{"_id":"604fbd398ebc3e592071daac","slug":"ghaziabad-ghaziabad-city-news-gbd2154785136","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजीकरण के खिलाफ सड़क पर उतरे बैंक कर्मचारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजीकरण के खिलाफ सड़क पर उतरे बैंक कर्मचारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निजीकरण के खिलाफ सड़क पर उतरे बैंक कर्मचारी
गाजियाबाद। दो बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ सोमवार से बैंकिंग संगठनों की हड़ताल शुरू हो गई। दो दिनी हड़ताल के पहले दिन जिले की लगभग 350 बैंक ब्रांच बंद रहीं और डेढ़ हजार से अधिक बैंककर्मी कार्य से विरत रहे। हड़ताल से जिले में करीब 2500 करोड़ का लेन-देन प्रभावित हुआ है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंककर्मियों ने नवयुग मार्केट में जोरदार प्रदर्शन किया। मंगलवार को हड़ताल के दूसरे दिन बैंक कर्मी आरडीसी में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
बैंक हड़ताल के चलते बैंक शाखाओं में पैसा निकालने और जमा करने, चेक क्लीयरेंस और ऋण मंजूरी जैसी सेवाओं पर असर पड़ा। नवयुग मार्केट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सामने सुबह 10.30 बजे बैंकिंग संगठनों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान बैंककर्मी मार्च निकालते हुए नवयुग मार्केट में आगे बढ़े। बैंकिंग रिफार्म के नाम पर भारत की मजदूर विरोधी नीतियों और बजट के दौरान दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की घोषणा करने पर तमाम बैंकर्स में केंद्र सरकार के खिलाफ काफी रोष दिखाई दिया। जिला संयोजक सुनील गोयल ने कहा कि सरकारी बैंकों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। यह भारत की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह चौपट कर देगा। उन्होंने कहा कि बजट में एलान किया था कि सरकार ने इस साल दो सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी के निजीकरण का फैसला किया है। सरकार इससे पहले आईडीबीआई बैंक में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम को बेच चुकी है। पिछले चार साल में सार्वजनिक क्षेत्र के 14 बैंकों का विलय किया जा चुका है। सचिव उत्कर्ष सिंह ने कहा कि मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसलिए लगातार दो दिन हड़ताल का फैसला लिया गया है। प्रदर्शन में एनके चोपड़ा, मुकेश कुमार, अशोक मारवाह, सुभाष कौशिक, मूलचंद, अमीचंद, सुभाष बैंसला, अनिल चौधरी, सुनील अग्रवाल, उदय प्रजापति मौजूद रहे।
परेशान रहे ग्राहक, आधार में भी देरी
बैंकों में हड़ताल का असर बैंक ग्राहकों पर दिखा। अपने बैंक संबंधी कार्य कराने के लिए ग्राहक भटकते दिखाई दिए। हालांकि कुछ निजी बैंक हड़ताल में शामिल नहीं हुए और सामान्य दिनों की तरह बैंकों में कार्य संचालित हुआ। आधार कार्ड संबंधी कार्य भी नहीं हो सके।
विज्ञापन
ये संगठन रहे हड़ताल में शामिल
हड़ताल में यूनाइटेड फ्रंट ऑफ बैंक यूनियंस, ऑल इंडिया बैंक इम्प्लॉइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक इम्प्लॉइज, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन और बैंक इम्प्लॉइज कंफेडरेशन आफ इंडिया शामिल हैं।
विज्ञापन
गाजियाबाद। दो बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ सोमवार से बैंकिंग संगठनों की हड़ताल शुरू हो गई। दो दिनी हड़ताल के पहले दिन जिले की लगभग 350 बैंक ब्रांच बंद रहीं और डेढ़ हजार से अधिक बैंककर्मी कार्य से विरत रहे। हड़ताल से जिले में करीब 2500 करोड़ का लेन-देन प्रभावित हुआ है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंककर्मियों ने नवयुग मार्केट में जोरदार प्रदर्शन किया। मंगलवार को हड़ताल के दूसरे दिन बैंक कर्मी आरडीसी में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
बैंक हड़ताल के चलते बैंक शाखाओं में पैसा निकालने और जमा करने, चेक क्लीयरेंस और ऋण मंजूरी जैसी सेवाओं पर असर पड़ा। नवयुग मार्केट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सामने सुबह 10.30 बजे बैंकिंग संगठनों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान बैंककर्मी मार्च निकालते हुए नवयुग मार्केट में आगे बढ़े। बैंकिंग रिफार्म के नाम पर भारत की मजदूर विरोधी नीतियों और बजट के दौरान दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की घोषणा करने पर तमाम बैंकर्स में केंद्र सरकार के खिलाफ काफी रोष दिखाई दिया। जिला संयोजक सुनील गोयल ने कहा कि सरकारी बैंकों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। यह भारत की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह चौपट कर देगा। उन्होंने कहा कि बजट में एलान किया था कि सरकार ने इस साल दो सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी के निजीकरण का फैसला किया है। सरकार इससे पहले आईडीबीआई बैंक में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम को बेच चुकी है। पिछले चार साल में सार्वजनिक क्षेत्र के 14 बैंकों का विलय किया जा चुका है। सचिव उत्कर्ष सिंह ने कहा कि मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसलिए लगातार दो दिन हड़ताल का फैसला लिया गया है। प्रदर्शन में एनके चोपड़ा, मुकेश कुमार, अशोक मारवाह, सुभाष कौशिक, मूलचंद, अमीचंद, सुभाष बैंसला, अनिल चौधरी, सुनील अग्रवाल, उदय प्रजापति मौजूद रहे।
विज्ञापन
परेशान रहे ग्राहक, आधार में भी देरी
बैंकों में हड़ताल का असर बैंक ग्राहकों पर दिखा। अपने बैंक संबंधी कार्य कराने के लिए ग्राहक भटकते दिखाई दिए। हालांकि कुछ निजी बैंक हड़ताल में शामिल नहीं हुए और सामान्य दिनों की तरह बैंकों में कार्य संचालित हुआ। आधार कार्ड संबंधी कार्य भी नहीं हो सके।
विज्ञापन
ये संगठन रहे हड़ताल में शामिल
हड़ताल में यूनाइटेड फ्रंट ऑफ बैंक यूनियंस, ऑल इंडिया बैंक इम्प्लॉइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक इम्प्लॉइज, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन और बैंक इम्प्लॉइज कंफेडरेशन आफ इंडिया शामिल हैं।