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रेरा के हस्तक्षेप से आवंटी को मिला घर का कब्जा और हर्जाना
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रेरा के हस्तक्षेप से आवंटी को मिला घर का कब्जा और हर्जाना
गाजियाबाद। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के हस्तक्षेप से महिला को 11 साल बाद इंदिरापुरम अहिंसा खंड स्थित एसवीपी गुलमोहर रेजीडेंसी प्रोजेक्ट में आशियाना और हर्जाना मिला है। कहीं से राहत नहीं मिलने पर परेशान आवंटी ने 2020 में रेरा के एनसीआर समझौता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। फिर फोरम की मध्यस्थता और कई दौर की वार्ता के बाद आवंटी को फ्लैट पर कब्जे के साथ हुई देरी पर 3.75 लाख का हर्जाना दिलाया गया।
2013 में मिलना था कब्जा, 2018 तक काम नहीं हुआ पूरा
गुलमोहर रेजीडेंसी प्रोजेक्ट में रेनू शर्मा ने साल 2010 में एक फ्लैट खरीदा था। इस फ्लैट के लिए एसवीपी ग्रुप, प्रमोटर को 49 लाख रुपये का भुगतान किया गया। बिल्डर के साथ हुए करार (बिल्डर बायर एग्रीमेंट) में आवंटी को मई 2013 तक कब्जा मिलना था। बिल्डर की ओर से प्रोजेक्ट के निर्माण में लगातार हुई देरी के कारण अप्रैल 2018 तक आवास की पूरी धनराशि का भुगतान आवंटी ने किया।
कब्जा देने में बिल्डर कर रहा था देरी
आवासीय प्रोजेक्ट का 2018 में काम पूरा होने और पूरी राशि जमा कराने के बाद आवंटी को फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। बिल्डर की ओर से फ्लैट का कब्जा देने में लगातार देरी की जा रही थी। वहीं, तय किया गया विलंब के हर्जाने का भुगतान करने के लिए बिल्डर तैयार नहीं था। फिर आवंटी के आवेदन पर एनसीआर कंसीलिएशन फोरम ने विवाद के समाधान के लिए पहले आवंटी और बिल्डर प्रतिनिधि को बुलाया। फिर फोरम में नियुक्त सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी आरडी पालीवाल के प्रयासों से विवाद का सालों बाद हल निकाल लिया गया।
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फोरम के जरिए आसानी से हल हो सकते हैं विवाद:
रेरा के एनसीआर समझौता फोरम के जरिए आसानी से बिल्डर और आवंटियों के बीच फ्लैट पर कब्जे सहित अन्य विवादों को आसानी से हल कराया जा सकता है। इसके लिए आवंटी को यूपी रेरा की वेबसाइट पर जाकर फोरम के लिंक पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा है। फिर फोरम के जरिये विवादों का आपसी समझौते के तहत सरल और त्वरित समाधान कराया जाता है। विधिक राय व केस पर होने वाले खर्च से भी बचा जा सकता है।
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गाजियाबाद। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के हस्तक्षेप से महिला को 11 साल बाद इंदिरापुरम अहिंसा खंड स्थित एसवीपी गुलमोहर रेजीडेंसी प्रोजेक्ट में आशियाना और हर्जाना मिला है। कहीं से राहत नहीं मिलने पर परेशान आवंटी ने 2020 में रेरा के एनसीआर समझौता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। फिर फोरम की मध्यस्थता और कई दौर की वार्ता के बाद आवंटी को फ्लैट पर कब्जे के साथ हुई देरी पर 3.75 लाख का हर्जाना दिलाया गया।
2013 में मिलना था कब्जा, 2018 तक काम नहीं हुआ पूरा
गुलमोहर रेजीडेंसी प्रोजेक्ट में रेनू शर्मा ने साल 2010 में एक फ्लैट खरीदा था। इस फ्लैट के लिए एसवीपी ग्रुप, प्रमोटर को 49 लाख रुपये का भुगतान किया गया। बिल्डर के साथ हुए करार (बिल्डर बायर एग्रीमेंट) में आवंटी को मई 2013 तक कब्जा मिलना था। बिल्डर की ओर से प्रोजेक्ट के निर्माण में लगातार हुई देरी के कारण अप्रैल 2018 तक आवास की पूरी धनराशि का भुगतान आवंटी ने किया।
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कब्जा देने में बिल्डर कर रहा था देरी
आवासीय प्रोजेक्ट का 2018 में काम पूरा होने और पूरी राशि जमा कराने के बाद आवंटी को फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। बिल्डर की ओर से फ्लैट का कब्जा देने में लगातार देरी की जा रही थी। वहीं, तय किया गया विलंब के हर्जाने का भुगतान करने के लिए बिल्डर तैयार नहीं था। फिर आवंटी के आवेदन पर एनसीआर कंसीलिएशन फोरम ने विवाद के समाधान के लिए पहले आवंटी और बिल्डर प्रतिनिधि को बुलाया। फिर फोरम में नियुक्त सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी आरडी पालीवाल के प्रयासों से विवाद का सालों बाद हल निकाल लिया गया।
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फोरम के जरिए आसानी से हल हो सकते हैं विवाद:
रेरा के एनसीआर समझौता फोरम के जरिए आसानी से बिल्डर और आवंटियों के बीच फ्लैट पर कब्जे सहित अन्य विवादों को आसानी से हल कराया जा सकता है। इसके लिए आवंटी को यूपी रेरा की वेबसाइट पर जाकर फोरम के लिंक पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा है। फिर फोरम के जरिये विवादों का आपसी समझौते के तहत सरल और त्वरित समाधान कराया जाता है। विधिक राय व केस पर होने वाले खर्च से भी बचा जा सकता है।