन मुर्गियों के अंडे में काफी पौष्टिकता होती है। बाजारों में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत इसकी शुरूआत की गई है।
- अस्मिता लाल, सीडीओ
विज्ञापन
गाजियाबाद। पशुपालन विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के समन्वय से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अब कड़कनाथ मुर्गियों का पालन कर अंडे बेचने का काम शुरू कर दिया है। सबसे पहले डासना के उजाला समूह की राजकुमारी और एक कृष्णा समूह की विमल पान ने 100 मुर्गियों का पालन से काम शुरू किया है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एनआरएलएम (नेशनल रूरल लाइवलिहुड मिशन) की तरफ से कई प्रयास किए जा रहे हैं। मशरूम की खेती, सिलाई, सैनिटरी पैड मेकिंग, डिटर्जेंट बनाना, मास्क, सैनजाइटजर, कपड़े जैसे उत्पाद तैयार करने से लेकर विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। अभी एक समूह से शुरूआत हुई है। अन्य समूहों की महिलाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा। इसके तहत जो महिलाएं मुर्गी पालना चाहती हैं, वह मुर्गी पालेंगी या फिर जो पशुपालक कड़कनाथ मुर्गे-मुर्गियां पालते हैं, उनसे अंडे लिए जाएंगे और इन अंडों को बेचने की जो इच्छुक हैं, उनको दिया जाएगा। राजकुमारी और विमल पान ने बताया कि इससे पहले आर्गेनिक राखियां बनाने का कार्य किया था जो सफल रहा था। बीच-बीच में अन्य और कार्य भी किए हैं। हमारे पास जमीन थी और मुर्गी पालन का अनुभव भी था इसलिए इसको शुरु किया है।
विज्ञापन
बाजार में 30-50 रुपये में बिकता है अंडा
विशेषज्ञों का कहना है कि एक कड़कनाथ मुर्गी वर्ष में लगभग 120 अंडे देती हैं। इसके अंडे हल्के पीले रंग के होते हैं। यह बाजार में 30 रुपये से 50 रुपये तक बिकता है। परियोजना अधिकारी पीएन दीक्षित ने बताया कि मुर्गीपालकों से यह अंडे वाजिब दामों में महिलाओं को दिया जाएगा, जिसको बेचकर महिलाएं उसका लाभ रखेंगी। इसके लिए चारो ब्लॉक से आवेदन मांगे गए थे, जिसमें से एक समूह ने शुरूआत की है।
विज्ञापन
मध्यप्रदेश की इन मुर्गियों के अंडे में काफी पौष्टिकता होती है। बाजारों में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत इसकी शुरूआत की गई है।
- अस्मिता लाल, सीडीओ