पहले दवा, अब वैक्सीन के नाम पर ठगी, कोरोना काल में बदला ट्रेंड
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बेशक कोरोना काल में अपराध कम हुआ हो, लेकिन घर बैठे लोगों को जालसाजों ने नुकसान पहुंचाया। उन्होंने लोगों को ठगी के विभिन्न माध्यमों से ठगा। कोरोनाकाल में जैसे-जैसे हालात बदलते रहे, साइबर जालसाजों का ट्रेंड भी बदलता रहा। लॉकडाउन में जहां यात्रा पास के आवेदन के नाम पर ठगे गए, वहीं लॉकडाउन में ही जरूरत के सामान की डिलीवरी के नाम पर लोगों को शिकार बनाया। अब जालसाजों ने कोरोना वैक्सीन के नाम पर ठगना शुरू कर दिया है। यही वजह है साइबर ठगी के मामले बीते कई सालों की तुलना में इस साल कई गुना बढ़ गए हैं।
साइबर सेल के मुताबिक, इस साल साइबर ठगी के 36 00 से अधिक मामले सामने आए हैं। इनमें से अधिकांश मामले कोरोना काल के हैं। किसी ने आपदा को अवसर में बदला हो या न बदला हो, लेकिन जालसाजों ने इस अवसर को पूरी तरीके से भुनाया। सरकारी आंकड़ा बताता है कि जालसाजों ने कोरोना काल में खूब चांदी काटी। अप्रैल में 107, मई में 126, जुलाई में 115, अगस्त में 98, सितंबर में 71, अक्तूबर में 131 और नवंबर में 51 मामले साइबर ठगी के सामने आए। जिसमें साइबर जालसाजों ने लोगों के खातों से करीब सात करोड़ से अधिक की रकम साफ कर दी। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई कर 35 लाख से अधिक की रकम लोगों को वापस भी कराई गई।
केस एक
गत अप्रैल में हरदोई निवासी संतोष के परिवार में पिता की मौत हो गई थी। आवागमन बंद होने के कारण उन्हें पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हरदोई जाने में दिक्कत आ रही थी। उन्होंने इंटरनेट पर ट्रेवल एजेंसी से संपर्क किया तो उसने पास बनवाकर हरदोई पहुंचाने का दावा किया। किराए के तौर पर 12 हजार रुपये तथा पास के लिए अतिरिक्त तीन हजार रुपये की मांग की। पास की रकम एडवांस खाते में जमा करा ली गई, लेकिन उक्त खाता और ट्रेवल एजेंसी फर्जी निकले। बाद में उक्त मोबाइल नंबर भी बंद हो गया।
केस दो
बनारस निवासी सौरभ प्रताप सिंह के पिता राणा प्रताप सिंह कैंसर से पीड़ित हैं। उनका हिमाचल से आयुर्वेदिक इलाज चल रहा है। मार्च में उनके पिता हिमाचल दवा लेने जा रहे थे, लेकिन लॉककाउन लगने पर गाजियाबाद में फंस गए। दवाई की सख्त जरूरत थी, लिहाजा उन्होंने इंटरनेट पर सामान की ऑनलाइन डिलीवरी करने वाली कंपनी सर्च की। नंबर पर कॉल करने पर साढ़े नौ हजार रुपये खाते में डलवाए गए, लेकिन उक्त खाता और मोबाइल नंबर साइबर जालसाजों का निकला।
केस तीन
विजयनगर थानाक्षेत्र स्थित क्रांसिंग रिपब्लिक की सुपरटेक लिविंग्सटन सोसायटी में रहने वाले अर्जुन वर्मा के पास करीब एक सप्ताह पहले अनजान नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को स्वास्थ्य मंत्रालय दिल्ली का प्रतिनिधि बताकर कोरोना के संबंध में बात करने को कहा। कॉलर ने कहा कि जनवरी से कोरोना का टीका लगना शुरू हो जाएगा। सरकार द्वारा पात्र लोगों का पंजीकरण किया जा रहा है। पंजीकरण करने के लिए उनके पास एक लिंक भेजा गया, जिसे क्लिक करते ही खाते से छह हजार रुपये कट गए। अर्जुन वर्मा ने विजयनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
लॉकडाउन में भी डेढ़ करोड़ हड़प गए जालसाज
25 मार्च से 31 मई तक लगे लॉकडाउन में साइबर ठगों ने 310 लोगों को अपना शिकार बनाते हुए उन्हें डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई। लोग शिकायत करने पुलिस के पास भी नहीं जा सके। अधिकांश मामलों में अनलॉक-वन होने पर ही शिकायत दर्ज हुई। लॉकडाउन के बाद भी साइबर ठगी का ग्राफ बढ़ता गया। लॉकडाउन से पहले हर माह बैंकिंग फ्रॉड के मामले 60 से 80 के बीच आते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद यह मामले 100 से लेकर 150 तक का आंकड़ा पार गए।
माहौल और लोगों की डिमांड का फायदा उठाते हैं जालसाज : एक्सपर्ट
साइबर ठग माहौल और लोगों की डिमांड के हिसाब से ठगी का ट्रेंड बदलते रहते हैं। कोरोना काल में भी ऐसा देखने को मिला। समय के हिसाब से साइबर ठगों ने लोगों को झांसे में लेकर उन्हें चूना लगाया। वर्तमान में कोरोना वैक्सीन के पंजीकरण के नाम पर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। किसी भी विभाग द्वारा कोई सुविधा ऑन कॉल नहीं दी जाती। अगर किसी के पास ऐसी कोई कॉल आ रही है तो उसे संबंधित विभाग से तस्दीक जरूर कर लें या फिर विभाग की अधिकृत वेबसाइट पर जाकर जानकारी हासिल कर लें। किसी भी अनजान लिंक को क्लिक न करें। ऐसा करने पर खाता खाली हो सकता है।
कर्मवीर सिंह, साइबर एक्सपर्ट, मेरठ जोन पुलिस
फर्जी वेबसाइट बनाकर कोरोना वैक्सीन की सप्लाई के नाम पर साइबर ठगी का ट्रेंड चल रहा। लोगों से पंजीकरण कराने और वैक्सीन मुहैया कराने का झांसा देकर लिंक भेजे जा रहे हैं या खातों में रकम मंगाई जा रही है। ऐसा कोई प्रावधान फिलहाल नहीं है। लिहाजा लोग झांसे में न आएं। किसी भी एप्लीकेशन को बेवजह डाउनलोड न करें। फेंक न्यूज से बचें, क्योंकि ठग पहले वैक्सीन के संबंध में फर्जी न्यूज वायरल कराते हैं। साथ ही किसी अनावश्यक लिंक को क्लिक न करें।
कामाक्षी शर्मा, साइबर इन्वेस्टीगेशन एक्सपर्ट