अमर उजाला समृद्घि संवाद कार्यक्रम: त्योहारों पर टूटेगी बाजारों की सुस्ती, उठेगा कारोबार
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अमर उजाला समृद्घि संवाद कार्यक्रम शनिवार को आयोजित किया गया। दो सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में अलग-अलग ट्रेड से उद्यमी और व्यापारी शामिल हुए। समृद्घि संवाद का उद्देश्य मौजूदा समय में बाजार की स्थिति पर चर्चा करना था। इस दौरान उद्यमियों और व्यापारियों ने अपने विचार प्रकट किए और त्योहारों तक बाजार की सुस्ती टूटने की उम्मीद जताई।
इसके अलावा कार्यक्रम में अर्थशास्त्रियाें ने देश की अर्थव्यवस्था और कारोबार को लेकर सकारात्मक उपाय रखे। बैंक से आए अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया किस तरह व्यापार और उद्यम को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा उद्यमियों और व्यापारियों ने अपनी समस्याओं को भी संवाद कार्यक्रम के जरिए रखा और महंगी बिजली की दरें, जीएसटी में संशोधन सहित अन्य दिक्कतों को गिनाया। मौजूदा हालात पर कार्यक्रम में कुछ इस तरह से अतिथियों ने अपनी राय दी।
ऑटो इंडस्ट्री को उबरने में लगेगा समय
ऑटो इंडस्ट्री फिलहाल ढलान के दौर से गुजर रही है, लेकिन यह स्थायी नहीं है। बीएस-4 गाड़ियों का स्टॉक है और बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों की कवायद के बीच इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। सरकार ने राहत भी दी है, इससे छह महीने या साल भर में इंडस्ट्री फिर से उठेगी- नंदलाल शर्मा, उद्यमी
उद्योग-व्यापार के हिसाब से बनें नीतियां
बाजारों को, उद्योगों को देश में मजबूत करने के लिए मुताबिक नीतियां और योजनाएं तैयार की जाएं। सरकार का सहयोग साथ होना बेहद जरूरी है- अतुल सक्सेना, व्यापारी
खर्चे कम कर चल रहा है काम
फिलहाल बाजारों से ग्राहक गायब हैं। ऐसे में अपने लाभ को भी व्यापारियों ने कम किया है, लेकिन उम्मीद है कि यह सिलसिला त्योहार शुरू होने पर टूटेगा- असगर, व्यापारी
समय के साथ जरूरी है बदलाव
वर्तमान समय में बाजार ग्राहकों का इंतजार देख रहे हैं। रिटेल में शिफ्टिंग का असर है। ई-कॉमर्स बढ़ रहा है जबकि बाजार पिछड़ रहे हैं। एजूकेशन में भी ऑनलाइन बड़ा प्लेटफार्म बन रहा है। समय के साथ हर सेक्टर को भी बदलाव लाना चाहिए- विख्यात सिंह, एकेडमी संचालक
रियल स्टेट को बूस्ट देने की जरूरत
रियल स्टेट की वजह से कई ट्रेड में काम खत्म है। रियल स्टेट को बूस्ट किए जाने की जरूरत है। उम्मीद है कि केंद्र और प्रदेश सरकार इसमें सहयोग करेंगी- शोभित बंसल, व्यापारी
छोटे उद्योगों को दिया जाए बढ़ावा
छोटे उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। इसमें बैंक भी स्पष्ट योजनाओं को लेकर सामने आएं। जिनमें औपचारिकताएं कम हों और उद्यमियों को इनका लाभ मिले- अमित जिंदल, उद्यमी
उद्योगों का मर्म समझते हुए बनें नीति
जो भी नीतियां या योजनाएं तैयार होती हैं, उनमें औद्योगिक क्षेत्रों से कोई अनुभवी व्यक्ति शामिल नहीं रहता, ऐसे में जो उद्योगों की जरूरतें हैं, उनका आभास भी नीति-निर्धारकों को नहीं है। उद्योगों को साथ लेकर नीतियां तैयार की जाएं- राजीव अरोड़ा, उद्यमी
एक साथ शुरू की गईं योजनाएं
उद्योगाें से संबंधित योजनाएं एक साथ शुरू की गईं, जिनका लाभ नहीं उद्योग नहीं उठा सके। इंडस्ट्री के लिए कोई भी योजना लाने से पहले उसमें उद्यमियों से रायशुमारी कराई जाए- अशोक गुलाटी, उद्यमी
ई-कॉमर्स पर लगे अंकुश
