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चार करोड़ खर्च, आरडीसी व्हीकल फ्री जोन में पसरा रहता है अंधेरा
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चार करोड़ खर्च फिर भी आरडीसी व्हीकल फ्री जोन में पसरा रहता है अंधेरा
गाजियाबाद। शहर के मुख्य व्यावसायिक केंद्र राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी) में चार करोड़ खर्च कर विकसित हुआ व्हीकल फ्री जोन डेढ़ साल बाद भी गुलजार नहीं हो सका है। जीडीए की ओर से बीते दो माह में तीन बार व्हीकल फ्री-जोन के क्योस्क की नीलामी प्रक्रिया आयोजित की गई, लेकिन कम बोली के कारण प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा। नीलामी में महंगी दरों का हवाला देते हुए लोग खाने-पीने और खरीदारी से जुड़े बनाए गए 10 बड़े क्योस्क को लेने को तैयार नहीं है।
सालाना 25 लाख से ज्यादा का नुकसान
जीडीए के तमाम प्रयासों के बावजूद क्योस्क का आवंटन अब तक नहीं हो पाया है। क्योस्क से प्राधिकरण को सालाना 20 लाख से अधिक की आय होनी थी। दूसरी ओर व्हीकल फ्री जोन व क्योस्क का संचालन का जिम्मा लेने वाली एजेंसी को ही पूरे क्षेत्र का मेंटेनेंस और बिजली का खर्च भरना था। ऐसे में रखरखाव खर्च को अगर मिला दें तो जीडीए को करीब 25 लाख का अब तक नुकसान हुआ है। व्हीकल फ्री जोन में सफाई सहित अन्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। दिसंबर 2020 में 59 लाख में क्योस्क का आवंटन हासिल करने वाले ठेकेदार रविंद्र झा की अप्रैल में कोरोना से मौत हो गई थी। तब से लेकर अब तक नए सिरे से क्योस्क व जोन का आवंटन नहीं हो सका है।
शाम होते ही छा जाता है अंधेरा, असमाजिक तत्वों का जमावड़ा
आरडीसी में दो मॉल, नामी रेस्टोरेंट के साथ कई नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों के शोरूम हैं। यहां रोजाना कामकाज के अलावा खरीदारी के लिए 10 से 15 हजार लोग पहुंचते हैं। सप्ताह के आखिर में लोगों की भीड़ का आंकड़ा 15 हजार को भी पार कर जाता है। ऐसे में वर्तमान में आवंटन व रखरखाव नहीं होने से जोन में जहां तहां गंदगी देखी जा सकती है। जोन में लगाई गई आकर्षक स्ट्रीट लाइट जलने की जगह शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
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अंधेरे के कारण आवाजाही से करते हैं परहेज
1. लंबा वक्त बीतने के बावजूद आरडीसी में क्योस्क का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। शाम होते ही व्हीकल फ्री जोन में अंधेरा पसर जाता है। ऐसे में लोगों के साथ खासकर महिलाएं मार्ग का इस्तेमाल करने से बचती हैं। - रोहित
संचालन शुरू होने से पहले जीडीए करे रखरखाव
2. बीते डेढ़ साल से क्योस्क संचालन शुरू नहीं हो सकता है। जोन में लगाई गई आकर्षक लाइटें बंद रहती हैं। क्योस्क के आसपास तो गंदगी का आलम देखा जा सकता है। ऐसे में एजेंसी का आवंटन होने तक जीडीए को सही से रखरखाव करना चाहिए। - पवन
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गाजियाबाद। शहर के मुख्य व्यावसायिक केंद्र राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी) में चार करोड़ खर्च कर विकसित हुआ व्हीकल फ्री जोन डेढ़ साल बाद भी गुलजार नहीं हो सका है। जीडीए की ओर से बीते दो माह में तीन बार व्हीकल फ्री-जोन के क्योस्क की नीलामी प्रक्रिया आयोजित की गई, लेकिन कम बोली के कारण प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा। नीलामी में महंगी दरों का हवाला देते हुए लोग खाने-पीने और खरीदारी से जुड़े बनाए गए 10 बड़े क्योस्क को लेने को तैयार नहीं है।
सालाना 25 लाख से ज्यादा का नुकसान
जीडीए के तमाम प्रयासों के बावजूद क्योस्क का आवंटन अब तक नहीं हो पाया है। क्योस्क से प्राधिकरण को सालाना 20 लाख से अधिक की आय होनी थी। दूसरी ओर व्हीकल फ्री जोन व क्योस्क का संचालन का जिम्मा लेने वाली एजेंसी को ही पूरे क्षेत्र का मेंटेनेंस और बिजली का खर्च भरना था। ऐसे में रखरखाव खर्च को अगर मिला दें तो जीडीए को करीब 25 लाख का अब तक नुकसान हुआ है। व्हीकल फ्री जोन में सफाई सहित अन्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। दिसंबर 2020 में 59 लाख में क्योस्क का आवंटन हासिल करने वाले ठेकेदार रविंद्र झा की अप्रैल में कोरोना से मौत हो गई थी। तब से लेकर अब तक नए सिरे से क्योस्क व जोन का आवंटन नहीं हो सका है।
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शाम होते ही छा जाता है अंधेरा, असमाजिक तत्वों का जमावड़ा
आरडीसी में दो मॉल, नामी रेस्टोरेंट के साथ कई नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों के शोरूम हैं। यहां रोजाना कामकाज के अलावा खरीदारी के लिए 10 से 15 हजार लोग पहुंचते हैं। सप्ताह के आखिर में लोगों की भीड़ का आंकड़ा 15 हजार को भी पार कर जाता है। ऐसे में वर्तमान में आवंटन व रखरखाव नहीं होने से जोन में जहां तहां गंदगी देखी जा सकती है। जोन में लगाई गई आकर्षक स्ट्रीट लाइट जलने की जगह शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
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अंधेरे के कारण आवाजाही से करते हैं परहेज
1. लंबा वक्त बीतने के बावजूद आरडीसी में क्योस्क का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। शाम होते ही व्हीकल फ्री जोन में अंधेरा पसर जाता है। ऐसे में लोगों के साथ खासकर महिलाएं मार्ग का इस्तेमाल करने से बचती हैं। - रोहित
संचालन शुरू होने से पहले जीडीए करे रखरखाव
2. बीते डेढ़ साल से क्योस्क संचालन शुरू नहीं हो सकता है। जोन में लगाई गई आकर्षक लाइटें बंद रहती हैं। क्योस्क के आसपास तो गंदगी का आलम देखा जा सकता है। ऐसे में एजेंसी का आवंटन होने तक जीडीए को सही से रखरखाव करना चाहिए। - पवन