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अपने दम पर खड़ा किया व्यवसाय

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 15 Oct 2021 12:18 AM IST
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अपने दम पर खड़ा किया व्यवसाय
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गाजियाबाद। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी अब किसी से पीछे नहीं हैं। मजबूत इच्छा शक्ति के बल पर न केवल घर का चूल्हा चौका संभाल रहीं है बल्कि अपने हुनर को तराशकर नई ऊंचाइयों को भी छू रही हैं। स्वनिर्मित उत्पाद तैयार कर बड़ा व्यवसाय बनाकर खुद स्वावलंबी बन औरों को रोजगार मुहैया करा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर जहां महिलाओं ने पहले काफी छोटे स्तर पर कार्य शुरू किया था। अब उनमें से कुछ महिलाओं ने अपने पति का रोजगार भी शुरू करा दिया है। ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी हम आपको बता रहे हैं।...
ब्रिजेश एक साथ करती हैं कई काम
भोजपुर ब्लॉक की रहने वाली ब्रिजेश अपनी लगन और मेहनत की वजह से महज तीन साल में न सिर्फ अपने लिए कारोबार खड़ा किया बल्कि अपने पति के लिए दुकान भी खुलवा दी है। इसके अलावा बिजली सखी बनकर उन्होंने पिछले एक वर्ष में बिजली बिलों का इतना अच्छा कलेक्शन किया है कि उनको प्रशासन ने सम्मानित भी किया है। कपड़े सिलने का भी काम करती हैं।
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ब्रिजेश नवीं तक पढ़ पाई थीं। इसके बाद उनकी शादी हो गई। बच्चों और परिवार को संभालने में समय निकल गया। बीच में कुछ परेशानियां आईं तो ब्यूटी पार्लर या सिलाई का काम कर लेती थीं। सिलाई के हुनर के कारण ही बाद में उन्होंने एक समूह बनाने की हिम्मत की। सबसे पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ब्यूटी पार्लर और सिलाई की ट्रेनिंग ली। दो लाख का लोन लेकर कपड़ों के सिलाई का काम शुरू किया। इसमें कुछ फायदा हुआ और उनसे आसपास की महिलाएं भी जुड़ने लगीं। स्कूल के बच्चों की ड्रेस बनाने में कुछ मुनाफा हुआ। इसके बाद अन्य समूह तैयार कराए। अब लगभग 150 के करीब महिलाएं उनके साथ जुड़ी हैं।
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कोरोना काल में फैक्टरी से पति की नौकरी छूट गई तो अपनी ही जमीन पर दुकान बनवाकर दिया। ब्रिजेश मशरूम की खेती की ट्रेनिंग लेकर अब मशरूम की खेती भी कर रही हैं।
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खादी के कपड़े और डिटरजेंट बनाने का काम करती हैं सरिता
लोनी के बादशाहपुर सिरौली गांव की रहने वाली सरिता देवी ने पहले अपने स्तर पर कार्य शुरू किया था। जब स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिली तो उन्होंने उज्जवल स्वयं सहायता समूह बनाया और डिटरजेंट बनाने का काम शुरू किया। इस कार्य के करने के बाद रिवार्डिंग फंड मिला उस फंड ने खादी कीचादरें बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके साथ और महिलाएं जुड़ने लगीं।
सरिता ने बताया कि शुरूआत में ही उनके साथ अनु वर्मा नामक महिला जुड़ी और दोनों ने मिलकर इस समूह को आगे बढ़ाना शुरू किया। इंटर की पढ़ाई के बाद उनकी शादी हो गई थी लेकिन शुरू से ही कुछ अपना करने की चाह थी। शादी के बाद दूरस्थ शिक्षा से बीए की पढ़ाई की और उसके बाद एमए भी पूरा किया। परिवार और बच्चों की देखभाल में नौकरी की उम्र तो निकल गई थी फिर अपना कार्य शुरू करने का सोचा और बेटों ने इसके लिए प्रोत्साहित भी किया।

2017 में स्वयं सहायता समूह बनाया और अभी तक समूह से लगभग 70 महिलाएं जुड़ी हैं। महिलाओं को डिटरजेंट बनाने का प्रशिक्षण भी देती हैं। चादरें बनाने के लिए छोटी मशीन लगा रखी है जो पार्टनरशिप में लगाई है। ऑनलाइन शापिंग साइट्स पर अपने उत्पादों को डिस्प्ले भी किया और काफी डिमांड आई लेकिन डिमांड पूरी ही नहीं कर पाए। बड़ी मशीनें लगाने के लिए काफी फंड चाहिए अगर यह फंड मिल जाए तो पूरे देशभर में हम अपने उत्पाद सप्लाई कर सकते हैं।
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