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पहले डोज के मुकाबले आधी भी नहीं है दूसरी डोज लेने वालों की संख्या
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पहले डोज के मुकाबले आधी भी नहीं है दूसरी डोज लेने वालों की संख्या
गाजियाबाद। कोरोना से बचाव की वैक्सीन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की फुर्ती गायब दिखती है। जिले में वैक्सीन की पहली डोज के मुकाबले दूसरी डोज लेने वालों की संख्या आधी भी नहीं हुई है। कोरोना टीकाकरण को लेकर हर बार जिला लक्ष्य से पीछे ही रहा है। 50 लाख आबादी वाले जिले में टीकाकरण के पांच चरणों में तीन लाख 37 हजार लोगों को कोवैक्सीन और कोविशील्ड की पहली डोज मिली है। जबकि दूसरी डोज लेने वालों की संख्या भी इन चार महीने में महज 63 हजार तक ही पहुंची है।
जिले में 103 केंद्रों पर टीकाकरण की शुरुआत की गई थी। इनमें स्वास्थ्य विभाग के 64 और करीब 39 निजी केंद्र थे। 16 जनवरी से शुरू हुए अभियान की रफ्तार शुरू से ही सुस्त रही। पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना टीका लगवाए जाने की शुरुआत की गई थी। जनपद में करीब 45 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को टीकाकरण करने का लक्ष्य था। फ्रंटलाइन वर्कर्स के शामिल होने के बाद टीकाकरण का यह लक्ष्य 64 फीसदी तक पहुंचा था। इसके बाद एक मार्च से जिले में कोरोना टीकाकरण के तीसरे चरण की शुरुआत की गई। इसमें 60 वर्ष से अधिक आयु, 45 वर्ष से अधिक आयु वाले गंभीर रोगियों को शामिल किया गया। मार्च में 3 लाख 67 हजार लोगों को टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें से महज 34417 लोगों को ही टीका लगाया जा सका। एक अप्रैल से शुरू हुए टीकाकरण अभियान में टीका उत्सव के साथ शुरुआत की गई। इसमें 45 से अधिक आयु वाले लोगों को भी शामिल किया गया। इस दौरान 88000 लोगों को कोरोना का टीका लगाए जाने का लक्ष्य था। उत्सव के चार दिनों में करीब 45 हजार लोगों को ही टीका लग सका।
साढ़े चार महीने में भी नहीं बढ़ी रफ्तार
साढ़े चार महीनों में 50 लाख की आबादी वाले जिले में 3 लाख 37 हजार लोगों को कोरोना की डोज लगी है और महज 63 हजार को दूसरी डोज दी गई है। रफ्तार न बढ़ने से जिले में टीकाकरण अभियान को पूरा करने में सालों के वक्त लग सकता है।
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वैक्सीन की कमी से जूझ रहा विभाग
अप्रैल मध्य में वैक्सीन की कमी से कई बार स्वास्थ्य विभाग जूझ चुका है। इसको लेकर जनप्रतिनिधियों तक को सफाई देनी पड़ गई थी। अप्रैल से टीकाकरण के लिए केंद्रों पर दबाव भी बढ़ा जबकि मई की शुरुआत में निजी केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग का टीकाकरण बंद हो गया। जिसके बाद जिले में 18 से 44 वर्ष के लोगों का टीकाकरण भी सप्ताह भर बाद शुरू हो सका।
जिले में वैक्सीन की कोई कमी नही है। सभी केंद्र अपनी क्षमता के मुताबिक प्रतिदिन टीकाकरण कर रहे हैं। ऑनलाइन दिक्कतों के संबंध में शासन को अवगत कराया जा रहा है। -डॉ. विश्राम सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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गाजियाबाद। कोरोना से बचाव की वैक्सीन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की फुर्ती गायब दिखती है। जिले में वैक्सीन की पहली डोज के मुकाबले दूसरी डोज लेने वालों की संख्या आधी भी नहीं हुई है। कोरोना टीकाकरण को लेकर हर बार जिला लक्ष्य से पीछे ही रहा है। 50 लाख आबादी वाले जिले में टीकाकरण के पांच चरणों में तीन लाख 37 हजार लोगों को कोवैक्सीन और कोविशील्ड की पहली डोज मिली है। जबकि दूसरी डोज लेने वालों की संख्या भी इन चार महीने में महज 63 हजार तक ही पहुंची है।
जिले में 103 केंद्रों पर टीकाकरण की शुरुआत की गई थी। इनमें स्वास्थ्य विभाग के 64 और करीब 39 निजी केंद्र थे। 16 जनवरी से शुरू हुए अभियान की रफ्तार शुरू से ही सुस्त रही। पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना टीका लगवाए जाने की शुरुआत की गई थी। जनपद में करीब 45 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को टीकाकरण करने का लक्ष्य था। फ्रंटलाइन वर्कर्स के शामिल होने के बाद टीकाकरण का यह लक्ष्य 64 फीसदी तक पहुंचा था। इसके बाद एक मार्च से जिले में कोरोना टीकाकरण के तीसरे चरण की शुरुआत की गई। इसमें 60 वर्ष से अधिक आयु, 45 वर्ष से अधिक आयु वाले गंभीर रोगियों को शामिल किया गया। मार्च में 3 लाख 67 हजार लोगों को टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें से महज 34417 लोगों को ही टीका लगाया जा सका। एक अप्रैल से शुरू हुए टीकाकरण अभियान में टीका उत्सव के साथ शुरुआत की गई। इसमें 45 से अधिक आयु वाले लोगों को भी शामिल किया गया। इस दौरान 88000 लोगों को कोरोना का टीका लगाए जाने का लक्ष्य था। उत्सव के चार दिनों में करीब 45 हजार लोगों को ही टीका लग सका।
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साढ़े चार महीने में भी नहीं बढ़ी रफ्तार
साढ़े चार महीनों में 50 लाख की आबादी वाले जिले में 3 लाख 37 हजार लोगों को कोरोना की डोज लगी है और महज 63 हजार को दूसरी डोज दी गई है। रफ्तार न बढ़ने से जिले में टीकाकरण अभियान को पूरा करने में सालों के वक्त लग सकता है।
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वैक्सीन की कमी से जूझ रहा विभाग
अप्रैल मध्य में वैक्सीन की कमी से कई बार स्वास्थ्य विभाग जूझ चुका है। इसको लेकर जनप्रतिनिधियों तक को सफाई देनी पड़ गई थी। अप्रैल से टीकाकरण के लिए केंद्रों पर दबाव भी बढ़ा जबकि मई की शुरुआत में निजी केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग का टीकाकरण बंद हो गया। जिसके बाद जिले में 18 से 44 वर्ष के लोगों का टीकाकरण भी सप्ताह भर बाद शुरू हो सका।
जिले में वैक्सीन की कोई कमी नही है। सभी केंद्र अपनी क्षमता के मुताबिक प्रतिदिन टीकाकरण कर रहे हैं। ऑनलाइन दिक्कतों के संबंध में शासन को अवगत कराया जा रहा है। -डॉ. विश्राम सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी