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मुआवजा घोटाले के आरोपियों के एक और कारनामे से उठा पर्दा
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मुआवजा घोटाले के आरोपियों के एक और कारनामे से उठा पर्दा
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के मामले में 22 करोड़ के मुआवजे का फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी अरुण कुमार का एक और कारनामा सामने आया है। पिता रामेश्वर दास द्वारा बनाई गई अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति के जरिए अरुण ने जमीन को सीलिंग से बचाने के लिए रसूलपुर सिकरोड़ा के एक अन्य खसरा नंबर की जमीन का भी गुपचुप बैनामा किया था। जांच में हुए इस खुलासे के बाद सदरपुर क्षेत्र के लेखपाल नवीन कुमार की ओर से अरुण कुमार, उसके बेटे गोल्डी गुप्ता और पूर्व एडीएम के रिश्तेदार सुधाकर मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इनके खिलाफ यह चौथी एफआईआर है।
इसी में साफ हुआ है कि आरोपियों ने एक नहीं, तीन फर्जी समिति बनाई थीं। अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति, अशोक सहकारी खेती समिति और अशोक संयुक्त सहकारी समिति का गठन किया गया था। इनमें से जमीन के खरीदने और बेचने का काम अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति से किया। एडीएम प्रशासन ऋतु सुहास का कहना है कि रसूलपुर सिकरोड़ा के राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया गया तो पता चला कि दरियागंज निवासी स्व. रामेश्वर दास ने इन तीन सहकारी समितियों इनमें परिवार के सदस्य व रामेश्वर के बेटे प्रदीप गुप्ता, धर्मपाल, ज्ञानचंद और अरुण कुमार के अलावा मधुसूदन गुप्ता, शांति देवी, स्व. सत्या देवी, निर्माला देवी, दीपचंद, लाजवंती, श्रवण कुमार, सत्यपाल, रविंद्र कुमार और विपिन शामिल थे। हालांकि समिति का पंजीकरण 1999 में ही निरस्त कर दिया गया था।
इसके बावजूद इन लोगों ने अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति माध्यम से जमीन की खरीद-फरोख्त जारी रखी। समिति के सचिव अरुण कुमार ने रसूलपुर सिकरोड़ा के खसरा संख्या 253 की 0.02966 हेक्टेयर जमीन को आश मोहम्मद व निसार मोहम्मद को बेच दिया। अरुण कुमार ने जनवरी 2022 में एडीएम के रिश्तेदार सुधाकर मिश्रा के नाम मुखतार ए आम (पावर ऑफ अटार्नी) कर दी। एडीएम का कहना है कि सीलिंग अधिनियम से जमीन को बचाकर लाभ कमाया गया। उनका कहना है कि यह मामला दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में अधिगृहीत की गई जमीन से अलग है। पुलिस ने लेखपाल की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया है। एसएचओ का कहना है कि मामले के दो आरोपियों गोल्डी और सुधाकर को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
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पहली एफआईआर
इसमें गोल्डी, अरुण कुमार और सुधाकर मिश्रा नामजद हैं। इनमें से गोल्डी और सुधाकर मिश्रा को गिरफ्तार किया जा चुका है। गोल्डी बिल्डर है और सुधाकर एडीएम का रिश्तेदार।
दूसरी
इसमें अरुण, किशमिश, फतेह मोहम्मद, सुधाकर मिश्रा नामजद हैं। तत्कालीन राजस्व कर्मी, तत्कालीन सब रजिस्ट्रार और एडीएम एलए दफ्तर के तत्कालीन कर्मचारियों का पदनाम हैं।
तीसरी
इसमें घोटाले के मास्टरमाइंड गोल्डी, अरुण कुमार और सुधाकर मिश्रा नामजद हैं। तत्कालीन सब रजिस्ट्रार और तत्कालीन राजस्वकर्मी का पदनाम है। इनके नाम नहीं खोले गए हैं।
चौथी
यह मुआवजा घोटाले की नहीं है। इसमें भी वे ही आरोपी हैं जो पहली तीन एफआईआर में है। इससे पता चला है कि आरोपियों ने और भी जमीन में खेल किया है।
