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दिल दहलाने वाला मंजर, हिल तक न सके मरने वाले 23 लोग
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दिल दहलाने वाला मंजर, हिल तक न सके मरने वाले 23 लोग
गाजियाबाद। मुरादनगर बंबा रोड के श्मशान घाट पर रविवार सुबह करीब 11.30 बजे का मंजर दिल दहला देने वाला था। फल विक्रेता जयराम के अंतिम संस्कार के बाद दो मिनट का मौन रखने के लिए एकत्र हुए 60 लोगों के ऊपर छत गिरने से चीख पुकार मच गई। अचानक हादसे से मृतक 23 लोगों में से अधिकांश को हिलना तो दूर सिसकी लेने तक का वक्त नहीं मिला। घायलों की चीख पुकार और मौके पर ही दम तोड़ चुके लोगों की हालत देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए।
चीखपुकार मची तो आसपास के लोग बचाव के लिए दौड़ पड़े। बगैर किसी औजार के ही लोग मलबे के नीचे दबे लोगों को बचाने में जुट गए। स्थानीय निवासियों ने छह घायलों को बाहर निकाल लिया। लेकिन उसके बाद का नजारा दिल दहलाने वाला था। मलबा हटते ही उसके नीचे दबे लोगों के शव व घायलों के लहुलुहान शरीर देख चीख-पुकार तेज हो गई। घटना की सूचना पर आधा घंटे के अंदर पुलिस के साथ प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। तब तक स्थानीय लोग मलबे से करीब 12 लोगों को बाहर निकाल चुके थे। मलबे के नीचे दबे कई लोगों के हाथ और शरीर का का हिस्सा दिख रहा था। जेसीबी की मदद से गिरे मलबे को हटाकर सबसे पहले ऐसे लोगों को बाहर निकाला गया जो दिखाई दे रहे थे। करीब 12 बजे डीएम अजय शंकर पांडेय और एसएसपी कलानिधि नैथानी ने राहत-बचाव अभियान की कमान संभाली। स्थानीय लोगों के साथ पुलिस, अग्निशमन विभाग की टीम ने जेसीबी व अन्य बड़े उपकरणों की मदद से एक-एक कर लोगों को मलबे से बाहर निकाला। प्रशासन की ओर से करीब साढ़े बाहर बजे के करीब एनडीआरएफ की टीम को हादसे की सूचना दी गई। लेकिन दोपहर एक बजे एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने से पहले 16 शवों को स्थानीय लोगों ने बाहर निकाल लिया। एनडीआरएफ की टीम ने पहुंचते ही राहत-बचाव ऑपरेशन की कमान संभाली।
हड़बड़ी में मलबे के ऊपर खड़े थे लोग
परिचित की अंत्येष्टि में शामिल होने आए मुरादनगर के विभिन्न कालोनियों के 23 लोगों की जान भ्रष्ट तंत्र ने लील ली। हादसे के बाद सबसे पहले आसपास के लोगों ने राहत-बचाव अभियान शुरू किया। हादसे का मंजर इतना भयावह था कि लोगों को बचाने आए तमाम लोग हड़बड़ी में मलबे के ऊपर ही खड़े हो गए। फिर पुलिस-प्रशासन के पहुंचने के बाद उन्हेें घटना स्थल से हटाकर बचाव अभियान तेज किया गया।
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गाजियाबाद। मुरादनगर बंबा रोड के श्मशान घाट पर रविवार सुबह करीब 11.30 बजे का मंजर दिल दहला देने वाला था। फल विक्रेता जयराम के अंतिम संस्कार के बाद दो मिनट का मौन रखने के लिए एकत्र हुए 60 लोगों के ऊपर छत गिरने से चीख पुकार मच गई। अचानक हादसे से मृतक 23 लोगों में से अधिकांश को हिलना तो दूर सिसकी लेने तक का वक्त नहीं मिला। घायलों की चीख पुकार और मौके पर ही दम तोड़ चुके लोगों की हालत देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए।
चीखपुकार मची तो आसपास के लोग बचाव के लिए दौड़ पड़े। बगैर किसी औजार के ही लोग मलबे के नीचे दबे लोगों को बचाने में जुट गए। स्थानीय निवासियों ने छह घायलों को बाहर निकाल लिया। लेकिन उसके बाद का नजारा दिल दहलाने वाला था। मलबा हटते ही उसके नीचे दबे लोगों के शव व घायलों के लहुलुहान शरीर देख चीख-पुकार तेज हो गई। घटना की सूचना पर आधा घंटे के अंदर पुलिस के साथ प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। तब तक स्थानीय लोग मलबे से करीब 12 लोगों को बाहर निकाल चुके थे। मलबे के नीचे दबे कई लोगों के हाथ और शरीर का का हिस्सा दिख रहा था। जेसीबी की मदद से गिरे मलबे को हटाकर सबसे पहले ऐसे लोगों को बाहर निकाला गया जो दिखाई दे रहे थे। करीब 12 बजे डीएम अजय शंकर पांडेय और एसएसपी कलानिधि नैथानी ने राहत-बचाव अभियान की कमान संभाली। स्थानीय लोगों के साथ पुलिस, अग्निशमन विभाग की टीम ने जेसीबी व अन्य बड़े उपकरणों की मदद से एक-एक कर लोगों को मलबे से बाहर निकाला। प्रशासन की ओर से करीब साढ़े बाहर बजे के करीब एनडीआरएफ की टीम को हादसे की सूचना दी गई। लेकिन दोपहर एक बजे एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने से पहले 16 शवों को स्थानीय लोगों ने बाहर निकाल लिया। एनडीआरएफ की टीम ने पहुंचते ही राहत-बचाव ऑपरेशन की कमान संभाली।
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हड़बड़ी में मलबे के ऊपर खड़े थे लोग
परिचित की अंत्येष्टि में शामिल होने आए मुरादनगर के विभिन्न कालोनियों के 23 लोगों की जान भ्रष्ट तंत्र ने लील ली। हादसे के बाद सबसे पहले आसपास के लोगों ने राहत-बचाव अभियान शुरू किया। हादसे का मंजर इतना भयावह था कि लोगों को बचाने आए तमाम लोग हड़बड़ी में मलबे के ऊपर ही खड़े हो गए। फिर पुलिस-प्रशासन के पहुंचने के बाद उन्हेें घटना स्थल से हटाकर बचाव अभियान तेज किया गया।
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