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दो साल में 60 फीसदी बढ़ गई सेहत की जांच

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jun 2022 12:54 AM IST
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दो साल में 60 फीसदी बढ़ गई सेहत की जांच
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गाजियाबाद। दो साल पहले कोरोना संक्रमण फैला तो लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर गया। इन दो वर्षों में साठ फीसदी सेहत की जांच बढ़ गई है। दूसरी लहर (अप्रैल -मई 2021) के दौरान सांस फूलने और थकान होने के बाद लोगों ने फेपड़ों और शरीर में प्रतिरोधक क्षमता की जांच कराते थे। डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि मार्च से 2020 से अप्रैल 2021 के बाद 25 से 30 प्रतिशत लोग ही स्वास्थ्य के प्रति सतर्क हुए थे, लेकिन अप्रैल 2021 के बाद 60 फीसदी लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। लोग सबसे अधिक फेफड़ों की स्थिति, किसी तरह का शरीर में संक्रमण और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के बारे में जानना चाहते हैं। इस समय गर्मी बढ़ने के बाद शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस जानने के लिए सोडियम, पोटैशियम और क्लोराइड के अलावा सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) जांच करा रहे हैं। दो साल पहले एमएमजी अस्पताल में 1200 से 1400 लोगों की जांच होती थी, इस समय 2800 से 3200 लोग जांच करा रहे हैं।
अब बिना डॉक्टरी सलाह के ही कराना चाहते हैं जांच
पैथोलॉजिस्ट घनश्याम कांबोज का कहना है कि पहले लोग डॉक्टर की सलाह पर जांच कराने के लिए आते थे, लेकिन दो साल से हर तीसरा व्यक्ति स्वयं जांच कराने के लिए आता है। अब तो लोग जांच का नाम भी स्वत: ही कहते हैं कि यह जांच कर दा।
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क्यों करानी चाहिए खून की जांच
एमएमजी अस्पताल की पैथॉलोजिस्ट डॉ. प्रज्ञा प्रसाद का कहना है कि शरीर में खून की कमी होना, किसी तरह का संक्रमण होना, ग्लूकोज की मात्रा की स्थिति, लाल और स्वेत रुधिर कणिकाओं की मात्रा, प्लेटलेट्स काउंट, प्लाजमा आदि की सही उपस्थिति का पता खून जांच के जरिये ही चलता है। इनकी जांच कराने में किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है।
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कब और कैसे कराएं जांच
महिला अस्पताल की पैथॉलोजिस्ट डॉ. शेफाली का कहना है कि भागदौड़ भरे जीवन को देखते हुए हर व्यक्ति को 20 साल की उम्र के बाद साल में एक बार खून और शरीर की पूरी जांच जरूर कराना चाहिए। अब लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। लोग स्वयं जांच करा रहे हैं।
इस स्थिति में लोग करा रहे हैं जांच
थकान, कमजोरी, बुखार, सांस फूलने, लगातार पेट या सिर में दर्द होने पर, अचानक वजन घटने, खून की कमी, संक्रमण, रक्त विकार व हड्डी की मजबूती, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता, फेफड़ों में ऑक्सीजन लेने की स्थिति पता करने के लिए जांच कराते हैं।

सरकारी में निशुल्क प्राइवेट में पांच हजार रुपये तक जांच
एमएमजी, महिला और संयुक्त अस्पताल में लोगों की जांच निशुल्क होती है जबकि निजी लैब में 500 से 5000 रुपये में जांच हो रही है। अब सभी सरकारी अस्पतालों में नई जांच मशीन उपलब्ध होने से निजी की तरह ही सरकारी लैब में भी सटीक जांच रिपोर्ट मिलती है।
इनकी जांच बढ़ी
बीमारी जांच जांच फीस
संक्रमण - सीबीसी - 300 - 400
मधुमेह - एचबीवनसी - 500 - 600
हड्डी - कैल्सियम और फास्फोरस - 300 - 400
लिवर - एलएफटी - 650 - 700
गुर्दा - केएफटी - 650 - 700
थायराइड - टी3टी4टीएसएच - 650 से 750
तंत्रिका तंत्र - विटामिन बी-12 - 800 से 1000
हड्डी में विटामिन डी - 1400 से 1600
नोट : यह सभी जांच एमएमजी अस्पताल में निशुल्क होती है।
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