ई-कॉमर्स पर अंकुश लगाया जाना जरूरी है, नियमों की अनदेखी कर बाजारों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसको लेकर स्पष्ट नियम तय किए जाएं- तिलकराज अरोड़ा, उद्यमी
जीएसटी में राहत जरूरी
जीएसटी को लेकर रोज नए नियम बनते और संशोधित होते हैं। व्यापारियों और उद्यमियों को इसमें राहत की उम्मीद सरकार से है। जीएसटी काउंसिल जीएसटी को रिवाइज करेें- अरुण शर्मा, उद्यमी
सकारात्मक रूप से आगे बढ़ेंगे उद्योग
प्रतिस्पर्धा के दौर से भी बाजार गुजर रहे हैं। मंदी-तेजी व्यापार का हिस्सा हैं। ऐसे में उद्योगों को और बाजारों को सकारात्मक उपायों के साथ आगे बढ़ना चाहिए- पीयूष गर्ग, उद्यमी
बेहतर कर ग्राहकों को दें सेवाएं
आपके मुकाबले किसी ने अपने व्यापार को आगे जमाया तो मंदी जैसे शब्द ही दिखाई-सुनाई देते हैं। ग्राहकों को अगर बेहतर उत्पाद और सेवाएं दी जाएं तो हर मुश्किल आसान होगी- निशांत गर्ग, उद्यमी
एक राष्ट्र, एक नीति पर हो काम
एक राष्ट, एक नीति बनाकर आगे बढ़ना होगा अगर कोई योजना या नीति है तो सभी के लिए समान होनी चाहिए। छोटे उद्योगों को ध्यान में रखते हुए नीति तैयार की जाएं- रिचा सूद, स्कूल संचालिका
लघु उद्योगों को मिले लाभ
लघु उद्योगाें के लिए योजनाओं की कमी है। इसको लेकर काम होना चाहिए। कोयला, लोहा, तेल, बिजली सस्ती की जाएं। बाहरी देशों से इंपोर्ट भी कम किया जाए- एमएल अरोड़ा, उद्यमी
सभी संसाधनों का हो प्रयोग
उद्योग और बाजारों के लिए सरकार के सभी संसाधनों और योजनाओं का प्रयोग पारदर्शिता के साथ किया जाए। टैक्स स्लैब पर भी ध्यान देने की जरूरत है- एचएल मिगलानी, उद्यमी
चाहिए टैक्स पॉलिसी में बदलाव
टैक्स पॉलिसी में सरकार को बदलाव करना चाहिए। वन नेशन, वन टैक्स की धारणा को समझते हुए नीतियां तैयार की जाएं- अजय जैन, व्यापारी
हर सेक्टर एक-दूसरे से जुड़ा
उद्योग व्यापार में कई सेक्टर और ट्रेड एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। बड़े औद्योगिक क्षेत्र से जो प्रभावित हैं, उनमें राहत दी जाएं, जिससे बाजारों तक उसका असर कम हो सके- राजदेव त्यागी, व्यापारी
जीएसटी में सरलीकरण की जरूरत
जीएसटी में सरलीकरण की आवश्यकता है। चार्टर्ड एकाउंटेंट भी जीएसटी से संबंधित फार्म भरने में परेशान हो जाते हैं। ऐसे में जटिलताओं को ध्यान में रखकर सरलीकरण किया जाए- अशोक चावला, व्यापारी
विशेषज्ञों की राय :
राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में बदलाव का समय चल रहा है। ऐसे में आशावादी रहना जरूरी है। अपने सभी प्रयास पूरी एकजुटता से करें और देश की अर्थव्यवस्था को और भी मजबूत करने में सहयोग करें- डॉ. मीनू चौधरी, असिस्टेंट प्रोफेसर
नीति आयोग में पुराने अनुभवी लोगों को शामिल किया जाए। इसके बाद नीतियों को तैयार करने की जरूरत है, जिससे देश में बाजार और उद्योग मजबूती से आगे बढ़ें- एनके गर्ग, एचओडी
कॉमर्स डिपार्टमेंट, एसडी कॉलेज सहयोग के लिए तैयार बैंक
बैंक उद्योग और व्यापार के लिए लोन संबंधी योजनाओं के साथ सहयोग करती हैं। मुद्रा योजना सहित अन्य ऋण योजनाओं का लाभ उद्यमी या व्यापारी उठा सकते हैं- कुबेर दत्त, रीजनल मैनेजर एसबीआई बैंक
बैंक से प्रतिनिधि खुद औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर लोन ऑफर करते हैं। सरकार की योजनाओं को लेकर शिविर लगाकर लोगों को लाभ दिया जाता है। एसएलपी में ऑनलाइन आवेदन के बाद ऋण का लाभ लिया जा सकता है। जीएसटी नंबर से जरूरी वेरिफि केशन बैंक कर लेता है- एसएस जैन, एजीएम एसबीआई बैंक