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बेटा हो या बेटी बधाई तो 1100 रुपये ही लूंगी
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बेटा हो या बेटी बधाई तो 1100 रुपये ही लूंगी
गाजियाबाद। लक्ष्मी हो या कृष्ण बधाई तो 1100 रुपये ही लूंगी, तभी बच्चा दूंगी। यह बातें महिला अस्पताल के वार्ड में रोजाना सुबह आठ बजे से 11 बजे के बीच प्रसूता व नवजात शिशु के डिस्चार्ज होते समय तीमारदार और अस्पताल स्टाफ के बीच सुनी जा सकती हैं। यह स्थिति अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है। महिला अस्पताल में बेटा हो या बेटी, लेकिन अस्पताल में कार्यरत नर्स, सफाई कर्मचारी और वार्ड आया प्रसूता के परिजनों से जबरदस्ती पांच सौ से 2200 रुपये तक की वसूली करते हैं।
यह कैसा मातृत्व सुरक्षा वंदना योजना
इस समय शासन के निर्देश पर एक मई से 31 मई तक मातृत्व सुरक्षा वंदना योजना चलाया जा रहा है। मकसद है कि गर्भवती महिला को किसी तरह से परेशानी न हो। सुरक्षित प्रसव कराया जाए। अस्पताल में पंजीकरण से लेकर प्रसव तक सभी सुविधाएं निशुल्क है। प्रसव के बाद नगरीय क्षेत्र में 1400 और ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके साथ ही तीन महीने तक जच्चा और बच्चा की देखभाल के लिए आशा और एएनएम द्वारा लगातार निगरानी की जाती है। डिस्चार्ज होते समय परिजनों से 20 बिंदुओं पर राय ली जाती है जिसमें पूछा जाता है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होने से डिस्चार्ज होने तक अस्पताल की व्यवस्था और स्टाफ कैसे लगा।
दो महीने से बेरोजगार हूं, 2150 रुपये दिए तब बेटे का मुंह देखा
शाहदरा निवासी सूरज ने बताया कि दो बेटी के बाद उनकी पत्नी गीता ने बेटे को जन्म दिया। लेबर रूम में 1100 रुपये जबरदस्ती ले लिए, तब बेटे का मुंह दिखाया। बच्चे और पत्नी को वार्ड में शिफ्ट करने के बाद नर्स ने 600 रुपये लिए। सफाई कर्मचारी ने 150 और सुरक्षा गार्ड ने 300 रुपये लिए। ढाई हजार रुपये की दवाई भी बाहर से लानी पड़ी। सूरज ने बताया कि पहले मोहन नगर में रहता था, इसके बाद शाहदरा में रहने लगा। दवाई महिला अस्पताल से चल रही थी, इसलिए वहीं भर्ती करा दिया था। काम छूटने से दो महीने से बेरोजगार हूं, इसके बावजूद छह हजार रुपये खर्च हो गए।
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दूसरी बेटी पैदा होने पर लिया 1700 रुपये
मकनपुर निवासी सनी शर्मा मैकेनिक हैं। उनकी पत्नी मोनिका शर्मा ने अस्पताल में दूसरी बेटी को जन्म दिया। सनी ने बताया कि बेटी पैदा होने पर 1100 रुपये डॉक्टर ने लिया। वार्ड में डिस्चार्ज होते समय नर्स ने पांच सौ रुपये और सफाई कर्मचारी ने एक सौ रुपये लिया तब बेटी और पत्नी को डिस्चार्ज किया। सनी का कहना था पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने के बाद काम पर नहीं जा पा रहे थे। अगर किसी से शिकायत करूं तो उसमें समय अलग से बर्बाद होगा। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत कराऊंगा।
शिकायत मिली तो करूंगी सख्त कार्रवाई
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. संगीता गोयल का कहना है कि पहले कुछ शिकायत मिली थी, तो स्टाफ को वार्ड से हटा दिया था। अगर किसी प्रसूता के परिजन शिकायत करते हैं तो संबंधित स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गंभीर मामला, कराई जाएगी जांच
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि अस्पताल में जांच, इलाज और प्रसव निशुल्क होने के साथ ही प्रसूता को जननी सुरक्षा योजना के तहत बैंक खाते में पैसे भी दिया जाता है। अगर इसी तरह की परेशानी तीमारदारों के साथ हो रही है तो गंभीर मामला है। जांच कराने के साथ ही शासन को पत्र लिखा जाएगा।
