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अमीनों ने लोनी एसडीएम पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
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अमीनों ने लोनी एसडीएम पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
गाजियाबाद। राजस्व संग्रह अमीन संघ लोनी तहसील ने उपजिलाधिकारी लोनी पर अमीनों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसको लेकर अमीन संघ ने जिलाधिकारी से शिकायत भी की है।
अमीन संघ लोनी के अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा ने कहा कि तहसील में कार्यरत नियमित व सीजनल अमीनों के साथ मौजूदा एसडीएम शुभांगी शुक्ला द्वार पहले दिन से ही कर्मचारियों की बजाय अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। तैनाती के अगले ही दिन एसडीएम ने तहसील के नियमित अमीनो की समीक्षा के दौरान शहरी क्षेत्र से 50 लाख और ग्रामीण क्षेत्र के अमीनों से 20 लाख रुपये की वसूली कर एक सप्ताह के अंदर जमा करने का आदेश दि। टारगेट पूरा नहीं होने पर प्रतिकूल कार्यवाही की चेतावनी दी। जबकि राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा शहरी क्षेत्र के लिए पांच लाख व ग्रामीण क्षेत्र के लिए एक लाख रुपये प्रति माह का मानक तय है। सभी अमीन मानक के अनुसार वसूली कर रहे हैं लेकिन एसडीएम द्वारा मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है। समीक्षा के दौरान सभी अमीनों को खड़ा रखा गया। जबकि दूसरे कर्मचारी बैठे थे। चाहे मांगपत्र कम हो या ज्यादा वसूली का कार्य सिर्फ अमीनों से कराया जाता है। अधिकारी कोई सहयोग नहीं करते हैं।
अमीनों के साथ संग्रह अनुसेवकों की ड्यूटी दिखाई जाती है लेकिन अमीनों के साथ कोई संग्रह अनुसेवक नहीं है। सभी अधिकारियों के साथ या कार्यालय में तैनात हैं। जबकि सभी की मूल तैनाती संग्रह अमीनों के साथ है। अपने साथ हो रहे इस तरीके के व्यवहार से अमीनों में भारी नाराजगी है। अगर उपजिलाधिकारी अपने व्यवहार में बदलाव नहीं करती है तो अमीन काम बंद कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। संयुक्त कर्मचारी परिषद के जिला अध्यक्ष देवव्रत चौधरी ने कहा कि अमीनों के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद चिंताजनक है। स्थानीय अधिकारी अपने व्यवहार में बदलाव करें। नहीं तो कर्मचारियों के शोषण के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
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गाजियाबाद। राजस्व संग्रह अमीन संघ लोनी तहसील ने उपजिलाधिकारी लोनी पर अमीनों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसको लेकर अमीन संघ ने जिलाधिकारी से शिकायत भी की है।
अमीन संघ लोनी के अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा ने कहा कि तहसील में कार्यरत नियमित व सीजनल अमीनों के साथ मौजूदा एसडीएम शुभांगी शुक्ला द्वार पहले दिन से ही कर्मचारियों की बजाय अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। तैनाती के अगले ही दिन एसडीएम ने तहसील के नियमित अमीनो की समीक्षा के दौरान शहरी क्षेत्र से 50 लाख और ग्रामीण क्षेत्र के अमीनों से 20 लाख रुपये की वसूली कर एक सप्ताह के अंदर जमा करने का आदेश दि। टारगेट पूरा नहीं होने पर प्रतिकूल कार्यवाही की चेतावनी दी। जबकि राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा शहरी क्षेत्र के लिए पांच लाख व ग्रामीण क्षेत्र के लिए एक लाख रुपये प्रति माह का मानक तय है। सभी अमीन मानक के अनुसार वसूली कर रहे हैं लेकिन एसडीएम द्वारा मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है। समीक्षा के दौरान सभी अमीनों को खड़ा रखा गया। जबकि दूसरे कर्मचारी बैठे थे। चाहे मांगपत्र कम हो या ज्यादा वसूली का कार्य सिर्फ अमीनों से कराया जाता है। अधिकारी कोई सहयोग नहीं करते हैं।
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अमीनों के साथ संग्रह अनुसेवकों की ड्यूटी दिखाई जाती है लेकिन अमीनों के साथ कोई संग्रह अनुसेवक नहीं है। सभी अधिकारियों के साथ या कार्यालय में तैनात हैं। जबकि सभी की मूल तैनाती संग्रह अमीनों के साथ है। अपने साथ हो रहे इस तरीके के व्यवहार से अमीनों में भारी नाराजगी है। अगर उपजिलाधिकारी अपने व्यवहार में बदलाव नहीं करती है तो अमीन काम बंद कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। संयुक्त कर्मचारी परिषद के जिला अध्यक्ष देवव्रत चौधरी ने कहा कि अमीनों के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद चिंताजनक है। स्थानीय अधिकारी अपने व्यवहार में बदलाव करें। नहीं तो कर्मचारियों के शोषण के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
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