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महिला अस्पताल में आठ घंटे दर्द से तड़पती रही गर्भवती, नहीं मिला इलाज
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प्रसव के लिए महिला अस्पताल में भर्ती एक महिला आठ घंटे तक दर्द से तड़पती रही और डॉक्टर ये कहकर अपना पल्ला झाड़ते रहे कि अस्पताल में एनेस्थीसिया का डॉक्टर नहीं है इसलिए प्रसव नहीं कराया जा सकता। शाम चार बजे से लेकर रात 12 बजे तक परिजन अस्पताल के डॉक्टरों से महिला का प्रसव कराने की विनती करते रहे और डॉक्टर अपना रटा-रटाया जवाब देते रहे कि एनेस्थीसिया का डॉक्टर नहीं है, इसलिए कुछ नहीं हो सकता। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। अंत में गर्भवती के पति से कहा गया कि यहां इलाज नहीं मिलेगा कहीं और ले जाओ। इसके बाद अस्पताल के ही एक स्टाफ ने नंदग्राम स्थित एक क्लीनिक में रेफर कराकर महिला का सिजेरियन (ऑपरेशन) कराकर प्रसव कराया। बच्चे को नर्सरी में रखा गया है। महिला के पति का कहना है कि वह मामले की शिकायत शासन में करेंगे।
मालीवाड़ा निवासी नारायण मिश्रा की पत्नी अनुपम मिश्रा को बृहस्पतिवार की सुबह प्रसव पीड़ा हुई तो वह अपने परिचित से बात करके पहले सामुदायिक केंद्र वैशाली में ले गए। नारायण मिश्रा का कहना है कि वहां पर पहले दस हजार रुपये की मांग की गई। बाद में अल्ट्रासाउंड जांच कराने पर पता चला कि बच्चे का वजन ज्यादा है और सिजेरियन प्रसव होगा। तो बताया गया कि इसमें तीस हजार रुपये का खर्च होगा। इसके बाद नारायण पत्नी को लेकर शाम चार बजे महिला अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती अनुपम दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन किसी भी डॉक्टर या स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। रात नौ बजे सीएमएस से बात करने के बाद महिला को ग्लूूकोज की डिप लगाई गई। इस दौरान दर्द से तड़प रही अनुपम बेसुध होने लगी तो उनके साथ मौजूद महिला तीमारदार ने नारायण को जानकारी दी। पत्नी का प्रसव कराने के लिए वह डॉक्टरों सहित अन्य स्टाफ के सामने गिड़गिड़ाते रहे, इसके बावजूद डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। रात 11:30 बजे नारायण को बताया गया कि बच्चे की धड़कन कम हो रही है, इसलिए यहां से किसी अन्य सेंटर पर ले जाओ।
11:55 पर क्लीनिक ले गए, रात एक बजे हुआ ऑपरेशन
नारायण ने बताया कि प्रसव पीड़ा से कराह रही अनुपम की तबीयत बिगड़ती जा रही थी, इसी दौरान अस्पताल के ही एक कर्मचारी ने उन्हें मरीज को नंदग्राम स्थित एक क्लीनिक ले जाने की सलाह दी। उसने बताया कि वहां रात में ही आपरेशन हो जाएगा। उसके कहने पर वह पत्नी को निजी वाहन से क्लीनिक ले गए, वहां पर रात एक बजे ऑपरेशन के बाद महिला ने बेटे को जन्म दिया।
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रात में तीन महीने से नहीं हो रहे सिजेरियन प्रसव
अस्पताल के स्टाफ की मानें तो पिछले तीन महीने से रात में सिजेरियन प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं। जो भी गर्भवती प्रसव के लिए रात में अस्पताल आती हैं, उन्हें या तो लौटा दिया जाता है अथवा रेफर कर दिया जाता है। जानकारों का कहना है कि अस्पताल में ऑनकाल की सुविधा रहती है। रात में डॉक्टरों को बुलाकर सिजेरियन प्रसव कराए जा सकते हैं।
इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर नहीं करतीं आपरेशन
बृहस्पतिवार की रात महिला अस्पताल की इमरजेंसी में जो डॉक्टर ड्यूटी पर थीं, वह सिर्फ एमबीबीएस हैं। आपरेशन करने का प्रशिक्षण उनके पास नहीं है और वह सिर्फ सामान्य प्रसव ही कराती हैं। ऐसे में लेबर रूम में रात में सिजेरियन प्रसव हो नहीं सकता।
एंबुलेंस से हायर सेंटर रेफर करने का हैै निर्देश
शासन का निर्देश है कि किसी भी मरीज को बिना इलाज किए अस्पताल से वापस नहीं भेज सकते। अगर इलाज की सुविधा नहीं है तो उसे अस्पताल की एंबुलेंस से हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाए। इसके बावजूद गर्भवती महिला को आधी रात को अस्पताल से दूसरी जगह ले जाने को कह दिया गया। यही नहीं, उन्हें सरकारी एंबुलेंस भी मुहैया नहीं कराई गई।
सीएचसी व पीएचसी से रेफर होकर आती हैं महिला अस्पताल
लोनी में किसी गर्भवती को रेफर करने पर अधिकांश तौर पर परिजन जीटीबी ले जाते हैं। जबकि मोदीनगर, मुरादनगर और डासना व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से उन गर्भवती महिलाओं को महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जिनका सामान्य प्रसव करने में परेशानी होती है। हालांकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी सिजेरियन प्रसव की सुविधा है, लेकिन कई बार वहां भी स्टाफ की कमी की बात कहकर रेफर कर दिया जाता है।
किसी भी गर्भवती महिला को अगर रात में रेफर किया जाता है, तो उसे एंबुलेंस से हायर सेंटर के लिए रेफर करने का निर्देश है। अगर रात में किसी मरीज को बिना सुविधा दिए बाहर किया गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। -डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