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गाजियाबाद। लक्ष्मी हो या कृष्ण बधाई तो 1100 रुपये ही लूंगी, तभी बच्चा दूंगी। यह बातें महिला अस्पताल के वार्ड में रोजाना सुबह आठ बजे से 11 बजे के बीच प्रसूता व नवजात शिशु के डिस्चार्ज होते समय तीमारदार और अस्पताल स्टाफ के बीच सुनी जा सकती हैं। यह स्थिति अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है। महिला अस्पताल में बेटा हो या बेटी, लेकिन अस्पताल में कार्यरत नर्स, सफाई कर्मचारी और वार्ड आया प्रसूता के परिजनों से जबरदस्ती पांच सौ से 2200 रुपये तक की वसूली करते हैं।
यह कैसा मातृत्व सुरक्षा वंदना योजना
इस समय शासन के निर्देश पर एक मई से 31 मई तक मातृत्व सुरक्षा वंदना योजना चलाया जा रहा है। मकसद है कि गर्भवती महिला को किसी तरह से परेशानी न हो। सुरक्षित प्रसव कराया जाए। अस्पताल में पंजीकरण से लेकर प्रसव तक सभी सुविधाएं निशुल्क है। प्रसव के बाद नगरीय क्षेत्र में 1400 और ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके साथ ही तीन महीने तक जच्चा और बच्चा की देखभाल के लिए आशा और एएनएम द्वारा लगातार निगरानी की जाती है। डिस्चार्ज होते समय परिजनों से 20 बिंदुओं पर राय ली जाती है जिसमें पूछा जाता है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होने से डिस्चार्ज होने तक अस्पताल की व्यवस्था और स्टाफ कैसे लगा।
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दो महीने से बेरोजगार हूं, 2150 रुपये दिए तब बेटे का मुंह देखा
शाहदरा निवासी सूरज ने बताया कि दो बेटी के बाद उनकी पत्नी गीता ने बेटे को जन्म दिया। लेबर रूम में 1100 रुपये जबरदस्ती ले लिए, तब बेटे का मुंह दिखाया। बच्चे और पत्नी को वार्ड में शिफ्ट करने के बाद नर्स ने 600 रुपये लिए। सफाई कर्मचारी ने 150 और सुरक्षा गार्ड ने 300 रुपये लिए। ढाई हजार रुपये की दवाई भी बाहर से लानी पड़ी। सूरज ने बताया कि पहले मोहन नगर में रहता था, इसके बाद शाहदरा में रहने लगा। दवाई महिला अस्पताल से चल रही थी, इसलिए वहीं भर्ती करा दिया था। काम छूटने से दो महीने से बेरोजगार हूं, इसके बावजूद छह हजार रुपये खर्च हो गए।
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दूसरी बेटी पैदा होने पर लिया 1700 रुपये
मकनपुर निवासी सनी शर्मा मैकेनिक हैं। उनकी पत्नी मोनिका शर्मा ने अस्पताल में दूसरी बेटी को जन्म दिया। सनी ने बताया कि बेटी पैदा होने पर 1100 रुपये डॉक्टर ने लिया। वार्ड में डिस्चार्ज होते समय नर्स ने पांच सौ रुपये और सफाई कर्मचारी ने एक सौ रुपये लिया तब बेटी और पत्नी को डिस्चार्ज किया। सनी का कहना था पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने के बाद काम पर नहीं जा पा रहे थे। अगर किसी से शिकायत करूं तो उसमें समय अलग से बर्बाद होगा। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत कराऊंगा।
शिकायत मिली तो करूंगी सख्त कार्रवाई
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. संगीता गोयल का कहना है कि पहले कुछ शिकायत मिली थी, तो स्टाफ को वार्ड से हटा दिया था। अगर किसी प्रसूता के परिजन शिकायत करते हैं तो संबंधित स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गंभीर मामला, कराई जाएगी जांच
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि अस्पताल में जांच, इलाज और प्रसव निशुल्क होने के साथ ही प्रसूता को जननी सुरक्षा योजना के तहत बैंक खाते में पैसे भी दिया जाता है। अगर इसी तरह की परेशानी तीमारदारों के साथ हो रही है तो गंभीर मामला है। जांच कराने के साथ ही शासन को पत्र लिखा जाएगा।