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सेफ सिटी तो दूर, सड़कों का अंधेरा भी दूर न कर पाए अफसर
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सेफ सिटी तो दूर, सड़कों का अंधेरा भी दूर न कर पाए अफसर
गाजियाबाद। सेफ सिटी की योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है। कलक्ट्रेट से चंद कदमों की दूरी पर स्थित सड़कों का अंधेरा भी अफसर दूर नहीं कर पाए। बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाना, पिंक टॉयलेट्स बनाना, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाने के प्रयास तो अभी शुरू भी नहीं हुए हैं।
सेफ सिटी योजना के तहत नगर निगम को शहर की सभी सड़कों को अंधेरे से मुक्त करना था। राजनगर, कविनगर की व्यावसायिक क्षेत्रों में महिलाओं के ज्यादा आवागमन वाले क्षेत्रों में भी भी सड़कों पर अंधेरा है। नगर निगम के अधिकारियों ने छह हजार स्ट्रीट लाइटें खरीदकर शहर के मुख्य मार्गों का अंधेरा दूर करने का दावा किया था, लेकिन अभी तक सिर्फ एक हजार लाइटें खरीदी गई हैं। बीते मंगलवार को डीएम राकेश कुमार सिंह ने सेफ सिटी की बैठक ली तो बताया कि शहर में 238 स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें खराब होने की वजह से अंधेरा है। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को इन बिंदुओं को रोशन करने के निर्देश दिए हैं।
अंधेरे वाले प्रमुख स्थान
स्थान: आरडीसी की सर्विस लेन
राजनगर रेलवे क्रॉसिंग से एप्पल ट्री होटल के सामने से होते हुए कलक्ट्रेट की ओर जाने वाली सर्विस लेन पर लंबे समय से स्ट्रीट लाइटें नहीं है। इस मार्ग पर पोल भी नहीं लगाए गए हैं। आरडीसी में गैर सरकारी कार्यालय और अन्य व्यावसायिक केंद्र होने की वजह से यहां महिलाएं देर शाम को ड्यूटी से घर लौटती हैं, कई बार चेन और पर्स लूट की वारदातें हो चुकी हैं।
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गोविंदपुरम डी-ब्लॉक
गोविंदपुरम स्थित डी-ब्लॉक में पूरे मार्ग पर अंधेरा है। यहां लाइटें लगी हुई तो हैं, लेकिन जलती नहीं हैं। स्थानीय पार्षद और कॉलोनी के लोग इसकी शिकायत कई बार नगर निगम अधिकारियों से कर चुके हैं, लेकिन लाइटों को ठीक नहीं कराया गया है। यहां अंधेरे में पैदल आवागमन करने में महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी डरते हैं।
सिटी को सेफ बनाने के लिए प्रक्रिया होगी शुरू
डीएम आरके सिंह का कहना है कि गाजियाबाद को सेफ सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस कर्मियों को तैनात कर उन्हें पिंक स्कूटर और एसयूवी वाहन दिए जाएंगे। नगर निगम की ओर से महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट बनाए जाएंगे। इनके लिए ऐसे इलाकों को चयनित किया जाएगा, जहां महिलाओं का आवागमन ज्यादा रहता है। जिन मार्गों पर रोशनी कम है, वहां शाम के बाद तेज रोशनी के इंतजाम किए जाएंगे। बसों में सीसीटीवी कैमरे, जगह-जगह महिला पुलिस कियोस्क बनाकर महिला पुलिस कर्मी तैनात होंगी। महिला कर्मियों को लाने ले जाने के लिए बस और एसयूवी भी होंगे। उनका कहना है कि सभी एसडीएम को निर्देशित किया कि वह पुलिस क्षेत्राधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर उन क्षेत्रों को चयनित करें जहां आपराधिक घटनाएं ज्यादा हैं। ऐसे स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
जल्द ही स्ट्रीट लाइटें लगाकर रोशन होंगी सड़के
नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि सेफ सिटी के तहत पुलों के नीचे रहने वाले अंधेरे को खत्म करने के लिए लाइटें लगाई गई हैं। कुछ अन्य स्थलों को चिह्नित कर लिया गया है। लाइटें लगाने का प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा गया है। जल्द ही लाइटों की खरीद करके सभी मार्गों को रोशन किया जाएगा।