महिला का सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया जा रहा था, इसके बावजूद परिजन स्वेच्छा से रेफर कराकर ले गए थे। अस्पताल में दो एनेस्थेटिस्ट हैं। दोनों अपनी ड्यूटी करके चले गए थे। अस्पताल में एक एनेस्थेटिस्ट की नियुक्ति के लिए सीएमओ एवं शासन से मांग की गई है। -डॉ. संगीता गोयल, सीएमएस महिला अस्पताल
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मालीवाड़ा निवासी नारायण मिश्रा की पत्नी अनुपम मिश्रा को बृहस्पतिवार की सुबह प्रसव पीड़ा हुई तो वह अपने परिचित से बात करके पहले सामुदायिक केंद्र वैशाली में ले गए। नारायण मिश्रा का कहना है कि वहां पर पहले दस हजार रुपये की मांग की गई। बाद में अल्ट्रासाउंड जांच कराने पर पता चला कि बच्चे का वजन ज्यादा है और सिजेरियन प्रसव होगा। तो बताया गया कि इसमें तीस हजार रुपये का खर्च होगा। इसके बाद नारायण पत्नी को लेकर शाम चार बजे महिला अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती अनुपम दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन किसी भी डॉक्टर या स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। रात नौ बजे सीएमएस से बात करने के बाद महिला को ग्लूूकोज की डिप लगाई गई। इस दौरान दर्द से तड़प रही अनुपम बेसुध होने लगी तो उनके साथ मौजूद महिला तीमारदार ने नारायण को जानकारी दी। पत्नी का प्रसव कराने के लिए वह डॉक्टरों सहित अन्य स्टाफ के सामने गिड़गिड़ाते रहे, इसके बावजूद डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। रात 11:30 बजे नारायण को बताया गया कि बच्चे की धड़कन कम हो रही है, इसलिए यहां से किसी अन्य सेंटर पर ले जाओ।
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11:55 पर क्लीनिक ले गए, रात एक बजे हुआ ऑपरेशन
नारायण ने बताया कि प्रसव पीड़ा से कराह रही अनुपम की तबीयत बिगड़ती जा रही थी, इसी दौरान अस्पताल के ही एक कर्मचारी ने उन्हें मरीज को नंदग्राम स्थित एक क्लीनिक ले जाने की सलाह दी। उसने बताया कि वहां रात में ही आपरेशन हो जाएगा। उसके कहने पर वह पत्नी को निजी वाहन से क्लीनिक ले गए, वहां पर रात एक बजे ऑपरेशन के बाद महिला ने बेटे को जन्म दिया।
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रात में तीन महीने से नहीं हो रहे सिजेरियन प्रसव
अस्पताल के स्टाफ की मानें तो पिछले तीन महीने से रात में सिजेरियन प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं। जो भी गर्भवती प्रसव के लिए रात में अस्पताल आती हैं, उन्हें या तो लौटा दिया जाता है अथवा रेफर कर दिया जाता है। जानकारों का कहना है कि अस्पताल में ऑनकाल की सुविधा रहती है। रात में डॉक्टरों को बुलाकर सिजेरियन प्रसव कराए जा सकते हैं।
इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर नहीं करतीं आपरेशन
बृहस्पतिवार की रात महिला अस्पताल की इमरजेंसी में जो डॉक्टर ड्यूटी पर थीं, वह सिर्फ एमबीबीएस हैं। आपरेशन करने का प्रशिक्षण उनके पास नहीं है और वह सिर्फ सामान्य प्रसव ही कराती हैं। ऐसे में लेबर रूम में रात में सिजेरियन प्रसव हो नहीं सकता।
एंबुलेंस से हायर सेंटर रेफर करने का हैै निर्देश
शासन का निर्देश है कि किसी भी मरीज को बिना इलाज किए अस्पताल से वापस नहीं भेज सकते। अगर इलाज की सुविधा नहीं है तो उसे अस्पताल की एंबुलेंस से हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाए। इसके बावजूद गर्भवती महिला को आधी रात को अस्पताल से दूसरी जगह ले जाने को कह दिया गया। यही नहीं, उन्हें सरकारी एंबुलेंस भी मुहैया नहीं कराई गई।
सीएचसी व पीएचसी से रेफर होकर आती हैं महिला अस्पताल
लोनी में किसी गर्भवती को रेफर करने पर अधिकांश तौर पर परिजन जीटीबी ले जाते हैं। जबकि मोदीनगर, मुरादनगर और डासना व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से उन गर्भवती महिलाओं को महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जिनका सामान्य प्रसव करने में परेशानी होती है। हालांकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी सिजेरियन प्रसव की सुविधा है, लेकिन कई बार वहां भी स्टाफ की कमी की बात कहकर रेफर कर दिया जाता है।
किसी भी गर्भवती महिला को अगर रात में रेफर किया जाता है, तो उसे एंबुलेंस से हायर सेंटर के लिए रेफर करने का निर्देश है। अगर रात में किसी मरीज को बिना सुविधा दिए बाहर किया गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। -डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
महिला का सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया जा रहा था, इसके बावजूद परिजन स्वेच्छा से रेफर कराकर ले गए थे। अस्पताल में दो एनेस्थेटिस्ट हैं। दोनों अपनी ड्यूटी करके चले गए थे। अस्पताल में एक एनेस्थेटिस्ट की नियुक्ति के लिए सीएमओ एवं शासन से मांग की गई है। -डॉ. संगीता गोयल, सीएमएस महिला अस्पताल