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अब सिर्फ बाजारों-सार्वजनिक स्थानों पर लगेंगे कूड़ेदान
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नया गंज में टूटी पड़ी डस्टबिन।
- फोटो : GHAZIABAD City
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अब सिर्फ बाजारों-सार्वजनिक स्थानों पर लगेंगे कूड़ेदान
गाजियाबाद। शहर की कॉलोनियां अब डस्टबिन फ्री होंगी। नगर निगम अब घरों से कचरे का कलेक्शन कर सीधे प्रोसेस प्लांट तक पहुंचाएगा। कॉलोनियों में डस्टबिन की जरूरत ही नहीं होगी। बाजारों और रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर प्रत्येक 50 से 100 मीटर की दूरी पर डस्टबिन लगाए जाएंगे। वहीं दुकानदारों के लिए भी डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा।
दरअसल, स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में केंद्र सरकार ने इस बार नए मानकों को शामिल किया है। गाजियाबाद को गारबेज फ्री सिटी बनाने के लिए पहले चरण में कूड़ा घरों को विलोपित किया गया था। निगम ने कवर्ड ट्रांसफर स्टेशन में आधुनिक मशीनों के जरिए इस कचरे को कंप्रेस कर सेनिटरी लैंडफिल साइट तक या फिर वेस्ट प्रोसेस प्लांट तक इसे पहुंचाने का काम शुरू किया। अब कॉलोनियों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाले वाहनों की संख्या बढ़ा दी गई है। मानकों के मुताबिक अब कॉलोनियों को न केवल गारबेज फ्री, बल्कि डस्टबिन फ्री भी बनाना है। सरकार की मंशा है कि कूड़ा घरों से निकलकर सीधे प्लांट तक पहुंचे, इसे बीच में डस्टबिन या किसी ढलाबघर पर न डाला जाए।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार का कहना है कि डस्टबिन अब सिर्फ बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालयों समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे। स्वच्छ सर्वेक्षण के नए मानकों के मुताबिक बाजारों में प्रत्येक 50 मीटर से 100 मीटर पर एक डस्टबिन होना अनिवार्य है। इनकी प्रतिदिन सफाई कराया जाना भी जरूरी है। इन मानकों को पूरा करने के लिए काम शुरू कर दिया गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण के नए मानकों के अनुसार बाजारों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर डस्टबिन लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कॉलोनियों में जो डस्टबिन हैं उन्हें हटाया जाएगा। सफाई व्यवस्था को मानकों के मुताबिक कराया जा रहा है।
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गाजियाबाद। शहर की कॉलोनियां अब डस्टबिन फ्री होंगी। नगर निगम अब घरों से कचरे का कलेक्शन कर सीधे प्रोसेस प्लांट तक पहुंचाएगा। कॉलोनियों में डस्टबिन की जरूरत ही नहीं होगी। बाजारों और रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर प्रत्येक 50 से 100 मीटर की दूरी पर डस्टबिन लगाए जाएंगे। वहीं दुकानदारों के लिए भी डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा।
दरअसल, स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में केंद्र सरकार ने इस बार नए मानकों को शामिल किया है। गाजियाबाद को गारबेज फ्री सिटी बनाने के लिए पहले चरण में कूड़ा घरों को विलोपित किया गया था। निगम ने कवर्ड ट्रांसफर स्टेशन में आधुनिक मशीनों के जरिए इस कचरे को कंप्रेस कर सेनिटरी लैंडफिल साइट तक या फिर वेस्ट प्रोसेस प्लांट तक इसे पहुंचाने का काम शुरू किया। अब कॉलोनियों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाले वाहनों की संख्या बढ़ा दी गई है। मानकों के मुताबिक अब कॉलोनियों को न केवल गारबेज फ्री, बल्कि डस्टबिन फ्री भी बनाना है। सरकार की मंशा है कि कूड़ा घरों से निकलकर सीधे प्लांट तक पहुंचे, इसे बीच में डस्टबिन या किसी ढलाबघर पर न डाला जाए।
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नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार का कहना है कि डस्टबिन अब सिर्फ बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालयों समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे। स्वच्छ सर्वेक्षण के नए मानकों के मुताबिक बाजारों में प्रत्येक 50 मीटर से 100 मीटर पर एक डस्टबिन होना अनिवार्य है। इनकी प्रतिदिन सफाई कराया जाना भी जरूरी है। इन मानकों को पूरा करने के लिए काम शुरू कर दिया गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण के नए मानकों के अनुसार बाजारों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर डस्टबिन लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कॉलोनियों में जो डस्टबिन हैं उन्हें हटाया जाएगा। सफाई व्यवस्था को मानकों के मुताबिक कराया जा रहा है।
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