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गाजियाबाद। सेफ सिटी की योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है। कलक्ट्रेट से चंद कदमों की दूरी पर स्थित सड़कों का अंधेरा भी अफसर दूर नहीं कर पाए। बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाना, पिंक टॉयलेट्स बनाना, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाने के प्रयास तो अभी शुरू भी नहीं हुए हैं।
सेफ सिटी योजना के तहत नगर निगम को शहर की सभी सड़कों को अंधेरे से मुक्त करना था। राजनगर, कविनगर की व्यावसायिक क्षेत्रों में महिलाओं के ज्यादा आवागमन वाले क्षेत्रों में भी भी सड़कों पर अंधेरा है। नगर निगम के अधिकारियों ने छह हजार स्ट्रीट लाइटें खरीदकर शहर के मुख्य मार्गों का अंधेरा दूर करने का दावा किया था, लेकिन अभी तक सिर्फ एक हजार लाइटें खरीदी गई हैं। बीते मंगलवार को डीएम राकेश कुमार सिंह ने सेफ सिटी की बैठक ली तो बताया कि शहर में 238 स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें खराब होने की वजह से अंधेरा है। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को इन बिंदुओं को रोशन करने के निर्देश दिए हैं।
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अंधेरे वाले प्रमुख स्थान
स्थान: आरडीसी की सर्विस लेन
राजनगर रेलवे क्रॉसिंग से एप्पल ट्री होटल के सामने से होते हुए कलक्ट्रेट की ओर जाने वाली सर्विस लेन पर लंबे समय से स्ट्रीट लाइटें नहीं है। इस मार्ग पर पोल भी नहीं लगाए गए हैं। आरडीसी में गैर सरकारी कार्यालय और अन्य व्यावसायिक केंद्र होने की वजह से यहां महिलाएं देर शाम को ड्यूटी से घर लौटती हैं, कई बार चेन और पर्स लूट की वारदातें हो चुकी हैं।
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गोविंदपुरम डी-ब्लॉक
गोविंदपुरम स्थित डी-ब्लॉक में पूरे मार्ग पर अंधेरा है। यहां लाइटें लगी हुई तो हैं, लेकिन जलती नहीं हैं। स्थानीय पार्षद और कॉलोनी के लोग इसकी शिकायत कई बार नगर निगम अधिकारियों से कर चुके हैं, लेकिन लाइटों को ठीक नहीं कराया गया है। यहां अंधेरे में पैदल आवागमन करने में महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी डरते हैं।
सिटी को सेफ बनाने के लिए प्रक्रिया होगी शुरू
डीएम आरके सिंह का कहना है कि गाजियाबाद को सेफ सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस कर्मियों को तैनात कर उन्हें पिंक स्कूटर और एसयूवी वाहन दिए जाएंगे। नगर निगम की ओर से महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट बनाए जाएंगे। इनके लिए ऐसे इलाकों को चयनित किया जाएगा, जहां महिलाओं का आवागमन ज्यादा रहता है। जिन मार्गों पर रोशनी कम है, वहां शाम के बाद तेज रोशनी के इंतजाम किए जाएंगे। बसों में सीसीटीवी कैमरे, जगह-जगह महिला पुलिस कियोस्क बनाकर महिला पुलिस कर्मी तैनात होंगी। महिला कर्मियों को लाने ले जाने के लिए बस और एसयूवी भी होंगे। उनका कहना है कि सभी एसडीएम को निर्देशित किया कि वह पुलिस क्षेत्राधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर उन क्षेत्रों को चयनित करें जहां आपराधिक घटनाएं ज्यादा हैं। ऐसे स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
जल्द ही स्ट्रीट लाइटें लगाकर रोशन होंगी सड़के
नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि सेफ सिटी के तहत पुलों के नीचे रहने वाले अंधेरे को खत्म करने के लिए लाइटें लगाई गई हैं। कुछ अन्य स्थलों को चिह्नित कर लिया गया है। लाइटें लगाने का प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा गया है। जल्द ही लाइटों की खरीद करके सभी मार्गों को रोशन किया जाएगा।