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डीएम के निर्देश के बाद पटल से हटाए गए एसीएमओ और बाबू
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डीएम के निर्देश के बाद पटल से हटाए गए एसीएमओ और बाबू
गाजियाबाद। नर्सिंग होम के पंजीकरण और अल्ट्रासाउंड केंद्र के नवीनीकरण में अनुचित लाभ (रिश्वत) लेने की शिकायत के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एसीएमओ और विभाग के बाबू को पटल से हटा दिया गया है। इस मामले में सीएमओ ने दो सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच शुरू कराई है। कमेटी को दस दिन में अपनी रिपोर्ट सीएमओ को देनी होगी। हालांकि जांच कमेटी पर सवाल खड़े हो गए हैं। सीएमओ ने कमेटी में जिन सदस्यों को रखा है वो एसीएमओ रैंक के अधिकारी हैं। जबकि पद से हटाए गए डॉ. विश्राम सिंह स्वयं एसीएमओ हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि समान पद पर तैनात अधिकारी जांच कैसे कर सकते हैं। नियम के तहत जांच सीएमओ की तरफ से ही की जानी थी। या फिर अन्य किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाती।
जिलाधिकारी की कार्रवाई के बाद शुक्रवार को पूरे दिन स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा। सीएमओ ने डीएम के निर्देशानुसार बाबू आलोक कुमार और एसीएमओ डा. विश्राम सिंह पर कार्रवाई की। इसको लेकर सीएमओ ने वरिष्ठ चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की और कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कराने के लिए कहा। सूत्रों के मुताबिक कमेटी में एसीएमओ डा. संजय अग्रवाल और जिला क्षय रोग अधिकारी डा. जेपी श्रीवास्तव शामिल हैं, जो इस पूरे मामले में की गई शिकायतों की जांच करेंगे। बता दें कि बृहस्पतिवार शाम को जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने सीएमओ को स्वास्थ्य विभाग के बाबू और एसीएमओ पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। सीएमओ डा. एनके गुप्ता ने बताया कि कमेटी से दस दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट को जिला प्रशासन और शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो पत्रावलियां डीएम ने तलब की हैं, जांच कमेटी से उनको लेने के लिए कहा गया है।
सरकारी अस्पतालों पर भी जांच की आंच
वसूली के मामले में सरकारी अस्पतालों पर भी जांच चल रही है। इनमें जिला एमएमजी अस्पताल में ऑपरेशन में कमीशनखोरी, स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण के बाद इलाज में लापरवाही जैसी शिकायतों की भी जांच की जा रही हैं। ऑपरेशन में कमीशन की शिकायत पीएमओ तक की गई है। जबकि इलाज में लापरवाही को लेकर जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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फर्जी घोटाले पर भी लटकी तलवार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बागपत में भर्ती की गईं स्टाफ नर्स को बाहर निकाले जाने के बाद फर्जी ऑफर लैटर से नौकरी दिए जाने की तलवार भी स्वास्थ्य विभाग पर लटकी है। सीएमओ डा. एनके गुप्ता ने बताया कि जिले में फिलहाल कोई नियुक्ति नहीं की गई है। बागपत में जो नियुक्ति हुईं, उनमें एक महिला गाजियाबाद के पतला की है। इस मामले में भी जांच कराई जा रही है। महिला से गाजियाबाद की भूमिका को लेकर भी जानकारी ली जाएगी। इसके लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
स्वयं मुखिया भी सवालों के घेरे में...
