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कुर्की का गलत आदेश जारी किया, एक महीने बाद भी नहीं किया वापस
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कुर्की का गलत आदेश जारी किया, एक महीने बाद भी नहीं किया वापस
गाजियाबाद। करे कोई भरे कोई। यह कहावत तो आपने सुनी होगी। ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद में सामने आया है। 400 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में मुख्य अभियुक्त लक्ष्य तंवर के साथ सह अभियुक्त बनाए गए नंदग्राम निवासी वरुण त्यागी के वाहनों के साथ ही मकनपुर के वरुण त्यागी के वाहनों को कुर्क करने आदेश जारी कर दिया गया। मामले में सच्चाई सामने आने पर पुलिस के होश उड़ गए। उधर, पीड़ित अपने वाहनों के खिलाफ जारी कुर्की के आदेश को रद्द कराने के लिए कभी पुलिस तो कभी प्रशासन के अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
फर्जी कागजात लगाकर बैंक अधिकारियों से सांठगांठ कर 400 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में लक्ष्य तंवर समेत सात आरोपियों को जेल भेजा गया। इन पर गैंगेस्टर एक्ट में कार्रवाई की गई है। सभी मामलों में कुर्की के आदेश जारी हो चुके हैं। घंटाघर कोतवाली पुलिस द्वारा 25 दिसंबर 2021 को गैंगस्टर एक्ट में वरुण त्यागी के नाम संपत्ति को कुर्क करने के लिए रिपोर्ट प्रशासन को भेजी गई। सात जनवरी 2022 को एडीएम सिटी विपिन कुमार ने रिपोर्ट के आधार पर कुर्की का आदेश जारी कर दिया। 13 फरवरी 2022 को जब पुलिस ने आरोपी वरुण को पकड़ा और वाहनों के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि उसके नाम पर दो गाड़ियां हैं, जबकि पुलिस की रिपोर्ट में पांच गाड़ियों का जिक्र था। जांच की तो पता चला कि पुलिस ने दूसरे वरुण त्यागी की तीन गाड़ियों को आरोपी के नाम पर कुर्क कराने का आदेश करा लिया है। पुलिस का कहना है कि नाम और पिता के नाम एक होने की वजह से ऐसी गलती हो गई। वाहनों की कुर्की के आदेश की जानकारी जब मकनपुर निवासी वरुण को हुई तो वह घबरा गए।
ऐसे हुआ खुलासा
बैंक लोन घोटाले में सह आरोपी वरुण त्यागी पुत्र महेश चंद्र त्यागी की फॉरच्यूनर और सफारी को कुर्क करने के बाद पुलिस ने पूछा कि और तीन गाड़ियां कहां हैं। आरोपी ने बताया कि कि मेरे पास तो यही दो गाड़ियां हैं। इसके बाद पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि जिन तीन गाड़ियों को उसके नाम में शामिल की है वह मकनपुर के वरुण की है।
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महीने भर बाद भी निरस्त नहीं हुआ आदेश
मकनपुर निवासी वरुण ने बताया कि 13 फरवरी को उनके पास पुलिस का फोन आया था कि आप आकर एक प्रार्थना पत्र लगा दो। इसके बाद से वह लगातार पुलिस प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं। अब उन्हें पुलिस ने सोमवार को बुलाया गया है।
एसपी सिटी निपुण अग्रवाल ने बताया कि दोनों के नाम और पिता के नाम एक समान होने की वजह से यह गलती हुई है। गलती के सुधार के लिए संशोधित रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है। किसी को भी अकारण परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
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गाजियाबाद। करे कोई भरे कोई। यह कहावत तो आपने सुनी होगी। ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद में सामने आया है। 400 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में मुख्य अभियुक्त लक्ष्य तंवर के साथ सह अभियुक्त बनाए गए नंदग्राम निवासी वरुण त्यागी के वाहनों के साथ ही मकनपुर के वरुण त्यागी के वाहनों को कुर्क करने आदेश जारी कर दिया गया। मामले में सच्चाई सामने आने पर पुलिस के होश उड़ गए। उधर, पीड़ित अपने वाहनों के खिलाफ जारी कुर्की के आदेश को रद्द कराने के लिए कभी पुलिस तो कभी प्रशासन के अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
फर्जी कागजात लगाकर बैंक अधिकारियों से सांठगांठ कर 400 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में लक्ष्य तंवर समेत सात आरोपियों को जेल भेजा गया। इन पर गैंगेस्टर एक्ट में कार्रवाई की गई है। सभी मामलों में कुर्की के आदेश जारी हो चुके हैं। घंटाघर कोतवाली पुलिस द्वारा 25 दिसंबर 2021 को गैंगस्टर एक्ट में वरुण त्यागी के नाम संपत्ति को कुर्क करने के लिए रिपोर्ट प्रशासन को भेजी गई। सात जनवरी 2022 को एडीएम सिटी विपिन कुमार ने रिपोर्ट के आधार पर कुर्की का आदेश जारी कर दिया। 13 फरवरी 2022 को जब पुलिस ने आरोपी वरुण को पकड़ा और वाहनों के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि उसके नाम पर दो गाड़ियां हैं, जबकि पुलिस की रिपोर्ट में पांच गाड़ियों का जिक्र था। जांच की तो पता चला कि पुलिस ने दूसरे वरुण त्यागी की तीन गाड़ियों को आरोपी के नाम पर कुर्क कराने का आदेश करा लिया है। पुलिस का कहना है कि नाम और पिता के नाम एक होने की वजह से ऐसी गलती हो गई। वाहनों की कुर्की के आदेश की जानकारी जब मकनपुर निवासी वरुण को हुई तो वह घबरा गए।
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ऐसे हुआ खुलासा
बैंक लोन घोटाले में सह आरोपी वरुण त्यागी पुत्र महेश चंद्र त्यागी की फॉरच्यूनर और सफारी को कुर्क करने के बाद पुलिस ने पूछा कि और तीन गाड़ियां कहां हैं। आरोपी ने बताया कि कि मेरे पास तो यही दो गाड़ियां हैं। इसके बाद पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि जिन तीन गाड़ियों को उसके नाम में शामिल की है वह मकनपुर के वरुण की है।
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महीने भर बाद भी निरस्त नहीं हुआ आदेश
मकनपुर निवासी वरुण ने बताया कि 13 फरवरी को उनके पास पुलिस का फोन आया था कि आप आकर एक प्रार्थना पत्र लगा दो। इसके बाद से वह लगातार पुलिस प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं। अब उन्हें पुलिस ने सोमवार को बुलाया गया है।
एसपी सिटी निपुण अग्रवाल ने बताया कि दोनों के नाम और पिता के नाम एक समान होने की वजह से यह गलती हुई है। गलती के सुधार के लिए संशोधित रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है। किसी को भी अकारण परेशान नहीं होने दिया जाएगा।