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हरियाली पर आरी चलाकर बनाया जाएगा ग्रीन कॉरिडोर
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गाजियाबाद। निर्माणाधिन दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे. फोटो: अमर उजाला।
- फोटो : GHAZIABAD City
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हरियाली पर आरी चलाकर बनाया जाएगा ग्रीन कॉरिडोर
गाजियाबाद। गाजियाबाद की सीमा से गुजर रहे दिल्ली-देहरादून ग्रीन कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की राह में आ रहे 340 पेड़ों को काटने के लिए कवायद शुरू हो गई है। एनएचएआई ने पेड़ काटने की अनुमित वन विभाग से मांगी है।
दिल्ली से गाजियाबाद और सहारनपुर होकर देहरादून की दूरी अभी 235 किमी है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी घटकर 210 किमी रह जाएगी। चार फेज में बनने वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। पहला चरण अक्षरधाम दिल्ली से यूपी बार्डर तक है। लोनी के नानू, मंडोला, अबरोला समेत चार गांवों से होकर एक्सप्रेसवे गुजर रहा है। लोनी में एलाइनमेंट के बीच में 340 पेड़ आ रहे हैं। इन पेड़ों की उम्र 50 से 100 साल तक है। कुछ लोगों ने बीच में पेड़ों को बचाने के लिए मांग की थी। राष्ट्रीय हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार का कहना है कि पेड़ों को काटने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग से अनुमति मांगी गई है।
दिसंबर 2023 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
इस आर्थिक गलियारे को बनाने में करीब दो हजार करोड़ रुपये की लागत आने की उम्मीद है। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि पूरे एक्सप्रेसवे को बनाने में 10 हजार पेड़ रास्ते में आ रहे हैं। इन पेड़ों को हटाने का काम चल रहा है। दिसंबर 2023 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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25 किमी की एलिवेटेड रोड और 14 किमी की बनेगी सुरंग
हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल पर तैयार होने वाले इस एक्सप्रेसवे पर 25 किमी की एलिवेटेड रोड और 14 किलोमीटर की सुरंग बनाई जाएगी। छह लेन के एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर ग्रीनरी लगाई जाएगी, ताकि वाहनों से निकलने वाले कार्बन को पौधे अपनी ओर खींच सकें। सहारनपुर और उत्तराखंड के बीच में एलिवेटेड रोड से जंगल का दृश्य देखने को मिलेगा।
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गाजियाबाद। गाजियाबाद की सीमा से गुजर रहे दिल्ली-देहरादून ग्रीन कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की राह में आ रहे 340 पेड़ों को काटने के लिए कवायद शुरू हो गई है। एनएचएआई ने पेड़ काटने की अनुमित वन विभाग से मांगी है।
दिल्ली से गाजियाबाद और सहारनपुर होकर देहरादून की दूरी अभी 235 किमी है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी घटकर 210 किमी रह जाएगी। चार फेज में बनने वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। पहला चरण अक्षरधाम दिल्ली से यूपी बार्डर तक है। लोनी के नानू, मंडोला, अबरोला समेत चार गांवों से होकर एक्सप्रेसवे गुजर रहा है। लोनी में एलाइनमेंट के बीच में 340 पेड़ आ रहे हैं। इन पेड़ों की उम्र 50 से 100 साल तक है। कुछ लोगों ने बीच में पेड़ों को बचाने के लिए मांग की थी। राष्ट्रीय हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार का कहना है कि पेड़ों को काटने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग से अनुमति मांगी गई है।
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दिसंबर 2023 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
इस आर्थिक गलियारे को बनाने में करीब दो हजार करोड़ रुपये की लागत आने की उम्मीद है। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि पूरे एक्सप्रेसवे को बनाने में 10 हजार पेड़ रास्ते में आ रहे हैं। इन पेड़ों को हटाने का काम चल रहा है। दिसंबर 2023 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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25 किमी की एलिवेटेड रोड और 14 किमी की बनेगी सुरंग
हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल पर तैयार होने वाले इस एक्सप्रेसवे पर 25 किमी की एलिवेटेड रोड और 14 किलोमीटर की सुरंग बनाई जाएगी। छह लेन के एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर ग्रीनरी लगाई जाएगी, ताकि वाहनों से निकलने वाले कार्बन को पौधे अपनी ओर खींच सकें। सहारनपुर और उत्तराखंड के बीच में एलिवेटेड रोड से जंगल का दृश्य देखने को मिलेगा।