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गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के मामले में 22 करोड़ के मुआवजे का फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी अरुण कुमार का एक और कारनामा सामने आया है। पिता रामेश्वर दास द्वारा बनाई गई अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति के जरिए अरुण ने जमीन को सीलिंग से बचाने के लिए रसूलपुर सिकरोड़ा के एक अन्य खसरा नंबर की जमीन का भी गुपचुप बैनामा किया था। जांच में हुए इस खुलासे के बाद सदरपुर क्षेत्र के लेखपाल नवीन कुमार की ओर से अरुण कुमार, उसके बेटे गोल्डी गुप्ता और पूर्व एडीएम के रिश्तेदार सुधाकर मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इनके खिलाफ यह चौथी एफआईआर है।
इसी में साफ हुआ है कि आरोपियों ने एक नहीं, तीन फर्जी समिति बनाई थीं। अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति, अशोक सहकारी खेती समिति और अशोक संयुक्त सहकारी समिति का गठन किया गया था। इनमें से जमीन के खरीदने और बेचने का काम अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति से किया। एडीएम प्रशासन ऋतु सुहास का कहना है कि रसूलपुर सिकरोड़ा के राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया गया तो पता चला कि दरियागंज निवासी स्व. रामेश्वर दास ने इन तीन सहकारी समितियों इनमें परिवार के सदस्य व रामेश्वर के बेटे प्रदीप गुप्ता, धर्मपाल, ज्ञानचंद और अरुण कुमार के अलावा मधुसूदन गुप्ता, शांति देवी, स्व. सत्या देवी, निर्माला देवी, दीपचंद, लाजवंती, श्रवण कुमार, सत्यपाल, रविंद्र कुमार और विपिन शामिल थे। हालांकि समिति का पंजीकरण 1999 में ही निरस्त कर दिया गया था।
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इसके बावजूद इन लोगों ने अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति माध्यम से जमीन की खरीद-फरोख्त जारी रखी। समिति के सचिव अरुण कुमार ने रसूलपुर सिकरोड़ा के खसरा संख्या 253 की 0.02966 हेक्टेयर जमीन को आश मोहम्मद व निसार मोहम्मद को बेच दिया। अरुण कुमार ने जनवरी 2022 में एडीएम के रिश्तेदार सुधाकर मिश्रा के नाम मुखतार ए आम (पावर ऑफ अटार्नी) कर दी। एडीएम का कहना है कि सीलिंग अधिनियम से जमीन को बचाकर लाभ कमाया गया। उनका कहना है कि यह मामला दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में अधिगृहीत की गई जमीन से अलग है। पुलिस ने लेखपाल की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया है। एसएचओ का कहना है कि मामले के दो आरोपियों गोल्डी और सुधाकर को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
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पहली एफआईआर
इसमें गोल्डी, अरुण कुमार और सुधाकर मिश्रा नामजद हैं। इनमें से गोल्डी और सुधाकर मिश्रा को गिरफ्तार किया जा चुका है। गोल्डी बिल्डर है और सुधाकर एडीएम का रिश्तेदार।
दूसरी
इसमें अरुण, किशमिश, फतेह मोहम्मद, सुधाकर मिश्रा नामजद हैं। तत्कालीन राजस्व कर्मी, तत्कालीन सब रजिस्ट्रार और एडीएम एलए दफ्तर के तत्कालीन कर्मचारियों का पदनाम हैं।
तीसरी
इसमें घोटाले के मास्टरमाइंड गोल्डी, अरुण कुमार और सुधाकर मिश्रा नामजद हैं। तत्कालीन सब रजिस्ट्रार और तत्कालीन राजस्वकर्मी का पदनाम है। इनके नाम नहीं खोले गए हैं।
चौथी
यह मुआवजा घोटाले की नहीं है। इसमें भी वे ही आरोपी हैं जो पहली तीन एफआईआर में है। इससे पता चला है कि आरोपियों ने और भी जमीन में खेल किया है।