पंजीकरण के नाम पर वसूली का खेल इतना आसान नहीं है। इस पूरे प्रकरण पर स्वास्थ्य विभाग के मुखिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैै। 28 जनवरी को तत्कालीन जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने अनियमितता की शिकायतों पर डॉ. विश्राम सिंह और बाबू को पंजीकरण व नवीनीकरण के पटल से हटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद दोनों को हटाया भी गया, लेकिन रितु माहेश्वरी का स्थानांतरण होते ही दोनों की ताजपोशी मुखिया के हस्ताक्षर के बाद फिर से कर दी गई।
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गाजियाबाद। नर्सिंग होम के पंजीकरण और अल्ट्रासाउंड केंद्र के नवीनीकरण में अनुचित लाभ (रिश्वत) लेने की शिकायत के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एसीएमओ और विभाग के बाबू को पटल से हटा दिया गया है। इस मामले में सीएमओ ने दो सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच शुरू कराई है। कमेटी को दस दिन में अपनी रिपोर्ट सीएमओ को देनी होगी। हालांकि जांच कमेटी पर सवाल खड़े हो गए हैं। सीएमओ ने कमेटी में जिन सदस्यों को रखा है वो एसीएमओ रैंक के अधिकारी हैं। जबकि पद से हटाए गए डॉ. विश्राम सिंह स्वयं एसीएमओ हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि समान पद पर तैनात अधिकारी जांच कैसे कर सकते हैं। नियम के तहत जांच सीएमओ की तरफ से ही की जानी थी। या फिर अन्य किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाती।
जिलाधिकारी की कार्रवाई के बाद शुक्रवार को पूरे दिन स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा। सीएमओ ने डीएम के निर्देशानुसार बाबू आलोक कुमार और एसीएमओ डा. विश्राम सिंह पर कार्रवाई की। इसको लेकर सीएमओ ने वरिष्ठ चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की और कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कराने के लिए कहा। सूत्रों के मुताबिक कमेटी में एसीएमओ डा. संजय अग्रवाल और जिला क्षय रोग अधिकारी डा. जेपी श्रीवास्तव शामिल हैं, जो इस पूरे मामले में की गई शिकायतों की जांच करेंगे। बता दें कि बृहस्पतिवार शाम को जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने सीएमओ को स्वास्थ्य विभाग के बाबू और एसीएमओ पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। सीएमओ डा. एनके गुप्ता ने बताया कि कमेटी से दस दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट को जिला प्रशासन और शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो पत्रावलियां डीएम ने तलब की हैं, जांच कमेटी से उनको लेने के लिए कहा गया है।
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सरकारी अस्पतालों पर भी जांच की आंच
वसूली के मामले में सरकारी अस्पतालों पर भी जांच चल रही है। इनमें जिला एमएमजी अस्पताल में ऑपरेशन में कमीशनखोरी, स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण के बाद इलाज में लापरवाही जैसी शिकायतों की भी जांच की जा रही हैं। ऑपरेशन में कमीशन की शिकायत पीएमओ तक की गई है। जबकि इलाज में लापरवाही को लेकर जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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फर्जी घोटाले पर भी लटकी तलवार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बागपत में भर्ती की गईं स्टाफ नर्स को बाहर निकाले जाने के बाद फर्जी ऑफर लैटर से नौकरी दिए जाने की तलवार भी स्वास्थ्य विभाग पर लटकी है। सीएमओ डा. एनके गुप्ता ने बताया कि जिले में फिलहाल कोई नियुक्ति नहीं की गई है। बागपत में जो नियुक्ति हुईं, उनमें एक महिला गाजियाबाद के पतला की है। इस मामले में भी जांच कराई जा रही है। महिला से गाजियाबाद की भूमिका को लेकर भी जानकारी ली जाएगी। इसके लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
स्वयं मुखिया भी सवालों के घेरे में...
पंजीकरण के नाम पर वसूली का खेल इतना आसान नहीं है। इस पूरे प्रकरण पर स्वास्थ्य विभाग के मुखिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैै। 28 जनवरी को तत्कालीन जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने अनियमितता की शिकायतों पर डॉ. विश्राम सिंह और बाबू को पंजीकरण व नवीनीकरण के पटल से हटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद दोनों को हटाया भी गया, लेकिन रितु माहेश्वरी का स्थानांतरण होते ही दोनों की ताजपोशी मुखिया के हस्ताक्षर के बाद फिर से कर दी गई।