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स्वर्णजयंतीपुरम भूखंड आवंटन घोटाले में मंडलायुक्त ने तलब की फाइल
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स्वर्णजयंतीपुरम भूखंड आवंटन घोटाले में मंडलायुक्त ने तलब की फाइल
गाजियाबाद। स्वर्णजयंतीपुरम भूखंड आवंटन घोटाले मामले में मंडलायुक्त ने जीडीए से फाइल तलब की है। शासन इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में 28 जुलाई को अपना पक्ष रखेगा। इसके पहले मंडलायुक्त ने जानकारी मांगी है। इस मामले में सुनवाई होने में शासन की तरफ से देरी किए जाने पर हाईकोर्ट ने शासन पर 25 हजार का जुर्माना लगा चुका है। जीडीए के एक अधिकारी ने बताया कि पूरी जानकारी पहले ही मंडलायुक्त और शासन को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
मुख्य शिकायतकर्ता भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल कर भूखंड आवंटन में घोटाले व राजस्व को 400 करोड़ से अधिक के नुकसान का मामला उठाया गया था। इसी मामले में हाईकोर्ट ने दोषियों पर एफआईआर व जांच के आदेश दिए थे। मामले की मुरादाबाद मंडलायुक्त की ओर से अधिकारियों कोे बचाने के लिए जांच को भूखंड आवंटन की जगह अवैध निर्माण की ओर मोड़ दिया गया। बीते दो साल से मामले में कोई प्रगति नहीं हुई थी। इसके बाद शासन की तरफ से पक्ष नहीं रखे जाने पर हाईकोर्ट ने 25 हजार का जुर्माना लगाया था।
दोबारा से कर रहे हैं मंडलायुक्त जांच
जीडीए ने 1998 से 2003 के बीच स्वर्णजयंतीपुरम आवासीय योजना के तहत 1583 भूखंडों की 10 से ज्यादा योजनाओं को लांच किया था। आवंटन के बाद निर्धारित राशि जमा न करने या फिर भूखंड सरेंडर करने के कारण कई लोगों के आवंटन निरस्त कर दिए गए। निरस्त हुए 139 भूखंडों को नियमों को ताक पर रखकर फरवरी 2005 से फरवरी 2007 के बीच फिर से आवंटित कर दिया गया।16 साल पहले हुए 400 करोड़ के भूखंड घोटाले की मंडलायुक्त नए सिरे से जांच कर रहे हैं।
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गाजियाबाद। स्वर्णजयंतीपुरम भूखंड आवंटन घोटाले मामले में मंडलायुक्त ने जीडीए से फाइल तलब की है। शासन इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में 28 जुलाई को अपना पक्ष रखेगा। इसके पहले मंडलायुक्त ने जानकारी मांगी है। इस मामले में सुनवाई होने में शासन की तरफ से देरी किए जाने पर हाईकोर्ट ने शासन पर 25 हजार का जुर्माना लगा चुका है। जीडीए के एक अधिकारी ने बताया कि पूरी जानकारी पहले ही मंडलायुक्त और शासन को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
मुख्य शिकायतकर्ता भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल कर भूखंड आवंटन में घोटाले व राजस्व को 400 करोड़ से अधिक के नुकसान का मामला उठाया गया था। इसी मामले में हाईकोर्ट ने दोषियों पर एफआईआर व जांच के आदेश दिए थे। मामले की मुरादाबाद मंडलायुक्त की ओर से अधिकारियों कोे बचाने के लिए जांच को भूखंड आवंटन की जगह अवैध निर्माण की ओर मोड़ दिया गया। बीते दो साल से मामले में कोई प्रगति नहीं हुई थी। इसके बाद शासन की तरफ से पक्ष नहीं रखे जाने पर हाईकोर्ट ने 25 हजार का जुर्माना लगाया था।
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दोबारा से कर रहे हैं मंडलायुक्त जांच
जीडीए ने 1998 से 2003 के बीच स्वर्णजयंतीपुरम आवासीय योजना के तहत 1583 भूखंडों की 10 से ज्यादा योजनाओं को लांच किया था। आवंटन के बाद निर्धारित राशि जमा न करने या फिर भूखंड सरेंडर करने के कारण कई लोगों के आवंटन निरस्त कर दिए गए। निरस्त हुए 139 भूखंडों को नियमों को ताक पर रखकर फरवरी 2005 से फरवरी 2007 के बीच फिर से आवंटित कर दिया गया।16 साल पहले हुए 400 करोड़ के भूखंड घोटाले की मंडलायुक्त नए सिरे से जांच कर रहे हैं।
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